
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक संन्यासी के जीवन का ध्येय धन के लिए धर्म का त्याग करना नहीं, बल्कि देश और धर्म की रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि युद्ध छिड़ जाए तो बम-गोले दागने से भी पीछे नहीं हटना चाहिए। देश और धर्म के लिए किया गया प्रत्येक त्याग महान होता है। इसी भावना के साथ प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिए और अपने जीवन को महान उद्देश्यों के लिए समर्पित करना चाहिए।
मुख्यमंत्री बुधवार को वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने संघ की राष्ट्रवादी विचारधारा, सेवा परंपरा और सामाजिक योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ ने अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों तथा सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। संस्था ने राष्ट्रवाद को अपने जीवन का ध्येय बनाया और राष्ट्र की उन्नति को ही आत्मोन्नति का माध्यम माना।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ की स्थापना के पीछे राष्ट्रसेवा, आध्यात्मिक चेतना और समाज के प्रति समर्पण की भावना रही है। संस्था ने अपनी कार्यशैली के माध्यम से यह संदेश दिया है कि व्यक्तिगत विकास तभी सार्थक है, जब उसका उद्देश्य समाज और राष्ट्र की उन्नति से जुड़ा हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना व्यक्ति को बड़े लक्ष्यों के लिए प्रेरित करती है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का मार्ग प्रशस्त करती है।
मुख्यमंत्री ने भारत सेवाश्रम संघ की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि ठीक 100 वर्ष पहले, वर्ष 1926 में, काशी में महान राष्ट्रवादी साधक स्वामी प्रणवानंद जी महाराज ने संघ की काशी शाखा का शुभारंभ किया था। उस समय भारत अंग्रेजों की गुलामी में था और देश को स्वतंत्र कराने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे थे। स्वामी प्रणवानंद जी महाराज ने देश के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर स्वतंत्रता की चेतना जगाने के साथ हिंदू जागरण के कार्य को भी आगे बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि स्वामी प्रणवानंद जी महाराज ने भारत को एक महान और स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ अपना जीवन समर्पित किया। उनके विचारों और कार्यों ने राष्ट्रवादी चेतना को मजबूत करने में योगदान दिया। भारत सेवाश्रम संघ ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सेवा, सामाजिक जागरूकता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की दिशा में काम किया है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ की विशेषता यह है कि उसने बदलती परिस्थितियों के बावजूद अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता और सेवा भावना को बनाए रखा। संस्था ने राष्ट्रवाद को केवल विचार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अपने कार्यों का आधार बनाया। उनके अनुसार, राष्ट्र की उन्नति और समाज का कल्याण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब व्यक्ति अपने कर्तव्यों को राष्ट्रहित से जोड़कर देखता है, तभी व्यापक स्तर पर सामाजिक और राष्ट्रीय विकास संभव होता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज भारत सेवाश्रम संघ की उपस्थिति केवल देश तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के अनेक देशों में संस्था भारतीय सनातन मूल्यों और ऋषि परंपरा का संदेश पहुंचा रही है। विदेशों में भी संस्था के कार्यों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विचारों और सेवा की परंपरा को पहचान मिल रही है।
शताब्दी समारोह के अवसर पर मुख्यमंत्री ने संघ की सौ वर्षों की यात्रा को राष्ट्रसेवा और वैचारिक प्रतिबद्धता की महत्वपूर्ण परंपरा के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि देश और धर्म के प्रति समर्पण, सेवा भाव तथा राष्ट्र की उन्नति का संकल्प समाज को दिशा देने वाले महत्वपूर्ण मूल्य हैं। भारत सेवाश्रम संघ की यात्रा इन मूल्यों को आगे बढ़ाने का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
समारोह में मुख्यमंत्री का संबोधन राष्ट्रवाद, आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रहित में समर्पण के संदेश पर केंद्रित रहा। उन्होंने संघ की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए उसके सेवा कार्यों और राष्ट्रवादी विचारधारा की सराहना की।







