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शिक्षकों की मौत पर यूपी में विवाद

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शिक्षकों की मौत पर यूपी में विवाद:BSA ने पत्र जारी कर शिक्षकों की मौत पर शोक जताया, मुआवजा देने की बारी आई तो बोले- किसी की जान नहीं गई; प्रियंका गांधी, अदिति सिंह ने उठाया मुद्दा

रायबरेली में चुनावी ड्यूटी में शामिल रहे शिक्षकों की मौत को लेकर विवाद शुरू हो गया है। एक हफ्ते पहले बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने 26 शिक्षकों की सूची जारी कर शोक जताया था। जब इस मामले में शासन ने आधिकारिक तौर पर मृतक शिक्षकों की सूची मांगी तो बीएसए अपने पुराने बयान से पलट गए। कहा कि चुनाव में ड्यूटी करने वाले किसी शिक्षक की मौत कोरोना से नहीं हुई है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और रायबरेली की विधायक अदिति सिंह ने इसका मुद्दा उठाया है। अदिति सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर 58 शिक्षकों की सूची सौंपी है। इन शिक्षकों की मौत चुनावी ड्यूटी के बाद हुई है। विधायक ने सभी को मुआवजा देने की मांग की है।

डीएम ने भी कहा- किसी की मौत कोरोना से नहीं हुई
विधायक अदिति सिंह के पत्र का जवाब देते हुए डीएम वैभव श्रीवास्तव ने बीएसए की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए कहा है कि जिन शिक्षकों की सूची विधायक ने जारी की है उनकी मौत कोरोना से नहीं हुई है। अब बीएसए का वह पत्र भी वायरल हो रहा है जो 28 अप्रैल को उन्होंने शिक्षकों के नाम, ब्लाक और तैनाती स्कूल का जिक्र करते हुए यह लिखा था कि इन लोगों की मौत महामारी के चलते हो गई। इस पर बेसिक शिक्षा विभाग शोक व्यक्त करता है।

प्रियंका ने लिखा, 1621 शिक्षकों का सम्मान छीन रही यूपी सरकार
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। कहा है, ‘पंचायत चुनाव में ड्यूटी करते हुए 1621 शिक्षकों की प्रदेश में मौत हुई है। सबकी लिस्ट भी शिक्षक संघ द्वारा जारी की गई है, लेकिन संवेदनहीन यूपी सरकार झूठ कहकर मृत शिक्षकों की संख्या मात्र 3 बता रही है। शिक्षकों को जीते जी उचित सुरक्षा उपकरण और इलाज नहीं मिला और अब मृत्यु के बाद सरकार उनका सम्मान भी छीन रही है।’

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15 लाख से ज्यादा कर्मचारी सरकार से संवाद करने को तैयार
उप्र प्रदेश माध्यिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय महामंत्री आरके मिश्रा का दावा है कि बेसिक और माध्यमिक को मिलाकर 21 सौ शिक्षक ड्यूटी की वजह से संक्रमित होकर अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी के अनुसार, ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने से एक हजार कर्मचारियों की जान गई है। दोनों को जोड़ देने के बाद आंकड़ा 3100 तक पहुंच रहा है।

हरि किशोर तिवारी ने कहा कि सरकार ने आधिकारिक तौर पर पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान महज तीन शिक्षकों को कोरोना के कारण मृत पाया है। इस प्रकार के आंकड़े देने वाले अधिकारी कर्मचारी और शिक्षक समाज के लिए संवेदनशील नहीं माने जा सकते हैं। ऐसा लगता है कि सरकार मृतकों को किए गए आदेशों का भी लाभ नहीं देना चाहती है। उन्होंने इस मामले पर प्रदेश के 15 लाख से ज्यादा कर्मचारी सरकार से सीधे संवाद करने को तैयार हैं। उन्होंने सरकार को सरकार और शासन के आला अधिकारियों से दो टूक भाषा में लड़ने का ऐलान किया है।

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