
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय सेशेल्स यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीति और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई। सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हरमिनी ने प्रधानमंत्री मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्डियन ऑफ़ द ब्लू होराइज़न’ से सम्मानित किया। यह पहली बार है जब सेशेल्स ने किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया है। इस सम्मान को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत के 1.4 अरब नागरिकों का सम्मान बताया और कहा कि वह इसे उन सभी देशों को समर्पित करते हैं जो जलवायु परिवर्तन की चुनौती से जूझते हुए पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हमेशा जलवायु न्याय, ब्लू इकोनॉमी और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग का समर्थक रहा है। उन्होंने मिशन LiFE, ‘एक पेड़ माँ के नाम’, इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) और डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) जैसी वैश्विक पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए दुनिया के साथ मिलकर काम कर रहा है। सेशेल्स द्वारा दिया गया यह सम्मान भारत की इन्हीं पहलों और छोटे द्वीपीय देशों के हितों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति माना जा रहा है।
यह दौरा इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि इस वर्ष सेशेल्स की स्वतंत्रता के 50 वर्ष और भारत-सेशेल्स राजनयिक संबंधों की स्वर्ण जयंती भी मनाई जा रही है। दोनों देशों ने इस अवसर पर एक स्मारक लोगो जारी किया और द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने का संकल्प दोहराया।
यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर के विशेष आर्थिक सहयोग पैकेज के तहत चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की। साथ ही डिजिटल भुगतान, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य, कृषि और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने भरोसा दिलाया कि भारत अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का अनुभव सेशेल्स के साथ साझा करेगा ताकि तकनीक आधारित विकास को गति मिल सके। दोनों नेताओं ने हिंद महासागर क्षेत्र को शांति, समृद्धि और साझा अवसरों का क्षेत्र बनाने पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘सागर’ नीति को नई मजबूती देने के साथ-साथ हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक और आर्थिक भूमिका को और सशक्त करेगी।








