
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत और दुनिया के विभिन्न देशों में हुए राजनीतिक बदलावों और विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में भी सत्ता व्यवस्था में बदलाव यानी ‘रिजीम चेंज’ की कोशिशें हुई हैं, लेकिन इस तरह के प्रयासों से समाज और देश को वास्तविक लाभ नहीं हो सकता। भागवत ने दावा किया कि दुनिया के कई देशों में सत्ता परिवर्तन के नाम पर ऐसी गतिविधियां देखने को मिली हैं, जिनका फायदा आम लोगों के बजाय अपने स्वार्थ साधने वाले लोगों को हुआ है।
मोहन भागवत के इस बयान में भारत की राजनीतिक स्थिरता, नेतृत्व और सामाजिक एकता को लेकर कई अहम बातें सामने आईं। उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों में हुई घटनाओं को व्यापक संदर्भ में समझने की जरूरत है।
‘रिजीम चेंज से परिस्थितियां नहीं बदलतीं’
मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सत्ता परिवर्तन के जरिए परिस्थितियों को बदलने की कोशिश की जाती है। उनका कहना था कि ऐसी गतिविधियों के पीछे कई बार अपने हितों को साधने वाले लोग प्रभावी हो जाते हैं, जबकि आम जनता की समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं।
उन्होंने फ्रांस और अल्बानिया के घटनाक्रम के साथ बांग्लादेश और नेपाल में हुए राजनीतिक बदलावों का जिक्र किया। भागवत के मुताबिक, सत्ता व्यवस्था बदलने से ही किसी देश की समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की गतिविधियों में अपने स्वार्थ का पोषण करने वाले लोग प्रभावशाली बने रहते हैं।
संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इस प्रकार की गतिविधियां जारी हैं और भारत उनके निशाने पर है। हालांकि, उनके इस दावे के पीछे बताए गए घटनाक्रमों और उनके आपसी संबंधों को लेकर विस्तृत जानकारी उनके बयान में स्पष्ट नहीं हुई।
भारत में भी ऐसे प्रयास होने का दावा
मोहन भागवत ने कहा कि भारत में भी सत्ता व्यवस्था और सामाजिक ढांचे को प्रभावित करने के प्रयास किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले दशकों में देश ने दृढ़ नीतियों और मजबूत नेतृत्व के कारण ऐसी कोशिशों का सामना किया है।
उनके मुताबिक, भारत की नीतिगत दृढ़ता और नेतृत्व की मजबूती के कारण इन प्रयासों को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें भारत, हिंदू समाज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं।
भागवत के बयान में हिंदू समाज की एकजुटता और देश की स्थिरता पर विशेष जोर दिखाई दिया। उन्होंने संकेत दिया कि भारत को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने के साथ-साथ उन चुनौतियों के प्रति भी सतर्क रहना होगा, जो सामाजिक और राष्ट्रीय एकता को प्रभावित कर सकती हैं।
‘भारत अभी विकास कर रहा है’
RSS प्रमुख ने कहा कि भारत अभी विकास की प्रक्रिया में है और देश का संपूर्ण विकास होना बाकी है। उनके अनुसार, विकास की इस यात्रा में कई तरह की समस्याएं और चुनौतियां सामने आती रहेंगी। इसलिए देश को मजबूत नेतृत्व, स्पष्ट नीतियों और सामाजिक एकजुटता के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
उन्होंने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि केवल राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव कर देने से किसी समाज की स्थिति अपने आप बेहतर नहीं हो जाती। देश की वास्तविक प्रगति के लिए स्थिरता और विकास की निरंतरता महत्वपूर्ण है।
राजनीतिक और सामाजिक विमर्श में बयान की अहमियत
मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय में राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को लेकर महत्वपूर्ण है, जब विभिन्न देशों में विरोध प्रदर्शन, सरकारों के खिलाफ असंतोष और राजनीतिक बदलाव लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। उनके वक्तव्य में भारत की स्थिरता और राष्ट्रीय एकता को लेकर चिंता के साथ-साथ दूसरे देशों में हुए घटनाक्रमों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है।








