
लखनऊ। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों की विधान परिषद सीटों के चुनाव परिणामों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों पर हुए मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को कई अहम जगहों पर झटका लगा, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) ने उत्तर प्रदेश में अपनी स्थिति मजबूत की। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यूपी की 11 सीटों में भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि सपा चार सीटें जीत चुकी थी और एक सीट पर आगे चल रही थी। वाराणसी में भाजपा अपनी शिक्षक एमएलसी सीट नहीं बचा सकी।
गोरखपुर में कांटे की टक्कर, भाजपा की जीत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर क्षेत्र में भाजपा ने कड़े मुकाबले के बाद जीत दर्ज की। भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव को 307 मतों से हराया। ध्रुव त्रिपाठी को 14,887 वोट मिले, जबकि राजीव यादव को 14,580 मत प्राप्त हुए। मतगणना के दौरान दोनों प्रत्याशियों के बीच मुकाबला लगातार दिलचस्प बना रहा और अंतिम आंकड़ों में भाजपा प्रत्याशी ने जीत हासिल की।
वाराणसी में सपा की लगातार दूसरी जीत
वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी डॉ. प्रमोद मिश्रा को 5,015 मतों से पराजित किया। लाल बिहारी यादव को 11,612 वोट मिले, जबकि डॉ. प्रमोद मिश्रा के खाते में 6,597 वोट आए। इस परिणाम को वाराणसी में भाजपा के लिए अहम झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
बिहार में जेडीयू प्रत्याशी की जीत
बिहार के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नीरज कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के दिलीप राय को हराया। इस सीट पर मुकाबले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। जन सुराज के अनुज सिंह भी चुनावी मुकाबले में चर्चा में रहे।
नागपुर में कांग्रेस ने दोहराया प्रदर्शन
महाराष्ट्र के नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस नेता अभिजीत गोविंदराव वंजारी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने दिसंबर 2020 में भी इस सीट पर जीत हासिल की थी। पेशे से अधिवक्ता और शिक्षाविद् वंजारी लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े हैं। नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मुख्यालय होने के साथ-साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र भी है। ऐसे में यहां कांग्रेस की जीत राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सपा के प्रदर्शन से बढ़ी राजनीतिक चर्चा
पिछले चुनाव में तीन सीटें जीतने वाली सपा ने इस बार शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में अपना प्रदर्शन बेहतर किया है। लखनऊ और आगरा की स्नातक सीटों पर जीत ने पार्टी के लिए नए राजनीतिक संकेत दिए हैं। इन चुनावों में शिक्षकों, वकीलों, डॉक्टरों, प्रोफेसरों और अन्य पंजीकृत मतदाताओं की भूमिका अहम होती है।
हालांकि, विधान परिषद चुनाव के नतीजों को पूरे प्रदेश के जनमत का सीधा प्रतिबिंब नहीं माना जा सकता, क्योंकि इन निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता वर्ग सीमित और विशिष्ट होता है। इसके बावजूद विभिन्न क्षेत्रों में आए परिणामों ने भाजपा और विपक्षी दलों के लिए राजनीतिक समीक्षा की जरूरत बढ़ा दी है।






