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चुनावी रण के बीच बंगाल में I-PAC को लेकर सियासी हलचल, दफ्तर बंद होने की खबरों से मचा सस्पेंस

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Written by
Rishabh Rai

पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान से ठीक पहले सियासी माहौल के बीच तृणमूल कांग्रेस के चुनावी कैंपेन से जुड़ी कंसल्टेंसी फर्म I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। कोलकाता के विधाननगर स्थित I-PAC दफ्तर के पिछले दो दिनों से बंद रहने और लगभग 1300 कर्मचारियों को काम पर न आने के कथित निर्देश ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को तेज कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, कंपनी के एचआर की ओर से कर्मचारियों को भेजे गए संदेश के बाद ग्राउंड लेवल पर गतिविधियां अचानक धीमी पड़ गई हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने इन खबरों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि चुनावी प्रबंधन के लिए वह कई एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है और सभी व्यवस्थाएं सामान्य रूप से जारी हैं।

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तृणमूल कांग्रेस की ओर से राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी कहा कि पार्टी किसी एक एजेंसी पर निर्भर नहीं है और कई स्तरों पर चुनावी रणनीति तैयार की जा रही है।

I-PAC लंबे समय से ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के चुनावी कैंपेन में रणनीतिक भूमिका निभाता रहा है। 2021 के विधानसभा चुनावों में भी इस फर्म ने बूथ स्तर की योजना, सर्वे आधारित टिकट चयन, सोशल मीडिया कैंपेन और जमीनी रणनीति में अहम भूमिका निभाई थी। पार्टी के भीतर टिकट वितरण और बूथ मैनेजमेंट में इसके डेटा-आधारित इनपुट को महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।

इस चुनावी चक्र में भी संगठन ने बूथ स्तर पर गहन रणनीति तैयार की थी। करीब 93 हजार पोलिंग बूथों के लिए शैडो एजेंट्स की तैनाती, वोटर लिस्ट की निगरानी और सीटों को मजबूत, कमजोर और प्रतिस्पर्धी श्रेणियों में बांटने जैसे कदम शामिल थे। सूत्रों के अनुसार, 2021 और 2024 के चुनावी आंकड़ों के आधार पर सीट-वार विश्लेषण भी किया गया था।

इसी बीच, पार्टी ने आशंका जताई है कि केंद्रीय सुरक्षा बलों की संभावित कार्रवाई को लेकर कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की स्थिति बन सकती है। इसे लेकर तृणमूल कांग्रेस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जल्द सुनवाई की मांग की है।

दूसरी ओर, I-PAC से जुड़ा मामला कानूनी और जांच एजेंसियों के स्तर पर भी चर्चा में है। आरोप है कि कंपनी और उसके एक डायरेक्टर पर कोयला चोरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच चल रही है, जिसकी जांच केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं। हालांकि इस मामले में अभी न्यायिक प्रक्रिया जारी है और आरोपों की पुष्टि अदालत में विचाराधीन है।

चुनाव के अंतिम चरणों से ठीक पहले उठे इस विवाद ने बंगाल की सियासत में नया तनाव पैदा कर दिया है। एक ओर तृणमूल कांग्रेस अपने चुनावी अभियान को मजबूत बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं दूसरी ओर I-PAC को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ा दी है।

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