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चंद पैसों के लिए जेल पर तैनात अधिकारी बेंच देते हैं अपना ईमान!

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चंद पैसों के लिए जेल पर तैनात अधिकारी बेंच देते हैं अपना ईमान

लखनऊ:-जेल पर तैनात अदनासा सिपाही हो या जेल अधीक्षक चंद पैसों के लिए अपने ईमान को बेचने से बाज नहीं आते! जेल में बंद दुर्दांत अपराधियों को असलहा, खाने का सामान, देखने के लिए टीवी, बात करने के लिए मोबाइल सहित अन्य जरूरी वस्तुएं पुलिसकर्मी ही उपलब्ध कराते हैं। कई बार दिखावे के लिए जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जेल मंत्री, डीजी जेल का निरीक्षण करते हैं, लेकिन चेकिंग के दौरान उन्हें कोई भी आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिलती जबकि जेल में बंद अपराधियों को हर शुभ सुविधा बड़ी आसानी से उपलब्ध होती रहती है। या यूं कहें कि निरीक्षण की जानकारी पुलिस के द्वारा पहले से ही जेल में बंद अपराधियों को दे दी जाती है ताकि अधिकारी खानापूर्ति कर सकें। सरकार द्वारा जेल के अंदर करोड़ों रुपए खर्च कर जैमर की व्यवस्था की गई है ताकि जेल में बंद कैदी व जेल पर तैनात सिपाही जेल के अंदर होने वाली गतिविधियों को किसी को बयान ना कर सके। लेकिन उसके बावजूद भी जेल में पुलिस का जवान हो या जेल में बंद कैदी हो वह खुलेआम मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए कई बार देखे गए हैं। कई बार तो जेल में होने वाले गतिविधियों का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। जेल के अंदर मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद भी जेल प्रशासन नहीं चेता था। नतीजा शुक्रवार को चित्रकूट जेल में बंद दुर्दांत अपराधी अंशु दीक्षित ने असलाहो से लैस होकर अपना वर्चस्व कायम करने के लिए मुकीम काला व मेराज अली को गोलियों से छलनी कर दिया। घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने घटना की निष्पक्ष जांच के लिए आदेश दिए हैं।
प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी
चित्रकूट जेल से प्राप्त सूचना के अनुसार जिला जेल चित्रकूट की उच्च सुरक्षा बैरक में निरुद्ध अंशु दीक्षित पुत्र जगदीश जो जिला जेल सुल्तानपुर से प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित होकर चित्रकूट में निरूद्ध है ने आज सुबह लगभग 10:00 बजे सहारनपुर से प्रशासनिक आधार पर आए बंदी मुकीम काला तथा बनारस जिला जेल से प्रशासनिक आधार पर आए मेराज अली को असलहे से मार दिया तथा पांच अन्य बंदियों को अपने कब्जे में कर लिया
उन्हें जान से मारने की धमकी देने लगा क्योंकि उसके पास असलहा था ऐसे में जिला प्रशासन को सूचना दी गई। चित्रकूट के डीएम और एसपी द्वारा पहुंचकर बंदी को नियंत्रित करने का बहुत प्रयास किया गया। किंतु वह पांच अन्य बंदियों को भी मार देने की धमकी देता रहा। उसकी आक्रामकता तथा जिद को देखते हुए पुलिस द्वारा कोई विकल्प ना देखते हुए की गई फायरिंग में अंशु दीक्षित भी मारा गया। इस प्रकार कुल 3 बंदी इस घटना में मरे हैं। जिसमें अंशु दीक्षित पुलिस द्वारा जब कि मुकीम काला और मेराजअली को अंशु दीक्षित ने असलहे से मारा है।कारागार में तलाशी कराई जा रही है।
जिलाधिकारी तथा एसपी मौके पर मौजूद हैं तथा घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं अन्य विवरण प्राप्त होते ही अवगत कराया जाएगा। फिलहाल कारागार में शांति है तथा स्थिति नियंत्रण में है।

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