
देश के चार राज्यों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार में हुए विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। इन चुनावों में कांग्रेस एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कर्नाटक में कांग्रेस की अपनी सरकार होने के बावजूद पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। वहीं, बिहार में भी कांग्रेस को सभी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों ने कांग्रेस के संगठन, उम्मीदवारों के चयन और चुनाव प्रचार की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इन चार राज्यों में विधान परिषद की कुल 28 सीटों पर चुनाव हुए। कांग्रेस ने इनमें से 12 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी सभी सीटों पर हार गई। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव हुए, लेकिन कांग्रेस ने यहां किसी भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ा। महाराष्ट्र में कांग्रेस ने तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। मतगणना के दौरान तीनों सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार पीछे चल रहे थे। वहीं, बिहार में कांग्रेस ने पांच सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर सकी।
कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता बिहार के नतीजे हैं। पार्टी के नेताओं ने भी इस हार को गंभीरता से लेने की जरूरत बताई है। कांग्रेस के लोकसभा सांसद मनोज कुमार ने एबीपी न्यूज से बातचीत में कहा कि बिहार के नतीजे चिंताजनक हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से संगठन की कमियों को दूर करने और नेताओं की जिम्मेदारी तय करने की अपील की।
मनोज कुमार ने कहा कि चुनाव के दौरान नेताओं को प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी ठीक से नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि वह खुद अपनी इच्छा से पटना स्थित सदाकत आश्रम पहुंचे थे। उन्हें किसी ने चुनाव प्रचार के लिए कोई विशेष काम नहीं सौंपा था। उनके इस बयान से पार्टी के भीतर चुनाव प्रबंधन और आपसी तालमेल की कमी का पता चलता है।
कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने भी चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों का चयन सही तरीके से नहीं हुआ, जिसके कारण पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि उम्मीदवारों के चयन से जुड़े सवालों का जवाब संबंधित प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष ही दे सकते हैं।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इन चुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया। बीजेपी ने 22 सीटों पर चुनाव लड़ा और इनमें से 14 सीटों पर जीत हासिल की। इससे पार्टी की चुनावी स्थिति मजबूत दिखाई दी।
इन चुनावों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कांग्रेस लंबे समय से बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती रही है। एमएलसी चुनाव बैलेट पेपर से हुए, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस को जीत नहीं मिली। इस कारण विरोधी दलों ने कांग्रेस पर निशाना साधा।
कुल मिलाकर, एमएलसी चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का अवसर हैं। पार्टी को अपने उम्मीदवारों के चयन, संगठन की मजबूती, चुनाव प्रचार और नेताओं के बीच तालमेल पर ध्यान देना होगा। यदि कांग्रेस समय रहते इन कमियों को दूर नहीं करती है, तो आने वाले चुनावों में भी उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।






