
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में पहली बार विस्तृत सार्वजनिक बयान दिया। लगभग 25 मिनट तक चले भाषण में पीएम मोदी ने न केवल विदेश नीति और सुरक्षा पर अपने दृष्टिकोण को साझा किया, बल्कि देश में ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा की स्थिति पर भी प्रकाश डाला।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह के नागरिक या पावर प्लांट पर हमले को भारत स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “होमुर्ज का मार्ग किसी भी स्थिति में रोका नहीं जाना चाहिए। यह अंतरराष्ट्रीय परिवहन और व्यापार की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।” पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत की कोशिश है कि देश में तेल और गैस संकट न हो। इसके लिए भारत अब 27 की बजाय 41 देशों से तेल और गैस का आयात कर रहा है। विस्तृत बयान में प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि संकट की शुरुआत के बाद अब तक 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित रूप से देश लौट चुके हैं। इनमें ईरान से लौटने वाले हजारों भारतीय शामिल हैं, जिनमें 700 से अधिक मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्र भी शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने छह प्रमुख क्षेत्रों में अपने दृष्टिकोण को रेखांकित किया:
1. तेल और गैस संकट: उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने संकट के समय के लिए कच्चे तेल के भंडारण को प्राथमिकता दी है। वर्तमान में देश के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार है, जिसे बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक करने का काम चल रहा है। इसके अलावा देश की तेल कंपनियां अलग स्टोरेज सुविधाओं के साथ तैयार हैं, जिससे आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा न आए।
2. अन्न-राशन सुरक्षा: प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास पर्याप्त अन्न भंडार मौजूद है। आपात स्थिति से निपटने के लिए हर तरह की व्यवस्था की गई है। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि किसानों को यूरिया की बोरी 300 रुपए से भी कम में दी जा रही है और फर्टिलाइजर से जुड़े जहाज सुरक्षित रूप से भारत तक पहुँच रहे हैं।
3. भारतीय नागरिकों की सुरक्षा: संकट की घड़ी में भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। पीएम ने कहा कि अब तक 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित देश लौट चुके हैं और इसमें ईरान से लौटे हजारों लोग शामिल हैं। छात्रों की सुरक्षित वापसी भी सुनिश्चित की गई है।
4. पावर सप्लाई: प्रधानमंत्री ने देश में बढ़ती बिजली की मांग और गर्मी के मौसम को देखते हुए आश्वासन दिया कि पावर प्लांट में पर्याप्त कोल स्टॉक उपलब्ध है और बिजली उत्पादन से लेकर सप्लाई तक के सभी सिस्टम मॉनीटर किए जा रहे हैं।
5. ऊर्जा क्षेत्र: मोदी ने कहा कि ऊर्जा आज भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ग्लोबल नीड का मुख्य स्रोत पश्चिम एशिया है। युद्ध के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए भारत रणनीति के तहत कार्य कर रहा है। सरकार ने एक विशेष समूह का गठन किया है, जो हर दिन आयात-निर्यात में आने वाली समस्याओं पर काम करता है।
6. युद्ध पर दृष्टिकोण: प्रधानमंत्री ने डिप्लोमेसी में भारत की भूमिका स्पष्ट की और कहा कि सभी पक्षों को तनाव कम करने और शांति स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कॉमर्शियल जहाजों पर हमले और रुकावट को अस्वीकार्य बताया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत सभी देशों के साथ बातचीत और सहयोग के लिए तैयार है।
वहीं, इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री की आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश के 50 प्रतिशत घरों में गैस सिलेंडर की कमी है। उनका दावा है कि जो सिलेंडर पहले 14.2 किलो का होता था, उसे अब 10 किलो कर दिया गया है। इस कमी के चलते बड़े उद्योग बंद होने की कगार पर हैं और देश के हर हिस्से ने नीतिगत गलतियों का खामियाजा भुगता है।
खेड़ा ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का जिक्र करते हुए कहा कि यदि भारत ने विदेशी दबाव स्वीकार नहीं किया होता, तो यह मार्ग बिना किसी रुकावट के खुला रहता। उन्होंने बताया कि ईरान आठ देशों के साथ बातचीत कर रहा है, जिनमें भारत भी शामिल है, और यह तेल खरीद चीन की करेंसी युआन में करने की योजना में है। खेड़ा ने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि उन्होंने युद्ध की शुरुआत और इसके गंभीर प्रभावों पर निंदा करने की हिम्मत नहीं दिखाई। उन्होंने यह भी कहा कि खामेनेई की हत्या पर प्रधानमंत्री के बयान में शोक व्यक्त करने के दो शब्द भी नहीं थे। उनका मानना है कि घरेलू संकट का असर अब हर घर और उद्योग पर दिखाई दे रहा है।








