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TVK को समर्थन पर कांग्रेस का बचाव, चिदंबरम बोले- सहयोगी दलों को पहले ही दे दी थी जानकारी

पी चिदंबरम का बड़ा बयान
पी चिदंबरम का बड़ा बयान
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Written by
Rishabh Rai

नई दिल्ली/चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस और डीएमके के बीच बढ़े तनाव के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने पार्टी के रुख का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को समर्थन देने का फैसला अचानक नहीं लिया गया था, बल्कि इसकी जानकारी गठबंधन के सभी सहयोगी दलों को पहले ही दे दी गई थी।

एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने से पहले डीएमके, भाकपा, वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) सहित अन्य सहयोगी दलों को अपने फैसले से अवगत करा दिया था। उन्होंने कहा कि अंतर केवल इतना था कि कांग्रेस ने अपने समर्थन की सार्वजनिक घोषणा अन्य सहयोगी दलों से एक दिन पहले कर दी।

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चिदंबरम के अनुसार, विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ऐसी स्थिति बन गई थी, जिसमें किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। विजय के नेतृत्व वाली टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे 118 के बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि यदि टीवीके बहुमत साबित नहीं कर पाती तो राज्य को दोबारा चुनाव का सामना करना पड़ सकता था, जिसे न तो जनता चाहती थी और न ही अधिकांश राजनीतिक दल।

उन्होंने कहा, “हम एक और चुनाव टालना चाहते थे। गठबंधन सहयोगियों की भी यही व्यापक भावना थी। जनता भी दोबारा चुनाव नहीं चाहती थी। इसी कारण हमने स्थिर सरकार के हित में यह फैसला लिया।”

हालांकि कांग्रेस के इस कदम से डीएमके नाराज है। विधानसभा चुनाव में डीएमके और कांग्रेस ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था, लेकिन नतीजों के बाद कांग्रेस द्वारा टीवीके को समर्थन दिए जाने को डीएमके ने राजनीतिक विश्वासघात बताया है। डीएमके की युवा इकाई ने एक प्रस्ताव पारित कर कांग्रेस पर गठबंधन के साथ धोखा करने का आरोप लगाया। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता टी.आर. बालू ने भी कहा कि कांग्रेस ने उन मतदाताओं के भरोसे को तोड़ा है जिन्होंने गठबंधन के पक्ष में मतदान किया था।

गौरतलब है कि कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन के बाद वीसीके, भाकपा और माकपा ने भी टीवीके का साथ दिया। इन दलों के समर्थन से विजय की पार्टी बहुमत का आंकड़ा पार करने में सफल रही और सरकार बनाने का दावा पेश कर सकी। अब इस मुद्दे ने विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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