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अमेरिका-ईरान में ऐतिहासिक शांति समझौता, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का ऐलान

ईरान में ऐतिहासिक शांति समझौता
ईरान में ऐतिहासिक शांति समझौता
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Written by
Rishabh Rai

वॉशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व में पिछले कई महीनों से जारी तनाव और संभावित बड़े सैन्य संघर्ष की आशंकाओं के बीच दुनिया को राहत देने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही कूटनीतिक वार्ताओं के बाद ऐतिहासिक शांति समझौता संपन्न हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए इसे क्षेत्रीय और वैश्विक शांति की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक संदेश जारी करते हुए कहा कि ईरान के साथ समझौता पूरी तरह से फाइनल हो चुका है। उन्होंने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के खोलने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना द्वारा की जा रही नाकाबंदी को भी तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाएगा। ट्रंप ने अपने संदेश में लिखा, “दुनिया के जहाजों, अपने इंजन शुरू करो। तेल को बहने दो।”

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होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। पिछले कुछ महीनों से क्षेत्रीय तनाव के कारण इस मार्ग को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी देखने को मिला था। अब इसके सामान्य रूप से खुलने की घोषणा के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस समझौते की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस ऐतिहासिक समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। उनके अनुसार दोनों देश लेबनान समेत विभिन्न मोर्चों पर जारी सैन्य गतिविधियों को समाप्त करने पर सहमत हो गए हैं।

सूत्रों के अनुसार इस समझौते को अंतिम रूप देने में कतर, सऊदी अरब और तुर्किये की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। क्षेत्रीय देशों के सहयोग और मध्यस्थता ने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने में अहम योगदान दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौते की शर्तों का सफलतापूर्वक पालन होता है तो इससे न केवल मध्य पूर्व में स्थिरता बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

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