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अवध सूत्र पर बड़ी ख़बरे

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अवध सूत्र पर बड़ी ख़बरे

अवध सूत्र हिंदी दैनिक समाचार पत्र
यूपी के पांच शहरों में 79 हजार से अधिक अभ्यार्थी देंगे पीसीएस-जे प्री की परीक्षा
आगरा, कानपुर, गोरखपुर, मेरठ, प्रयागराज के 171 केंद्रों पर आयोजित होगी पीसीएस-जे प्री की परीक्षा
प्रारंभिक परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न होंगे और गलत उत्तर पर निगेटिव मार्किंग होगी
प्रयागराज:उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने यूपी न्यायिक सेवा सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा- 2022 की प्रारंभिक परीक्षा 12 फरवरी को प्रस्तावित की है। ये परीक्षा राज्य के पांच शहरों (आगरा, कानपुर, गोरखपुर, मेरठ, प्रयागराज) के 171 केंद्रों पर आयोजित होगी। प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होने के लिए 79561 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं। पीसीएस जे के 303 पदों में अनारक्षित (सामान्य वर्ग) के लिए 123, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 81, अनुसूचित जाति के लिए 63, अनुसूचित जनजाति के लिए 06 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 30 पद आरक्षित हैं। इसमें क्षैतिज आरक्षण के तहत भूतपूर्व सैनिकों के लिए 16, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित के 06, महिला के 60 एवं दिव्यांगजनों के लिए 12 पद हैं। प्रारंभिक परीक्षा में एक पद के मुकाबले 10 अभ्यर्थियों और मुख्य परीक्षा में एक पद के मुकाबले तीन अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए सफल घोषित किया जाएगा। प्रारंभिक परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न होंगे और गलत उत्तर पर निगेटिव मार्किंग होगी।आयोग की ओर से जारी सूचना के अनुसार आगरा में 51 केंद्रों पर 23671, कानपुर में 27 केंद्रों पर 12598, गोरखपुर में 28 केंद्रों पर 13005, मेरठ में 32 केंद्रों पर 14632, प्रयागराज में 33 केंद्रों पर 15353 अभ्यर्थी परीक्षा के लिए पंजीकृत हैं।
कमरों में कैमरे लगे न बैठने की जगह और बना दिया परीक्षा केन्द्र
यूपी बोर्ड ने केंद्र तो बना दिए पर मानक पूरे नहीं
डीआईओएस ने 31 जनवरी से पहले तैयारी के दिए थे निर्देश
लखनऊ। यूपी बोर्ड के परीक्षा केन्द्र रेलवे हायर सेकेण्ड्री स्कूल में अभी तक हर कमरे में सीसी कैमरे नहीं लग पाए हैं। स्कूल के मुख्य द्वार पर कैमरा नहीं लगा है। हर कमरे में फर्नीचर नहीं है। कमरों में अंधेरा है। प्रश्न पत्र व कापियां रखने के लिए स्ट्रांग रूम तैयार नहीं है। डीआईओएस ने 31 जनवरी से पहले परीक्षा केन्द्र मानक के अनुरूप तैयार करने के निर्देश दिये थे लेकिन अभी तक तैयारियां पूरी नहीं की। शनिवार को हिन्दुस्तान ने पड़ताल की तो कई खामियां केन्द्र में मिलीं।परीक्षा केंद्र पर अभी तक निगरानी सिस्टम विकसित नहीं हो पाया है। परीक्षा केन्द्र के हर कक्ष में दो कमरे, स्ट्रांग रूम व मुख्य गेट पर अभी तक सीसी कैमरे नहीं लग पाए हैं। अभी कैमरे लग रहे हैं। शनिवार को एक कर्मचारी प्रधानाचार्य कक्ष के पास बरामदे मेंवायरिंग व सीसी कैमरा लगा रहा था।स्कूल के एक शिक्षक से पूछने पर बताया कि परीक्षा शुरू होने से पहले तक सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी।तीन कमरों में दिन में भी अंधेरा रहता है। बच्चों के बैठने वाले कई कमरों में फर्नीचर तक नहीं हैं। बिजली के उपकरण व स्वीच बोर्ड दुरुस्त नहीं हैं। कमरे धूल और गंदगी से पटे हैं। देखने से लगता है कि कई महीनों से इन कमरों की सफाई नहीं हुई है। मुख्य गेट पर स्कूल के नाम का बोर्ड तक नहीं है।
मुख्य गेट पर 24 घंटे सीसी कैमरे चलेंगे
लखनऊ। यूपी बोर्ड के परीक्षा केन्द्रों पर प्रधानाचार्य कक्ष, स्ट्रांग रूम और केन्द्र के मुख्य प्रवेश द्वार पर 24 घंटे सीसी कैमरे चलेंगे। हर कक्ष में दो-दो कैमरे वायस रिकार्डर लगेंगे। कक्ष निरीक्षक फोटो युक्त पहचान पत्र के साथ ड्यूटी करेंगे। यह जरूरी निर्देश शनिवार को गोमतीनगर में जेडी सुरेन्द्र तिवारी और एडीएम प्रशासन बिपिन कुमार मिश्रा ने यूपी बोर्ड के सभी 126 परीक्षा केन्द्रों के केन्द्र व्यवस्थापकों को जरूरी दिशा निर्देश जारी किये।
डीआईओएस राकेश कुमार पाण्डेय ने बताया कि समीक्षा बैठक में केन्द्र व्यवस्थापकों को माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा यूपी बोर्ड परीक्षाओं को लेकर जारी की गई गाइड लाइन बतायी। सभी को निर्देशित किया कि वह इन गाइड लाइन को सख्ती से पालन करें। केन्द्र व्यस्थापकों को जल्द तैयारियां पूरी करने की सख्त हिदायत दी गई है।
534 बच्चे देंगे परीक्षा
यूपी बोर्ड ने आलमबाग स्थित रेलवे हायर सेकेण्ड्री स्कूल को यूपी बोर्ड का परीक्षा केन्द्र बनाया है। 10 वीं और 12 वीं के करीब 534 बच्चे दोनों पालियों में परीक्षा देंगे। छह स्कूल के बच्चे परीक्षाएं देने जाएंगे।
रेलवे हायर सेकेंड्री स्कूल राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज में बने कंट्रोल रूम से जुड़ गया है हो सकता है कुछ कमरों में कैमरे लग रहे हों। केन्द्र की पड़ताल कराएंगे। अनियमितता पायी जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
राकेश कुमार पाण्डेय, डीआईओएस
ये हैं जरूरी निर्देश
● स्ट्रांग रूम में डबल लॉक और प्रश्न पत्र और कापियां व अन्य समाग्री रखने के लिए दो अलमारियां
● प्रधानाचार्य कक्ष, स्ट्रांग रूम व परीक्षा केन्द्र के मुख्य द्वार पर 24 सीसी कैमरे चलेंगे
● बच्चों के मोबाइल केन्द्र के बाहर बॉक्स में रखने की व्यवस्था हो
● केन्द्रों के केन्द्र व्यवस्थापक, बाहरी केन्द्र व्यवस्थापक और डीएम द्वारा तैनात सेक्टर मजिस्ट्रेट निगरानी रखेंगे
शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए किया घेराव
लखनऊ। एलयू में एनएसयूआई और समाजवादी छात्र सभा के छात्रों ने शनिवार को फाइनेंस ऑफिस का घेराव किया। छात्रों ने गेट नंबर एक से लेकर प्रशासनिक भवन तक शुल्क प्रतिपूर्ति को लेकर नारेबाजी की। छात्रों ने बताया कि जिन्होंने एडमिशन वापस लिया या सब्जेक्ट बदला उनकी फीस रिफंड नहीं की है। प्रॉक्टर राकेश द्विवेदी ने कहा अगले शनिवार तक परास्नातक के भी विद्यार्थियों के शुल्क प्रतिपूर्ति का कार्य पूरा हो जाएगा। एनएसयूआई इकाई अध्यक्ष विशाल सिंह, शहर अध्यक्ष प्रिंस प्रकाश आदि मौजूद रहे।
नैक मूल्यांकन पूरा परिणाम का इंतजार
लखनऊ। केजीएमयू में नैक टीम ने मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। आठ सदस्यीय टीम ने केजीएमयू में ज्यादातर विभागों का मुआयना किया। सरोजनीनगर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का जायजा लिया। तीन दिनों तक टीम ने केजीएमयू को नैक मानकों पर परखा। अब केजीएमयू को रिजल्ट का इंतजार है। केजीएमयू में बीते तीन दिनों से नैक टीम मानकों को परख रही है। उपकरण, वार्ड और आईसीयू में भर्ती मरीजों की इलाज की व्यवस्था भी परखी। छात्रों के माता-पिता के अनुभवों को भी जाना।
परीक्षा में सहयोग के लिए लाएं थर्ड डिवीजन पास छात्र
बरेली। यूपी बोर्ड परीक्षा से पूर्व जिले में टॉपर छात्रों की नहीं बल्कि थर्ड डिग्री से पास छात्रों की खोज हो रही है। बोर्ड के नियम के अनुसार हाथ से लिखने में अक्षम परीक्षार्थियों को थर्ड डिवीजन पास छात्र ही लेखक के रूप में मिल सकता है। अब मुश्किल ये है कि आज-कल 45 फीसदी या उससे कम नंबर गिनती के ही बच्चों के आते हैं। ऐसे में परीक्षार्थियों को लेखक खोजे नहीं मिल रहे हैं।माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा 16 फरवरी से 4 मार्च तक होंगी। हाथ में चोट होने पर अथवा हाथ से दिव्यांग होने पर परीक्षार्थियों को मददगार के रूप में लेखक मिलता है। बोर्ड का यह नियम है कि लेखक परीक्षार्थी से ऊंची कक्षा में नहीं होना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लेखक के अंतिम परीक्षा में 45 फीसदी से अधिक अंक न आए हों। मतलब वो छात्र थर्ड डिवीजन पास हो। यूपी बोर्ड ने जबसे मॉडरेशन नीति लागू की है तब से अधिकांश छात्र द्वितीय श्रेणी में पास होते हैं।
फतेहपुर के धर्मांतरण केस में फरार शिक्षक की कुर्की होगी
फतेहपुर। सामूहिक धर्मांतरण के मामले में पुलिस फरार कानपुर के शिक्षक के घर की जल्द कुर्की करेगी। सीजेएम कोर्ट ने शनिवार को कुर्की का आदेश जारी कर दिया है।14 अप्रैल को हरिहरगंज के इवेजलिकल चर्च में सामूहिक धर्मांतरण मामले में सरकारी स्कूल के शिक्षक आशीष इमैनुअल का नाम प्रकाश में आया था। कानपुर के अर्मापुर स्टेट निवासी शिक्षक शहर के आबूनगर में रहता था। पुलिस ने शिक्षक को नोटिस जारी किया था।हाजिर न होने पर विवेचक ने एक फरवरी को कुर्की के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। शनिवार को कोर्ट ने कुर्की का आदेश जारी कर दिया। विवेचक के मुताबिक, इंस्पेक्टर अमित मिश्रा ने बताया कि कोर्ट से आदेश प्राप्त हो गया है, जल्द कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।
सामूहिक धर्मांतरण के मामले में 34 नामजद के अलावा पुलिस की जांच में 26 अन्य आरोपितों के नाम प्रकाश में आए हैं। पुलिस विजय मसीह समेत 14 आरोपितों को गिरफ्तार कर अब तक जेल भी भेज चुकी है। अंजू रानी, भानू प्रताप व मुकुल कोर्ट में हाजिर हो चुके हैं। कुछ आरोपित हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत पर हैं, जबकि कुलपति आरबी लाल समेत 43 आरोपितों को पुलिस तलाश रही है। आईबी की एक टीम शनिवार को कोतवाली में डटी रही। उसने कार्रवाई और साक्ष्यों पर बात की।
अनुमोदन नहीं तो सिर्फ पासिंग मार्क्स
कानपुर।सीएसजेएमयू ने सत्र 2022-23 में नई शिक्षा नीति (एनईपी) पाठ्यक्रम के अन्तर्गत प्रैक्टिकल व मौखिक परीक्षा के नियमों को सख्त कर दिया है। यदि किसी महाविद्यालय में स्नातक व परास्नातक के छात्रों की संख्या बैच की न्यूनतम संख्या से कम है तो उसकी परीक्षा किसी दूसरे महाविद्यालय में होगी। यदि आंतरिक परीक्षक के रूप में महाविद्यालय में अनुमोदित शिक्षक नहीं है तो वहां के छात्रों को न्यूनतम उत्तीर्णांक (पासिंग मार्क्स) दे दिए जाएंगे।एनईपी के अन्तर्गत विश्वविद्यालय की स्नातक प्रथम व तृतीय सेमेस्टर, परास्नातक प्रथम सेमेस्टर और पूर्व से संचालित विषम सेमेस्टर की प्रायोगिक व मौखिक परीक्षाएं कराई जानी हैं। इसके लिए परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंजनी कुमार मिश्र ने गाइडलाइन जारी कर दी है।महाविद्यालय आन्तरिक परीक्षा के लिए विवि की कॉलेज लॉग इन में दिए अनुमोदित शिक्षकों की सूची से परीक्षकों का चयन कर सकेंगे। परीक्षक के मोबाइल पर ओटीपी आएगा। इससे सत्यापन के बाद ही चयन की पुष्टि होगी। महाविद्यालय में उपलब्ध संबंधित विषय के अनुमोदित शिक्षकों में से चयन किया जा सकेगा। किसी कारण से महाविद्यालय में संबंधित विषय का अनुमोदित शिक्षक नहीं है अथवा कम हैं तो ऐसे महाविद्यालयों पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए परीक्षार्थियों को न्यूनतम उत्तीर्णांक दिए जाएंगे।
संख्या भी निर्धारित की गई
इसके अलावा वाह्य परीक्षक पांच और आंतरिक परीक्षक चार बैच से ज्यादा प्रैक्टिकल अथवा मौखिक परीक्षा नहीं ले सकेंगे। स्नातक स्तर पर एक बैच में छात्रों की न्यूनतम संख्या 25 और अधिकतम संख्या 120 रहेगी। परास्नातक में एक बैच में न्यूनतम संख्या 10 व अधिकतम संख्या 60 रह सकती है। ऐसे में यदि स्नातक में 25 और परास्नातक में 10 से कम छात्र हैं तो इनकी प्रायोगिक अथवा मौखिक परीक्षा दूसरे महाविद्यालय में अन्य कॉलेज के छात्रों के साथ होगी। यहां वाह्य परीक्षक विश्वविद्यालय स्वयं नियुक्त करेगा। पोर्टल पर आन्तरिक एवं बाह्य शिक्षक की एक साथ फोटो और प्रायोगात्मक परीक्षा कराते हुए परीक्षार्थियों के साथ ग्रुप फोटो अपलोड करना अनिवार्य होगा। यदि महाविद्यालय प्रायोगिक अथवा मौखिक परीक्षा के अंक 28 फरवरी तक नहीं भेजता है तो छात्रों को लिखित परीक्षा के आधार पर औसत अंक दिए जाएंगे।
सॉल्वर गैंग के सरगना सहित किए 7 गिरफ्तार, ऑनलाइन परीक्षा केंद्र का कर्मचारी भी था शामिल
आगरा एसएससी जीडी की परीक्षा में सॉल्वर गैंग नकली फिंगरप्रिंट से सेंध लगा रहा था। असली अभ्यर्थी की जगह सॉल्वर परीक्षा दे रहे थे। छह लाख रुपये में पूरी परीक्षा में पास कराने का ठेका लेते थे। शनिवार को सैंया पुलिस ने सरगना, सॉल्वर सहित 7 को गिरफ्तार किया है।सरगना नकली फिंगरप्रिंट तैयार कराता था, जिसे सॉल्वर इस्तेमाल करके परीक्षा केंद्र के कर्मचारी की मदद से आसानी से प्रवेश कर जाता। कर्मचारी 30 हजार रुपये तक एक साॅल्वर के लेता था। अभ्यर्थी के नकली फिंगरप्रिंट के कारण बायोमेट्रिक में सॉल्वर नहीं पकड़ा जाता था।डीसीपी पश्चिमी सोनम कुमार ने बताया कि एक महीने में सॉल्वर गैंग के 10 सदस्य गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इसके बावजूद गैंग सक्रिय था। इनके बारे में जानकारी जुटाई जा रही थी। पुलिस टीम लगाई थी। इस पर मुखबिर से गैंग के बारे में जानकारी मिली। शनिवार को सैंया के वीरई चौराहे से सॉल्वर गैंग को पकड़ लिया गया।
छह लाख में लेते थे ठेका
पुलिस की पूछताछ में पता चला कि आरोपी समरवीर गैंग का सरगना है। वह परा स्नातक है। नेट की परीक्षा पास कर चुका है। पीएचडी कर रहा है। परीक्षा में पास कराने के लिए छह से आठ लाख रुपये लेता है। वह परीक्षा में सॉल्वर बैठाने से लेकर पास कराने तक का दावा करते थे। सिर्फ साॅल्वर बैठाना है तो दो लाख रुपये तक लेते। समरवीर का साथी हेतराम है।परीक्षार्थियों से पूर्व में ही आधी रकम ले ली जाती है। जितेंद्र और प्रदीप पढ़ाई में कमजोर युवाओं से बात करते हैं। वह परीक्षा केंद्र पर साॅल्वर ले जाते हैं। वहीं रुपये भी लेते हैं। रविकांत यादव सॉल्वर है। वह एक परीक्षा के 50 हजार रुपये लेता है। सुनील कुनाल स्कूल का कर्मचारी है। सुनील की काॅलेज प्रबंधक के साथ व्यवस्था रहती है। समरवीर की उससे बातचीत है। वह स्कूल के गेट पर रहता है।वह सॉल्वर को अंदर प्रवेश दिला देता है। वह एक साॅल्वर के 30 हजार रुपये लेता है। कैलाश चंद फिंगरप्रिंट तैयार करता है। इसके लिए पांच हजार रुपये लेता है। नकली फिंगरप्रिंट काे रविकांत ही परीक्षा के समय उपयोग में लाता है। वह कई सॉल्वर बैठा चुके हैं। समरवीर कई साल से काम कर रहा है। पुलिस उसका आपराधिक इतिहास खंगाल रही है।
इनकी हुई गिरफ्तारी
इरादतनगर के कुर्रा टोडरा निवासी हेतराम, कागारौल के गढ़ी कालिया समरवीर, मथुरा के प्रताप नगर निवासी प्रदीप कुमार, अकोला निवासी जितेंद्र, फिरोजाबाद निवासी रविकांत यादव, नगला सेवा धधाऊ निवासी सुनील और शिकोहाबाद निवासी कैलाश चंद को गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से एक कार, एक बाइक, नौ मोबाइल, 57900 रुपये, दो नकली फिंगरप्रिंट के लिफाफे, दो कांच प्लेट, फोटो के कागज, दो इंक पेड, लिक्विड बोतल आदि बरामद हुए हैं।
परीक्षा की तैयारी करते हुए बन गया सॉल्वर
मक्खनपुर, फिरोजाबाद का रहने वाला रविकांत यादव स्नातक पास है। वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। पैसे के लालच में साॅल्वर बन गया। पुलिस की पूछताछ में पता चला कि उसने पिछले दिनों कुनाल एजूकेशनल काॅलेज में रामकुमार और राजकुमार के बदले परीक्षा दी थी। इसके अलावा भी कई परीक्षाओं में बैठ चुका है।
कांच, स्याही, टेप से बनता था नकली फिंगरप्रिंट
सॉल्वर गैंग का सदस्य कैलाश चंद नकली फिंगरप्रिंट तैयार करता था। इसके लिए कांच, स्याही, टेप का इस्तेमाल करता है। थाना सैंया के प्रभारी सुमनेश विकल ने बताया कि कैलाश चंद पूर्व में मुहर बनाने का काम करता था। बाद में वो कंंप्यूटर से मुहर बनाने लगा। इस दौरान ही उसने नकली फिंगरप्रिंट तैयार करने का तरीका सीखा।पुलिस की पूछताछ में पता चला कि कैलाश चंद फिंगरप्रिंट के लिए कांच और फोटो पेपर के साथ ही स्याही का इस्तेमाल करता है। फोटो बनाने वाले पेपर पर अभ्यर्थी का फिंगरप्रिंट स्याही के माध्यम से लेते हैं। उसे स्कैन करके विशेष पेपर पर प्रिंट निकाल लिया जाता है। इसे कांच की प्लेट पर रखते हैं। इसके बाद अंगूठा निशानी पर एक पारदर्शी टेप चिपका दिया जाता है।इसके बाद पेपर के बाॅर्डर को चारों तरफ से कवर कर दिया जाता है। इसमें एक लिक्विड भरा जाता है। इसके सूखने के बाद टेप को निकाल लिया जाता है। यह टेप ही फिंगरप्रिंट के रूप में काम आ जाता है। इस प्रक्रिया में 1-2 घंटे लगते हैं। इसे सॉल्वर परीक्षा केंद्र में प्रवेश और परीक्षा के लिए इस्तेमाल करता है। काॅलेज में भी कोई पकड़ नहीं पाता है।
कक्षा एक से तीसरी तक के बच्चे नए सत्र से पढ़ेंगे एनसीईआरटी की किताबें
मुरादाबाद:एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षिक सत्र में बेसिक स्कूलों के कक्षा एक से तीन तक के बच्चे भी अब एनसीईआरटी की किताबें पढ़ेंगे। हालांकि उच्चाधिकारी अभी शासनादेश का इंतजार कर रहे हैं लेकिन विभाग स्तर पर इसकी तैयारी हो गई है। किताबों के लिए एनसीईआरटी को वर्क आर्डर भी दिया जा चुका है।जानकार मान रहे हैं कि शुरुआती कक्षाओं से ही एनसीईआरटी की किताबें पढ़ने से बच्चों की नींव मजबूत होगी और वे भी भविष्य के कड़े प्रतिस्पर्धी माहौल के लिए तैयार हो सकेंगे।प्रदेश सरकार ने 2018 में परिषदीय विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) की किताबें लागू करने का फैसला लिया था। हालांकि फैसले के कुछ समय बाद ही सामने आए कोरोना के खौफ ने इस महत्वाकांक्षी योजना को सिरे नहीं चढ़ने दिया था।शासन ने इस दिशा में फिर से कदम बढ़ाया है। बीते दिनों लखनऊ में हुई विभागीय बैठक में इसे लेकर मंथन भी हो चुका है। अप्रैल से शुरू वाले सत्र से कक्षा एक से तीन तक की किताबों के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।एससीईआरटी इस बार कक्षा चार से आठवीं तक की किताबें ही उपलब्ध कराएगा। कक्षा तीन तक की किताबों का जिम्मा एनसीईआरटी को दिया गया है। इसके लिए एनसीईआरटी को वर्क आर्डर भी दे दिया गया है।बता दें कि मुरादाबाद जिले में कक्षा एक के 32848, दो के 30716 व तीन के 30977 बच्चे हैं। एनसीईआरटी की किताबें लागू होने से इन बच्चों को फायदा होगा कि क्योंकि आने वाले दो सालों में चौथी से आठवीं तक भी एनसीईआरटी की ही किताबें लागू होनी है। परिषदीय विद्यालयों में कक्षा नौवीं से 12वीं तक के लिए पहले से ही एनसीईआरटी की किताबें लागू हैं। कक्षा एक के लिए एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को लेकर डेढ़ वर्ष पहले ही मॉड्यूल बनाकर शिक्षकों की ट्रेनिंग भी कराई जा चुकी है।मुरादाबाद बीएसए बुद्धप्रिय सिंह ने कहा कि राज्यस्तरीय मीटिंग में कक्षा एक से तीन तक की किताबें एनसीईआरटी के माध्यम से प्राप्त होने की बात कही गई है। इसके अलावा कक्षा 4 से 8 तक की एसईआरटी की किताबों की आपूर्ति जनपदीय स्तर से होने लगी है।
अब ”अग्निवीर” भर्ती प्रक्रिया में पहले ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा देनी होगी
नई दिल्ली:सेना ने ‘अग्निवीर’ भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की घोषणा की है, जिसके तहत सेना में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवारों को अब पहले ऑनलाइन सामान्य प्रवेश परीक्षा (सीईई) देनी होगी। इसके बाद उम्मीदवारों को शारीरिक रूप से चुस्त दुरुस्त होने (फिजिकल फिटनेस) संबंधी परीक्षण और मेडिकल जांच से गुजरना होगा। सेना द्वारा विभिन्न समाचार पत्रों में प्रक्रिया में बदलाव के संबंध में विज्ञापन दिए गए हैं। हालांकि, सूत्रों ने शनिवार को बताया कि इस बाबत अधिसूचना फरवरी के मध्य तक जारी होने की उम्मीद है। सूत्र ने बताया कि भर्ती के लिए पहली ऑनलाइन परीक्षा अप्रैल में देश भर के लगभग 200 स्थानों पर आयोजित की जा सकती है और इसके लिए सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। सूत्र ने कहा कि इस बदलाव से भर्ती रैलियों के दौरान देखी जाने वाली भारी भीड़ में कमी आएगी और भर्ती का प्रबंधन तथा संचालन आसान हो सकेगा।उन्होंने कहा, ”अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया के लिए पहले उम्मीदवारों को शारीरिक रूप से चुस्त दुरुस्त होने संबंधी परीक्षण से गुजरना पड़ता था, उसके बाद मेडिकल जांच और सीईई के लिए उपस्थित होना अंतिम चरण था। लेकिन, अब ऑनलाइन परीक्षा पहला चरण है।” इंडियन आर्मी की ओर से 4 फरवरी को जारी सूचना के अनुसार, सेना में अग्निवीर भर्ती 2023 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया फरवरी के मध्य में शुरू हो सकती  है। अग्निवीर संयुक्त प्रवेश परीक्षा (CEE) में सफल अभ्यर्थियों को फिजिकल व मेडिकल के लिए बुलाया जाएगा।
यूपीपीएससी : एक हफ्ते में पीसीएस मेंस का रिजल्ट देने की तैयारी, 384 पदों पर होनी है भर्ती
प्रयागराज:उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) पीसीएस-2022 की मुख्य परीक्षा का परिणाम एक सप्ताह में जारी करने की तैयारी में है। आयोग की यह तैयारी भी है कि मार्च में इंटरव्यू कराकर 15 अप्रैल तक अंतिम चयन परिणाम घोषित कर दिया जाए। पीसीएस के 384 पदों पर भर्ती के लिए 602974 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे। प्रारंभिक परीक्षा में 5964 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया था। इनमें से मुख्य परीक्षा के लिए 5797 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए और 5203 अभ्यर्थी शामिल हुए हुए। आयोग के सूत्रों के अनुसार मुख्य परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन पूरा हो चुका है और रिजल्ट जारी करने की तैयारी है।मुख्य परीक्षा का परिणाम एक सप्ताह में जारी हो किया जा सकता है। आयोग की तैयारी है कि इस बार संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम से पहले पीसीएस का अंतिम चयन परिणाम जारी कर दिया जाए। ऐसे में आयोग को इंटरव्यू की प्रक्रिया मार्च में पूरी करानी होगी। अगर मार्च में इंटरव्यू पूरा हो जाता है तो अप्रैल के माध्य तक पीसीएस का अंतिम चयन परिणाम जारी कर दिया जाएगा।
पांच जिलों के 171 केंद्रों में होगी पीसीएस जे परीक्षा
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा सिविल जज (जूनियर डिवीजन) प्रारंभिक परीक्षा-2022 का आयोजन पांच जिलों के 171 केंद्रों पर किया जाएगा। प्रारंभिक परीक्षा 12 फरवरी को प्रस्तावित है। परीक्षा के लिए कुल 19561 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं। पीसीएस जे के 303 पदाें पर भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा दो सत्रों में सुबह 9.30 से 11.30 बजे और अपराह्न 2.30 से 4.30 बजे तक आयोजित की जाएगी। परीक्षा प्रयागराज, आगरा, कानपुर, गोरखपुर एवं मेरठ में होगी। परीक्षा के लिए प्रयागराज के 33 केंद्रों में 15353 अभ्यर्थी, आगरा के 51 केंद्रों में 23973 अभ्यर्थी, कानपुर के 27 केंद्रों में 12598 अभ्यर्थी, गोरखुपर के 28 केंद्रों में 13005 अभ्यर्थी और मेरठ के 32 केंद्रों में 14632 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं।
प्राविधिक और चिकित्सा शिक्षा में 12 पदों पर होगी भर्ती
प्राविधिक शिक्षा विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग में 12 पदों पर भर्ती की जाएगी। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने इन पदों पर भर्ती के लिए संभावित साक्षात्कार की सूचना जारी कर दी है। इंटरव्यू फरवरी के मध्य तक प्रस्तावित है। इंटरव्यू की तिथि जल्द ही घोषित की जाएगी। प्राविधिक शिक्षा विभाग में कर्मशाला अनुदेशक के छह पदों और चिकित्सा शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पैथोलॉजी के छह
इलाहाबाद विवि : इस साल संघटक कॉलेजों को मिलेंगे 200 से अधिक शिक्षक, चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में
प्रयागराज।इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के छह संघटक महाविद्यालयों को इस साल 200 से अधिक नए शिक्षक मिल जाएंगे। इन कॉलेजों में शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। नया सत्र शुरू होने तक इन सभी कॉलेजों में शिक्षक भर्ती के लिए इंटरव्यू करा लिए जाएंगे। सबसे अधिक 132 पदों पर इलाहाबाद डिग्री कॉलेज में भर्ती होनी है। यह भर्ती 24 विषयों में होगी। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अतुल कुमार सिंह ने बताया कि हार्डकॉपी में आए आवेदनों की छंटनी चल रही है। आवेदनों में काफी कमियां है। इनकी छंटनी करने के बाद स्क्रीनिंग की प्रक्रिया शुरू होगी।आवेदनों की स्क्रीनिंग में कम से कम दो माह का वक्त लगेगा। इसके बाद इंटरव्यू आयोजित किए जाएंगे। वहीं, सीएमपी डिग्री कॉलेज में 15 विषयों में शिक्षकों के पदों पर भर्ती होनी है। आवेदनों की स्क्रीनिंग चल रही है। इंटरव्यू मार्च में कराए जाने की तैयारी है। इसके अलावा ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज, राजर्षि टंडन गर्ल्स डिग्री कॉलेज, एसएस खन्ना गर्ल्स डिग्री कॉलेज और श्यामा प्रसाद मुखर्जी राजकीय महाविद्यालय में भी शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी हाे चुकी है।श्यामा प्रसाद मुखर्जी राजकीय महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पांच पदों के लिए भर्ती होनी है। इसमें जंतु विज्ञान, रसायन विज्ञान, संस्कृत, वनस्पति विज्ञान एवं प्राचीन इतिहास विभाग में एक असिस्टेंट प्रोफेसर के एक-एक शामिल हैं। इन पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो चकी है। वहीं, एसएस खन्ना गर्ल्स डिग्री कॉलेज में सात विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के नौ पदों पर भर्ती होगी। वहां, समाजशास्त्र, अंग्रेजी, शिक्षा शास्त्र, हिंदी, संगीत (वादन), दर्शनशास्त्र एवं जंतु विज्ञान विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती होगी। राजर्षि टंडन गर्ल्स डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के 12 पदों पर भर्ती होगी। ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज में छह विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के छह पदों पर भर्ती होनी है। ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज में स्क्रीनिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट में पांच नए जजों की नियुक्ति को मिली मंजूरी
नई दिल्ली, एजेंसी। देश के शीर्ष अदालत को शनिवार को पांच नए जज मिल गए हैं। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की ओर से भेजे गए नामों को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। ये नाम पिछले वर्ष 13 दिसंबर को भेजे गए थे।कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किए गए पांच नामों की जानकारी ट्वीट के जरिये दी। ये नवनियुक्त जज अगले सप्ताह की शुरुआत में पद की शपथ लेंगे। इसके बाद शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या 32 हो जाएगी।फिलहाल शीर्ष अदालत में भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित 27 न्यायमूर्ति कार्यरत हैं, जबकि सीजेआई सहित इसकी स्वीकृत संख्या 34 है। ये नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ द्वारा कोलेजियम की सिफारिशों के बावजूद जज की नियुक्ति और स्थानांतरण में सरकार की ओर से देरी पर कड़ी टिप्पणियों के अगले दिन की गई हैं।
इन नामों पर मुहर
राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्तल, पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल, मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पीवी संजय कुमार, पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश मनोज मिश्रा।
शॉर्टकट शब्दों के चक्कर में पिछड़ रहे सीबीएसई के बच्चे
रिंकू झा सीबीएसई के 50 प्रतिशत परीक्षार्थी उत्तर लिखने में संक्षिप्त (शॉर्ट) शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें कई ऐसे शब्द होते हैं, जिन्हें परीक्षक भी नहीं समझ पा रहे। दसवीं और 12वीं की परीक्षा देनेवाले विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिका की जांच में यह निष्कर्ष निकला है।स्कूल नोटबुक और वार्षिक परीक्षा के अलावा छात्र बोर्ड परीक्षा में भी संक्षिप्त शब्द यानी एसएमएस और वाट्सऐप वाले शब्दों का इस्तेमाल उत्तर में कर रहे हैं। इस कारण परीक्षा उनके अंक कट रहे हैं। बोर्ड ने 2018, 2019 और 2022 में इससे संबंधित सर्वे कराया था। इसकी रिपोर्ट बोर्ड ने हाल ही में स्कूलों को भेजा है।सर्वे में बिहार के सभी जिलों के स्कूलों को शामिल किया गया। इसमें 30 से 35 हजार बच्चों की उत्तर पुस्तिका में उत्तर शॉर्ट शब्द या एसएमएस वाले शब्दों में लिखे मिले थे। सीबीएसई की मानें तो प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने वाले और मोबाइल का इस्तेमाल करनेवाले छात्र अधिक गलती कर रहे हैं इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी करने वाले छात्र उत्तरपुस्तिका में शॉर्ट शब्दों का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।
इन संक्षिप्त शब्दों का छात्र खूब कर रहे इस्तेमाल
you को U लिखते हैं, why को Y, am को M, Thanks को thx लिख रहे हैं। वहीं बिकॉज को बीसी , बाइ दी वे-बीटीडब्ल्यू, डायरेक्ट मैसेज-डीएम, आई डोंट नो-आईडीके, इन माई ओपिनियन -आईएमओ, इन रियल लाइफ-आईआरएल, जस्ट किडिंग-जेके, लेट मी नो-एलएमके, नो बिग आइडिया-एनबीओ, प्रोब्लम-पीआरओबी लिखकर काम चलाते हैं।
बोर्ड ने ये सुझाव दिए
● जितने शब्दों में उत्तर लिखने को कहा जाए, उतने शब्दों में उत्तर लिखें
● प्रश्न के हर स्टेप का छात्र उत्तर देते वक्त ख्याल रखें
● 40 शब्दों का उत्तर 40 शब्दों में ही दें, एक शब्द में नहीं
● स्कूल प्रशासन समय-समय पर ले लिखित परीक्षा
आयुष कॉलेजों के लिए यूजी की काउंसलिंग कल
लखनऊ। प्रदेश में आयुष विभाग के तहत आने वाले आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों में स्नातक कक्षाओं में प्रवेश के लिए काउंसलिंग का दूसरा दौर छह फरवरी से शुरू होगा। बीएएमएस, बीएचएमएस और बीयूएमएस के लिए होने वाले काउंसलिंग के दूसरे चक्र के लिए पहले ऑनलाइन पंजीकरण किए जाएंगे। जबकि 13 व 14 फरवरी को नोडल सेंटर पर मूल प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी।
शुआट्स पर एक और मुकदमे की तैयारी,संस्थान पर अल्पसंख्यक का दर्जा मिले बिना ही लाभ लेने का आरोप, एसटीएफ ने शुरू की जांच
प्रयागराज। शुआट्स के कुलपति समेत अन्य पदाधिकारियों पर धर्मांतरण और शिक्षकों की नियुक्ति में धांधली करने के अलावा भी कई संगीन आरोप लगे हैं। शुआट्स पर अल्पसंख्यक की मान्यता लिए बिना उसका अनुचित लाभ लेने का आरोप लगा है। एसटीएफ जांच कर रही है। आरोप सही पाए गए तो एक और मुकदमा दर्ज किया जाएगा।शिकायत करने वाले ने आरोप लगाया है कि 1980 में इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट था। इस कॉलेज को उत्तर प्रदेश सरकार से अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त था। कुछ सालों बाद वर्ष 2000 में एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट को यूजीसी से डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल गया। इसके बाद भी अल्पसंख्यक का दर्जा बरकरार रहा। 2004 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक आयोग यानी एनसीएमआई से अल्पसंख्यक संस्थान के लिए प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य किया गया। आरोप है कि इसी कॉलेज से पढ़ाई किये एक अफसर से 2005 में एक लेटर जारी कराया गया। इसी आधार पर अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा प्राप्त बताया गया। इसी को साक्ष्य बताकर कोर्ट में भी अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा साबित करने की कोशिश की गई। यह भी आरोप है कि 2016 में उत्तर प्रदेश सरकार ने आर्टिकल 30-एक के तहत स्टेट यूनिवर्सिटी घोषित कराया गया। इस आधार पर भी वह अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान नहीं है। शुआट्स के अफसरों ने मिलीभगत करके अल्पसंख्यक संस्थान के नाम पर लाभ लिया गया। एसटीएफ इस प्रकरण की जांच कर रही है कि शुआट्स को बाद में अल्पसंख्यक का दर्जा विधिक रूप से मिला था या नहीं।
फरार शिक्षक के घर की कुर्की का आदेश
फतेहपुर। सामूहिक धर्मांतरण के मामले में पुलिस फरार कानपुर के शिक्षक के घर की जल्द कुर्की करेगी। सीजेएम कोर्ट ने शनिवार को कुर्की का आदेश जारी कर दिया है।14 अप्रैल को हरिहरगंज के इवेजलिकल चर्च में सामूहिक धर्मांतरण मामले में सरकारी स्कूल के शिक्षक आशीष इमैनुअल का नाम प्रकाश में आया था। कानपुर के अर्मापुर स्टेट निवासी शिक्षक शहर के आबूनगर में रहता था। पुलिस ने शिक्षक को नोटिस जारी किया था। हाजिर न होने पर विवेचक ने एक फरवरी को कुर्की के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। शनिवार को कोर्ट ने कुर्की का आदेश जारी कर दिया।
43 की तलाश
सामूहिक धर्मांतरण के मामले में 34 नामजद के अलावा पुलिस की जांच में 26 अन्य आरोपितों के नाम प्रकाश में आए हैं। पुलिस विजय मसीह समेत 14 आरोपितों को गिरफ्तार कर अब तक जेल भी भेज चुकी है। अंजू रानी, भानू प्रताप व मुकुल कोर्ट में हाजिर हो चुके हैं। कुलपति आरबी लाल समेत 43 आरोपितों को पुलिस तलाश रही है।
भ्रष्टाचार के साक्ष्य मिलते ही बढ़ जाएंगी धाराएं
शुआट्स में 1984 से 2017 के मध्य कुल 69 प्रोफेसर असिस्टेंट प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर हुई नियुक्ति को लेकर भी हंगामा मचा है। पुलिस ने अपने एफआईआर में भ्रष्टाचार की धाराएं भी लिखी हैं लेकिन अभी तक पकड़े गए आरोपियों पर इस धारा में कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस जांच में लगी है कि किस तरह से 69 शिक्षकों की नियुक्ति हुई। इनके खिलाफ आरोप लगा है कि शुआट्स में पदों का सृजन करने के लिए एक टीम लगी थी। दूसरी टीम कंडीडेट तय करती थी। इसका विज्ञापन भी ऐसे जारी कराया गया जिससे किसी को पता न चले। फिर एक ही परिवार के लोगों की नौकरियां लगा दी गईं।
परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर रिपोर्ट दें
प्रयागराज। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 16 फरवरी से प्रस्तावित हैं। इसी को लेकर शनिवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशक और यूपी बोर्ड के सभापति महेंद्र देव ने गूगल मीट की। यूपी बोर्ड के सचिव दिब्यकांत शुक्ल को निर्देश दिया कि बोर्ड परीक्षा के संबंध में केंद्रों पर सभी आवश्यवक सुविधाएं एवं व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली जाए। इसके साथ ही अधिकारियों को भेज कर केंद्रों का निरीक्षण कराएं और तीन दिन में इसकी रिपोर्ट भेजें।
एपीएस भर्ती में आयु छूट की मांग उठाई
प्रयागराज। अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती-2013 में शामिल हुए और अंतिम चयन परिणाम के इंतजार में ओवरएज हो चुके अभ्यर्थियों ने शनिवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में ज्ञापन देकर अधिकतम आयु सीमा में छूट दिए जाने की मांग की। उमेश चंद्र पांडेय, अजय शुक्ला, ब्रह्म पांडेय, राजेश सिंह आदि ने मांग की है कि नई भर्ती में आयु की गणना जनवरी/जुलाई 2018 से की जाए।
12 पदों पर भर्ती के इंटरव्यू इसी माह
प्रयागराज। लोक सेवा आयोग प्राविधिक शिक्षा विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग में 12 पदों पर भर्ती करेगा। इसके लिए संभावित साक्षात्कार की सूचना जारी कर दी है। इंटरव्यू फरवरी के मध्य तक प्रस्तावित है। इसकी तिथि जल्द ही घोषित होगी। प्राविधिक शिक्षा में कर्मशाला अनुदेशक के छह पदों और चिकित्सा शिक्षा विभाग में असि. प्रोफेसर के छह पदों पर भर्ती होनी है।
एकेटीयू के कुलपति पीके मिश्रा हटाए गए
लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार मिश्रा को राजभवन ने तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उन्हें शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय को एकेटीयू का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।एकेटीयू कुलपति प्रो. पीके मिश्रा ने एक फरवरी को यूजीसी तथा प्रधानमंत्री कार्यालय की एक शिकायत के आधार पर जांच कमेटी गठित कर दी थी। यह शिकायत प्रो. विनय पाठक के एकेटीयू में कुलपति रहने के दौरान हुए कार्यों की थी। जांच कमेटी का अध्यक्ष हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कुमार श्रीवास्तव को बनाया गया था।
जांच कमेटी ने अपना काम शुरू भी नहीं किया उससे पहले एकेटीयू कुलपति प्रो. पीके मिश्रा को राजभवन ने पद से हटा दिया गया।
पूर्व परीक्षा नियंत्रक ने लगाए थे आरोप
एकेटीयू के परीक्षा नियंत्रक रहे अनुराग त्रिपाठी ने राजभवन को भेजी शिकायत में आरोप लगाया था कि बिना टेंडकर कराए ही विश्वविद्यालय में नई परीक्षा एजेंसी (फर्म) को कार्य आवंटित कर दिया गया। यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले एक साल से जिस एजेन्सी से कार्य कराया जा रहा था, उसका भुगतान नहीं हुआ।
न्४विश्वविद्यालय द्वारा नहीं किया गया। जिसके कारण संबंधित एजेन्सी (फर्म) ने 17 नवंबर 2022 से कार्य बन्द कर दिया। इससे रिजल्ट अपडेशन, मार्कशीट प्रिंटिंग व परीक्षा के फार्म को भरे जाने में छात्रों को असुविधा का सामना करना पडा।
पुरानी कर व्यवस्था खत्म करने की समयसीमा नहीं
एक सवाल के जवाब में सीतारमण ने कहा कि पुरानी कर व्यवस्था को खत्म करने के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई है। सरकार ने केवल एक नई कर व्यवस्था पेश की है, जो सरल है। वहीं, अधिकारियों ने भी अर्थव्यवस्था में बचत पर असर पड़ने से इनकार किया। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि लोगों को यह तय करने के लिए विकल्प दिए जा रहे हैं कि वे अपने धन का क्या करना चाहते हैं।

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