
नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। दिल्ली के नजफगढ़ में यमुना की सफाई से जुड़ी 8,941 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत के दौरान शाह ने विपक्ष की राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल धरना-प्रदर्शन करने और चुनाव में हार के बाद चुनाव आयोग पर आरोप लगाने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। इसी दौरान उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की सरकार अगले 30 साल तक बनने वाली नहीं है।
अमित शाह का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), मतदाता सूची और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। बीजेपी और विपक्ष के बीच चुनाव प्रक्रिया तथा वोट चोरी के आरोपों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है।
वोट चोरी के आरोपों पर राहुल गांधी को घेरा
अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए जनता के बीच जाना और उनकी समस्याओं को समझना जरूरी है। उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि वह धरना-प्रदर्शन करने के बजाय जनता के दुख-दर्द को समझे और उनके समाधान के लिए काम करे।
शाह ने कहा कि राजनीतिक विरोध और भीड़ जुटाने से जनता का जनादेश नहीं बदला जा सकता। उनके मुताबिक, विपक्ष को अपनी राजनीति में सुधार करना चाहिए और लोगों के बीच रहकर उनका विश्वास जीतना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विपक्ष जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं देगा, तो उसका बचा हुआ जनाधार भी कमजोर हो सकता है।
घुसपैठियों के वोट बचाने का लगाया आरोप
केंद्रीय गृह मंत्री ने विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनाव में हार के बाद ईवीएम, मतदाता सूची और चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष एसआईआर का विरोध करके घुसपैठियों के वोट बचाने की कोशिश कर रहा है।
शाह के अनुसार, बीजेपी की जीत को वोट चोरी से जोड़ना गलत है। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत और हार के कारणों को समझने के लिए राजनीतिक दलों को जनता के बीच अपने काम का आकलन करना चाहिए।
हालांकि, घुसपैठियों के वोट बचाने को लेकर अमित शाह ने जो आरोप लगाए, वे उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। विपक्ष की ओर से इन मुद्दों पर अलग-अलग तर्क दिए जाते रहे हैं। मतदाता सूची में बदलाव और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
कई राज्यों में कांग्रेस की चुनावी स्थिति का जिक्र
अपने संबोधन में अमित शाह ने गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर के कई राज्यों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कई राज्यों में लंबे समय से सत्ता से बाहर है।
शाह ने तर्क दिया कि कांग्रेस की चुनावी मुश्किलें नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ही शुरू नहीं हुईं। उन्होंने गुजरात और उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में कांग्रेस लंबे समय से सरकार बनाने में सफल नहीं रही है।
उन्होंने अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर, असम और दिल्ली समेत अन्य राज्यों की चुनावी स्थिति का भी उल्लेख किया। शाह का कहना था कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक कमजोरियों पर विचार करना चाहिए, न कि हर चुनावी हार के बाद चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने चाहिए।
‘अगले 30 साल तक नहीं बनेगी आपकी सरकार’
अमित शाह ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा राजनीतिक रवैये के कारण कांग्रेस के लिए सत्ता में वापसी करना मुश्किल होगा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की सरकार अगले 30 साल तक नहीं बनने वाली है।
शाह ने कहा कि वह जनता के बीच रहकर राजनीति करते हैं और देश के लोग विपक्ष के व्यवहार को देख रहे हैं। उनके इस बयान को कांग्रेस पर राजनीतिक दबाव बनाने और बीजेपी के पक्ष में माहौल मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष पर निशाना
अमित शाह ने चुनाव आयोग के प्रति विपक्ष के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल उन राज्यों में चुनाव आयोग और मतदाता सूची पर भरोसा जताते हैं, जहां उन्हें जीत मिलती है, लेकिन हारने पर उसी व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं।
उन्होंने केरल, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। शाह के मुताबिक, चुनावी नतीजे अपने पक्ष में आने पर प्रक्रिया को सही बताना और हारने पर उस पर संदेह करना उचित नहीं है।
इंडिया गठबंधन के प्रदर्शनों पर भी हमला
अमित शाह ने इंडिया गठबंधन के प्रदर्शनों पर निशाना साधते हुए कहा कि दूसरे राज्यों से कार्यकर्ताओं को बुलाकर दिल्ली में प्रदर्शन करने से चुनावी जनादेश नहीं बदला जा सकता। उन्होंने विपक्ष को जनता के बीच जाकर काम करने की सलाह दी।
शाह के इस बयान के बाद एसआईआर, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। एक ओर बीजेपी विपक्ष पर चुनावी हार के बहाने बनाने का आरोप लगा रही है, वहीं विपक्ष मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठा रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा देश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।









