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लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) एन. एस. राजा सुब्रमणि होंगे नए CDS, रक्षा मंत्रालय में बड़ी जिम्मेदारी

लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) एन. एस. राजा सुब्रमणि
लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) एन. एस. राजा सुब्रमणि
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Written by
Rishabh Rai

भारत सरकार ने देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) एन. एस. राजा सुब्रमणि की नियुक्ति की घोषणा की है। वे वर्तमान CDS जनरल अनिल चौहान के 30 मई 2026 को कार्यकाल पूरा होने के बाद यह जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके साथ ही उन्हें डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स (DMA) के सचिव का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा जाएगा, जो कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगा।

सरकारी जानकारी के अनुसार, एन. एस. राजा सुब्रमणि भारतीय सेना के अत्यंत अनुभवी अधिकारियों में से एक हैं। वे इस समय राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) में मिलिट्री एडवाइजर के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले उन्होंने जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक भारतीय सेना के वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (VCOAS) के रूप में जिम्मेदारी निभाई थी। इसके अलावा मार्च 2023 से जून 2024 तक वे सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रह चुके हैं।

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लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) सुब्रमणि का सैन्य करियर करीब 39 वर्षों का रहा है। उन्होंने दिसंबर 1985 में गढ़वाल राइफल्स में कमीशन प्राप्त किया था और देश की उत्तरी एवं पश्चिमी सीमाओं पर कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल जिम्मेदारियां संभालीं। अपनी सेवा के दौरान उन्होंने रणनीतिक योजना और फील्ड कमांड में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे भारतीय सेना की परिचालन क्षमता को मजबूती मिली।

शैक्षणिक दृष्टि से भी उनका प्रोफाइल अत्यंत मजबूत रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खड़कवासला और भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने किंग्स कॉलेज, लंदन से मास्टर ऑफ आर्ट्स और मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एम.फिल. की डिग्री हासिल की।

अपने सेवाकाल में उन्हें कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM), सेना मेडल (SM) और विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) शामिल हैं।

उनकी नियुक्ति को रक्षा क्षेत्र में अनुभव और निरंतरता बनाए रखने के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में भारत की त्रि-सेवाओं के बीच समन्वय और मजबूत होगा तथा रक्षा आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को और गति मिलेगी।

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