
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद निर्वाचन कार्यालय ने सफाई दी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा है कि इस मामले में लगाए जा रहे गंभीर आरोप भ्रामक और निराधार हैं। हालांकि, फॉर्म-7 जारी करने की प्रक्रिया और मतदाताओं के नाम हटाने से जुड़े आंकड़ों को लेकर कई सवाल अब भी सामने आ रहे हैं।
मामले में सबसे अधिक चर्चा 85,854 फॉर्म-7 को लेकर हो रही है। निर्वाचन कार्यालय के बयान के अनुसार, सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्वतः फॉर्म-7 तैयार किए जाने की व्यवस्था थी। इस जानकारी के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाने से जुड़े फॉर्म किस आधार पर तैयार किए गए और उनमें आवश्यक जानकारी किस तरह दर्ज की गई।
87 हजार से अधिक अनुरोधों पर सवाल
मामले में दावा किया गया कि अधिकारियों से जुड़े कुल 87,127 विलोपन अनुरोधों में से 85,854 आवेदनों में मतदाताओं के नाम हटाने का स्पष्ट कारण दर्ज नहीं था। यदि इन आवेदनों में कारणों का उल्लेख नहीं किया गया था, तो यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अनुरोधों की जांच किस आधार पर की गई।
मतदाता सूची में नाम शामिल करना और नाम हटाना एक संवेदनशील प्रक्रिया है। इसका सीधा संबंध नागरिकों के मतदान के अधिकार से होता है। ऐसे में प्रत्येक आवेदन में सही जानकारी और निर्धारित नियमों का पालन होना जरूरी है। इसी वजह से इन आंकड़ों को लेकर निर्वाचन अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
डिजिटल हस्ताक्षर और समयसीमा भी चर्चा में
इस विवाद में फॉर्म-7 पर अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर होने का मुद्दा भी सामने आया है। इसके अलावा, निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद 1.10 लाख से अधिक विलोपन अनुरोध स्वीकार किए जाने का दावा किया गया है। इन दावों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
हालांकि, इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित अनुरोध कब प्राप्त हुए, उन्हें कब स्वीकार किया गया और क्या उन्हें निर्धारित नियमों के तहत मंजूरी दी गई थी। डिजिटल हस्ताक्षर और सॉफ्टवेयर से फॉर्म तैयार होने की प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलने से विवाद से जुड़े तथ्यों को समझने में मदद मिल सकती है।
निर्वाचन कार्यालय ने क्या कहा?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इस मामले में निर्वाचन कार्यालय का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई गई। कार्यालय की ओर से बताया गया कि अपात्र पाए गए मतदाताओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सॉफ्टवेयर के जरिए फॉर्म-7 तैयार किए गए थे।
निर्वाचन कार्यालय ने आरोपों को भ्रामक बताया है। हालांकि, केवल बयान जारी होने से विवाद से जुड़े सभी सवालों का जवाब मिलना जरूरी नहीं है। इस मामले में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि फॉर्म-7 किन परिस्थितियों में तैयार किए गए और संबंधित मतदाताओं की पात्रता की जांच किस प्रकार की गई।







