
पीले वस्त्र, चंदन का तिलक और 2027 का ऐलान: क्या पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह की नई राजनीतिक पारी की तैयारी
वाराणसी। पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर पूर्वांचल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि वे किस विधानसभा सीट से और किस राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे, इसे लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। लेकिन उनके इस संकेत ने समर्थकों में उत्साह और राजनीतिक विरोधियों में हलचल जरूर बढ़ा दी है।
हाल के दिनों में बृजेश सिंह का बदला हुआ सार्वजनिक स्वरूप भी चर्चा का विषय बना हुआ है। माथे पर चंदन का तिलक, पीली धोती-कुर्ता और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय उपस्थिति ने उनकी नई पहचान बनाई है। हाल ही में वे अपनी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह के साथ जगन्नाथ मंदिर, वाराणसी में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में भी शामिल हुए। राजनीतिक जानकार इसे केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि नई राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों में बृजेश सिंह ने धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी अलग छवि बनाने का प्रयास किया है। इसका सकारात्मक प्रभाव युवाओं और आम लोगों के बीच भी देखने को मिल रहा है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बृजेश सिंह सिर्फ अपनी राजनीतिक वापसी की तैयारी ही नहीं कर रहे, बल्कि परिवार की राजनीतिक भूमिका को भी मजबूत करने में जुटे हैं। सूत्रों के अनुसार उनकी नजर जौनपुर जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भी है, जहां उनकी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वहीं बेटी प्रियंका सिंह और बेटे सिद्धार्थ सिंह की राजनीतिक सक्रियता को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।
सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि बृजेश सिंह जमानिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। माना जाता है कि इस क्षेत्र से उनकी पत्नी का पारिवारिक संबंध भी है। वहीं वाराणसी शहर की किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर भी अटकलें लगाई जा रही हैं।
यदि बृजेश सिंह जमानियां से चुनाव मैदान में उतरते हैं तो मुकाबला काफी दिलचस्प और हाई-प्रोफाइल हो सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह इस क्षेत्र में अफज़ाल अंसारी और अंसारी परिवार का मजबूत राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। ऐसे में संभावित बृजेश सिंह बनाम अंसारी परिवार की चुनावी लड़ाई पूर्वांचल की सबसे चर्चित राजनीतिक टक्करों में शामिल हो सकती है।
यह भी चर्चा है कि सत्तारूढ़ दल के कई वरिष्ठ नेताओं से बृजेश सिंह के मधुर संबंध हैं। साथ ही जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के विकास कार्यों को लेकर केंद्रीय नेतृत्व द्वारा की गई सार्वजनिक सराहना भी राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित कर रही है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बृजेश सिंह किस दल से चुनाव लड़ेंगे, इसलिए इसे लेकर हो रही सभी चर्चाएं अभी केवल राजनीतिक अटकलें हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव के करीब आने पर ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी। इतना जरूर है कि उनके एक ऐलान ने पूर्वांचल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।








