
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन तैयार, पटरी पर उतारने से पहले अंतिम परीक्षण शुरू
नई दिल्ली/लखनऊ। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन बनकर पूरी तरह तैयार हो गई है। पटरी पर उतारने से पहले रेलवे की तकनीकी टीम ने इसके अंतिम परीक्षण शुरू कर दिए हैं। लखनऊ स्थित रेलवे के अभिकल्प, विकास एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के विशेषज्ञ अधिकारी ट्रेन संचालन से जुड़े हर तकनीकी मानक की बारीकी से जांच कर रहे हैं।
पावर कार और सुरक्षा प्रणालियों पर विशेष फोकस
टेस्टिंग टीम का मुख्य फोकस पावर कार और उससे जुड़े सुरक्षा एवं नियंत्रण उपकरणों पर रहा। स्पीड सेंसर और कंट्रोल सिस्टम को अलग-अलग गति पर परखा गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ट्रेन सभी निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित रूप से संचालित हो सके। परीक्षण के दौरान ट्रेन को धीमी और मध्यम गति पर चलाकर उपकरणों की कार्यक्षमता दर्ज की गई। साथ ही यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनज़र ट्रेन के पायदानों की मजबूती और ऊंचाई की भी जांच की गई।
11 केवी निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित
उत्तर रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, हरियाणा में जींद और सोनीपत के बीच चलाई जाने वाली इस हाइड्रोजन ट्रेन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। ट्रेन के ईंधन के लिए जींद में स्थापित हाइड्रोजन प्लांट को नियमित संचालन के दौरान स्थिर और निर्बाध 11 केवी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर दी गई है।
परियोजना में किसी तरह की बाधा न आए—मुख्य सचिव
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के अधिकारियों के साथ हाइब्रिड मोड में बैठक की। बैठक में प्लांट की वर्तमान विद्युत आपूर्ति स्थिति, बैकअप व्यवस्थाओं और भविष्य की जरूरतों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि परियोजना में किसी भी तरह की बाधा न आए, इसके लिए बिजली आपूर्ति प्रणाली की नियमित समीक्षा, वैकल्पिक व्यवस्था और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत रखा जाए।
देश का सबसे बड़ा हाइड्रोजन प्लांट स्थापित
बैठक में यह भी बताया गया कि हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना के लिए जींद में 3,000 किलोग्राम भंडारण क्षमता वाला देश का सबसे बड़ा हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है, जो अब कमीशनिंग के अंतिम चरण में है। यह प्लांट 24 घंटे के आधार पर संचालित होगा।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अंतिम परीक्षण सफल रहने के बाद देश की यह पहली हाइड्रोजन ट्रेन जल्द ही नियमित परिचालन के लिए पटरी पर उतारी जाएगी, जो स्वच्छ और हरित परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।









