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महिला आरक्षण विधेयक पर संसद में तीखी बहस, विपक्ष ने उठाए सवाल, सरकार ने दिया जवाब

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Written by
Rishabh Rai

नई दिल्ली। संसद में आज महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन विधेयकों को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। सरकार की ओर से तीन संशोधन विधेयक पेश किए गए, जिन पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्ष ने जहां इसे लेकर कई संवैधानिक और सामाजिक सवाल उठाए, वहीं सरकार ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

विधेयकों के पेश होते ही कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सरकार संविधान की मूल भावना को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है। इसके बाद समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि जब तक मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण के दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया जाता, तब तक इस कानून का उद्देश्य अधूरा है।

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इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के विरुद्ध है और ऐसा कोई प्रावधान स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी वर्गों की महिलाओं को समान अवसर देना है, न कि धर्म आधारित विभाजन करना।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि पूरा देश महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन करता है, लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या व्यवस्था है। उन्होंने सरकार से पारदर्शिता की मांग की।

इस पर अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि समाजवादी पार्टी को मुस्लिम महिलाओं के प्रतिनिधित्व की इतनी चिंता है तो वह अपनी टिकटें उन्हें दे सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव नहीं कर रही है और सभी निर्णय संवैधानिक ढांचे के भीतर ही लिए जा रहे हैं।

विधेयक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव लोकसभा सांसदों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 करने का है। इसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटों का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की बात भी शामिल है। सीटों के अंतिम निर्धारण के लिए परिसीमन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

सदन में विधेयक को ध्वनि मत से पारित कराने की कोशिश की गई, लेकिन विपक्ष ने मत विभाजन की मांग की। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने मतदान की अनुमति दी। मतदान में पक्ष में 251 और विपक्ष में 185 वोट पड़े, जिसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी।

AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे संघीय ढांचे पर भी प्रभाव पड़ सकता है। वहीं डीएमके सांसद टी. आर. बालू ने इसे “सैंडविच बिल” बताते हुए कहा कि ये तीनों विधेयक आपस में जुड़े हुए हैं और उनकी पार्टी इसका विरोध करती है। उन्होंने सदन में विरोध स्वरूप काले झंडे भी दिखाए।

इस पर स्पीकर ओम बिरला ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही पर ऐसे प्रदर्शनों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, चाहे झंडे किसी भी रंग के हों। वहीं विपक्ष ने जनगणना और जातिगत आंकड़ों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को टाल रही है और जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। इस पर अमित शाह ने कहा कि जनगणना की प्रक्रिया जारी है और भविष्य में जातिगत गणना भी इसी का हिस्सा होगी।

कुल मिलाकर, महिला आरक्षण विधेयक पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच व्यापक राजनीतिक और वैचारिक मतभेद देखने को मिले। जहां सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे संवैधानिक और सामाजिक संतुलन से जुड़ा मुद्दा मानते हुए कई सवाल उठा रहा है।

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