
NEET पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान दिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि शांतिपूर्ण विरोध करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार अपने वादे पर कायम है और प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
केंद्र का यह बयान कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के विरोध प्रदर्शन के बाद आया है। NEET पेपर लीक मामले और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबा आंदोलन किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी गई थीं, जिनमें से एक मांग यह भी थी कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई न की जाए।
सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में भरोसा दिया गया कि छात्रों पर सिर्फ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। हालांकि केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान गंभीर अपराधों में शामिल लोगों को राहत नहीं दी जाएगी।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि प्रदर्शन के दौरान गंभीर मामलों में दर्ज करीब 2700 से ज्यादा FIR वापस नहीं ली जाएंगी। सरकार का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने वाले छात्रों और कानून तोड़ने वालों के बीच अंतर किया जाएगा।
प्रीम कोर्ट ने सोमवार को 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया।
सुनवाई के दौरान वकील वृंदा ग्रोवर ने अदालत से पूछा कि क्या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस ली जाएंगी या उन्हें रद्द किया जाएगा। इस पर केंद्र सरकार ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित कदम उठाए जाएंगे और सरकार अपने आश्वासन पर कायम है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर किसी पुलिस अधिकारी ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया है तो उसे बचाया नहीं जाना चाहिए। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शन की आड़ में किसी गंभीर अपराध में शामिल व्यक्ति को संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
SIT जांच की संभावना
सुप्रीम कोर्ट अब इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम यानी SIT के गठन पर विचार कर रहा है। कोर्ट यह जांच कराना चाहता है कि प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई सही थी या नहीं।
इसके अलावा अदालत यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि पुलिस पर हमला करने वाले वास्तव में छात्र थे या फिर प्रदर्शनकारियों की भीड़ में शामिल कुछ बाहरी लोग थे।
कोर्ट के सामने दो बड़े सवाल हैं—
पहला- क्या पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया?
दूसरा- क्या प्रदर्शन की आड़ में किसी बाहरी या आपराधिक तत्व ने हिंसा की?
36 दिन चला था आंदोलन
NEET पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ CJP का विरोध प्रदर्शन करीब 36 दिनों तक चला था। प्रदर्शनकारियों की मांगों में परीक्षा व्यवस्था में सुधार, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और आंदोलनकारियों पर पुलिस कार्रवाई नहीं करने की मांग शामिल थी।
25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने अपना प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान किया था।
पहले भी कोर्ट ने दिए थे निर्देश
इससे पहले 28 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई भी कठोर कार्रवाई करने से रोक दिया था। अदालत ने कहा था कि 18 साल से कम उम्र के उन लोगों को राहत दी जाए जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र, बिहार, असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
इसके साथ ही कोर्ट ने उन राज्यों को प्रदर्शन से जुड़े सभी डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे। इनमें CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज, वायरलेस रिकॉर्ड और PCR लॉग जैसी जानकारियां शामिल हैं।
अब 18 अगस्त को अगली सुनवाई
NEET प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े इस मामले में अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सुप्रीम कोर्ट SIT गठन को लेकर क्या फैसला देता है और प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
फिलहाल केंद्र सरकार के आश्वासन से प्रदर्शनकारी छात्रों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन गंभीर अपराधों में शामिल लोगों पर कार्रवाई जारी रहने के संकेत भी साफ हैं।







