
उत्तर प्रदेश के जेवर में पीएम मोदी द्वारा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। यह एयरपोर्ट न केवल दिल्ली-एनसीआर का दूसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, बल्कि तेजी से विकसित हो रहे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को वैश्विक कनेक्टिविटी से जोड़ने की दिशा में भी अहम कदम है।
इस परियोजना के पहले चरण में एयरपोर्ट की क्षमता सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की है। भविष्य में इसे चरणबद्ध तरीके से विस्तारित किया जाएगा, जिससे यह देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल हो सके। प्रधानमंत्री ने उद्घाटन के दौरान टर्मिनल भवन का निरीक्षण किया और इसके आधुनिक ढांचे तथा सुविधाओं की सराहना की।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र की रणनीतिक महत्ता पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि दादरी वह स्थान है, जहां देश के दो प्रमुख फ्रेट कॉरिडोर- पूर्वी और पश्चिमी-आपस में मिलते हैं। इससे उत्तर भारत की कनेक्टिविटी बंगाल और गुजरात के समुद्री तटों से मजबूत हुई है। इस मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी का सीधा लाभ किसानों और उद्योगों को मिलेगा, क्योंकि उनके उत्पाद अब तेजी से देश और दुनिया के बाजारों तक पहुंच सकेंगे।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह एयरपोर्ट निवेश को आकर्षित करने का एक बड़ा केंद्र बनेगा। बेहतर सड़क, रेल और हवाई संपर्क के कारण यहां उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो रहा है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
उन्होंने हाल के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई बड़े प्रोजेक्ट्स तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। नोएडा में सेमीकंडक्टर फैक्ट्री की नींव, दिल्ली-मेरठ नमो भारत ट्रेन की प्रगति और मेरठ मेट्रो का विस्तार- ये सभी परियोजनाएं मिलकर इस क्षेत्र को नई पहचान दे रही हैं।
प्रधानमंत्री ने इसे “डबल इंजन सरकार” के विकास मॉडल का उदाहरण बताते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से विकास की रफ्तार तेज हुई है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले जहां नोएडा को “लूट का एटीएम” कहा जाता था, वहीं आज यह उत्तर प्रदेश के विकास का इंजन बन चुका है।
कुल मिलाकर, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट न केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना है, बल्कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने वाला कदम है।






