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भारत में प्रेस स्वतंत्रता: हेली लिंग का सवाल और राहुल गांधी की प्रतिक्रिया

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Written by
Rishabh Rai

नॉर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेस सवालों से बचने को लेकर बहस छिड़ गई है। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे के साथ संयुक्त प्रेस मीट में पीएम मोदी ने मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया। इस पर नॉर्वे की पत्रकार हेली लिंग ने पूछा कि भारत पर दुनिया का भरोसा क्यों करना चाहिए और प्रेस के सवालों का जवाब क्यों नहीं मिलता।

हेली लिंग ने बाद में सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि नॉर्वे दुनिया में प्रेस फ्रीडम में पहले नंबर पर है, जबकि भारत केवल 157वें स्थान पर है। उन्होंने भारत की स्थिति की तुलना फिलीस्तीन, अमीरात और क्यूबा से की। पत्रकार ने सवाल उठाया कि भारत में मानवाधिकार उल्लंघन और प्रेस स्वतंत्रता के मुद्दों का क्या समाधान होगा।

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इस पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर पीएम मोदी की आलोचना की। उन्होंने लिखा कि जब दुनिया एक ऐसा प्रधानमंत्री देखती है जो सवालों से घबराकर बचता है, तो इसका असर भारत की छवि पर पड़ता है। राहुल गांधी ने कहा कि अगर छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो डरने की जरूरत नहीं।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने हेली लिंग को 18 मई को प्रेस ब्रीफिंग में बुलाया। पश्चिम मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज ने पत्रकार के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत की विश्वसनीयता उसके इतिहास, आबादी, संप्रभुता और जिम्मेदारीपूर्ण भूमिका पर आधारित है। उन्होंने कोविड महामारी के दौरान भारत द्वारा वैक्सीन और मदद पहुंचाने, और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाए गए मुद्दों का हवाला दिया।

हालांकि, पत्रकार ने बार-बार सीधे जवाब की मांग की। सिबी जॉर्ज ने कहा कि यह उनका अधिकार है कि वे कैसे जवाब देंगे। इस दौरान हेली ने कहा कि वे किसी विदेशी सरकार की जासूस नहीं हैं, बल्कि सिर्फ पत्रकार हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके सवाल लोकतंत्र और प्रेस आज़ादी के अधिकारों को लेकर थे।

इस घटनाक्रम ने भारत में प्रेस स्वतंत्रता और लोकतंत्र की परीक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया। लोकतंत्र में मीडिया का काम सत्ता से सवाल पूछना और जवाब प्राप्त करना है। जब उच्च पद पर बैठे नेता सवालों से बचते हैं, तो यह न केवल राष्ट्रीय छवि बल्कि नागरिकों के विश्वास पर भी असर डालता है।

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