Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

अशोक लवासा का चुनाव आयोग से भरोसा बहाल करने का आग्रह, बोले- निष्पक्षता पर सवाल उठे तो चुनाव परिणामों पर भी संदेह होगा

पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा
पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा
[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]
Author Image
Written by
Rishabh Rai

नई दिल्ली/कोलकाता। भारत के पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और उसकी विश्वसनीयता को लेकर चिंता जताई है। मंगलवार को कोलकाता में आयोजित नागरिकों के एक सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग इस समय बड़े विवादों का सामना कर रहा है। ऐसे में आयोग को जनता का विश्वास दोबारा हासिल करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता का महत्व भी रेखांकित किया।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अशोक लवासा ने चुनाव आयोग की तुलना क्रिकेट के अंपायर से करते हुए कहा कि चुनाव की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि आम लोग आयोग को कितना निष्पक्ष मानते हैं। उनके मुताबिक, यदि मतदाताओं को चुनाव कराने वाली संस्था की निष्पक्षता पर संदेह होता है, तो चुनाव परिणामों की स्वीकार्यता भी प्रभावित हो सकती है।

Advertisement Box

‘अंपायर निष्पक्ष नहीं तो जीत पर भी उठेंगे सवाल’

अशोक लवासा ने अपने संबोधन में क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा, “अगर लोगों को लगता है कि अंपायर निष्पक्ष नहीं है तो वे जीतने वाली टीम की जीत पर भी सवाल उठाएंगे।”

उनकी इस टिप्पणी को चुनाव आयोग की निष्पक्षता और संस्थागत विश्वसनीयता के महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है। लवासा का कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव केवल मतदान और परिणाम घोषित करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि चुनाव कराने वाली संस्था के प्रति जनता का विश्वास भी उतना ही जरूरी है।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है, लेकिन वर्तमान विवादों के बीच उसे अपनी विश्वसनीयता मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए।

‘चुनाव आयोग जनता का भरोसा फिर से हासिल करे’

पूर्व चुनाव आयुक्त ने कहा कि भारतीय चुनाव आयोग का दर्जा देश की संस्थाओं में बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद आयोग को लेकर विवाद बढ़ना और लोगों का विरोध के लिए सड़कों पर उतरना चिंता का विषय है।

लवासा ने कहा, “चुनाव आयोग को अपनी विश्वसनीयता और लोगों का भरोसा फिर से हासिल करना चाहिए। भारत का चुनाव आयोग, जिसका दर्जा बहुत ऊंचा है और शायद सभी सरकारी संस्थाओं में सबसे ऊंचा है, आज विवादों में घिरा हुआ है और लोग विरोध करने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं।”

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने कथित वोट चोरी और चुनावी अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए विरोध-प्रदर्शन किए हैं। इन मुद्दों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई है।

हाल के दिनों में नई दिल्ली में विपक्षी नेताओं के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ झड़प की खबरें भी सामने आई थीं।

चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों पर भी उठाए सवाल

अशोक लवासा ने चुनाव आयोग के सदस्यों के बीच कथित मतभेदों को लेकर सामने आई खबरों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इन मामलों में आयोग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण लोगों की शंकाओं को पूरी तरह दूर नहीं कर पाए हैं।लवासा के अनुसार, कुछ प्रेस बयान जारी किए गए, लेकिन उनसे सवालों के स्पष्ट जवाब मिलने के बजाय संदेह और बढ़े। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी स्थिति में पारदर्शिता और स्पष्ट संवाद की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है।उनकी टिप्पणी का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि चुनाव आयोग को अपनी कार्यप्रणाली के बारे में उठने वाले सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए, ताकि नागरिकों का भरोसा बना रहे।

चुनाव आयोग ने दी अपनी प्रक्रिया पर सफाई

दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और विचार सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के अनुसार, उसके आदेश निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जारी किए जाते हैं और उन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है।

आयोग ने यह भी कहा है कि तीनों चुनाव आयुक्तों और अधिकारियों को चुनावी व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव देने का अधिकार है। इस तरह आयोग ने आंतरिक विचार-विमर्श और अलग-अलग राय को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।

चुनावी विश्वसनीयता पर बहस तेज

अशोक लवासा की टिप्पणी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनता के विश्वास से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर विपक्ष SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां उठा रहा है, वहीं चुनाव आयोग अपनी कानूनी प्रक्रियाओं और निर्णयों का बचाव कर रहा है।

ऐसे में आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष उठाए गए सवालों और आपत्तियों पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण है और उसकी कार्यप्रणाली पर सार्वजनिक बहस के बीच पारदर्शी संवाद तथा तथ्यों के आधार पर आरोपों की जांच अहम बनी हुई है।

आज का राशिफल

वोट करें

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद दुनिया के सामने रोज बेनकाब हो रहे पाकिस्तान को दी गई एक अरब डॉलर की मदद पर क्या अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को फिर से विचार करना चाहिए?

और भी पढ़ें

WhatsApp