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लोकसभा में बिल गिरा: सियासत गरम, महिला आरक्षण और परिसीमन पर टकराव तेज

प्रियंका गांधी
प्रियंका गांधी
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Written by
Rishabh Rai

नई दिल्ली। लोकसभा में सीट बढ़ाने और उससे जुड़े प्रावधानों को लेकर लाया गया बिल गिरने के बाद सियासी माहौल गर्म हो गया है। प्रियंका गांधी ने इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत बताते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, जबकि किरेन रिजिजू ने इसे महिलाओं के हितों के खिलाफ बताया।

प्रियंका गांधी ने शनिवार को कहा कि लोकसभा में जो हुआ वह लोकतंत्र के लिए सकारात्मक है। उनके मुताबिक, सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण के जरिए सत्ता में बने रहने की “साजिश” कर रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस बात से खुश हैं कि सीटें बढ़ाने वाला बिल पास नहीं हो सका।

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उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता पक्ष विपक्ष को महिला विरोधी बताकर खुद को महिलाओं का मसीहा साबित नहीं कर सकता। प्रियंका गांधी के अनुसार, यह पूरा प्रयास महिलाओं के हित में नहीं बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए किया गया था।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने चार प्रमुख बातें रखीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण ने उन्हें चौंका दिया, क्योंकि उसमें बार-बार यह संकेत दिया गया कि असहमति रखने वालों की जगह सदन में नहीं है। उन्होंने संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्ताव को “साजिश” करार देते हुए कहा कि परिसीमन 2029 तक संभव नहीं है, फिर भी इसे महिलाओं के नाम पर पेश किया गया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने सोचा था कि अगर बिल पास हो गया तो वह जीत दर्ज करेगी, और अगर नहीं हुआ तो विपक्ष को महिला विरोधी बताकर राजनीतिक लाभ लेगी। प्रियंका गांधी ने विपक्ष के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि यह महिलाओं के लिए नहीं बल्कि परिसीमन को साधने की रणनीति थी।

वहीं दूसरी ओर, किरेन रिजिजू ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सिर्फ किसी एक पार्टी की असफलता नहीं, बल्कि देश की महिलाओं के लिए नुकसान है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को शासन में अधिक भागीदारी देने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम पास नहीं हो सका, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मुद्दे पर उसका रुख महिलाओं के हितों के खिलाफ है और इससे पार्टी की छवि पर “काला धब्बा” लगा है।

लोकसभा में बिल गिरने के बाद यह मुद्दा अब पूरी तरह राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है, जहां एक ओर सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष इसे सत्ता बनाए रखने की रणनीति बता रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के संकेत हैं।

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