
नई दिल्ली। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता के अधिकार और हाल के चुनावी नतीजों को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। राहुल गांधी ने दावा किया कि महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में चुनावों के दौरान ऐसे सवाल सामने आए, जिनका जवाब मिलना जरूरी है।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में सबसे अहम सवाल सत्ता विरोधी लहर यानी एंटी इनकंबेंसी को लेकर उठाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली सरकारों और राजनीतिक दलों को आमतौर पर एंटी इनकंबेंसी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अपने तर्क को समझाने के लिए इंदिरा गांधी का उदाहरण दिया और कहा कि उनके कार्यकाल में भी एक समय के बाद सत्ता विरोधी माहौल बना था।
राहुल गांधी का सवाल था कि आखिर बीजेपी के मामले में एंटी इनकंबेंसी दिखाई क्यों नहीं देती। उन्होंने कहा कि कोई नेता कितना भी लोकप्रिय क्यों न हो, लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के बीच असंतोष पैदा हो सकता है। उनके मुताबिक यही सवाल कांग्रेस और विपक्ष लगातार समझने की कोशिश कर रहे थे और अब चुनाव प्रक्रिया से जुड़े घटनाक्रमों के बीच उन्हें इसके जवाब तलाशने की जरूरत महसूस हो रही है।

महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्य प्रदेश का दिया उदाहरण
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्य प्रदेश के चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि इन राज्यों में चुनावी नतीजों और जमीन पर दिखाई देने वाले राजनीतिक माहौल के बीच अंतर को समझने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और विपक्षी दलों की ओर से किए गए आकलन और चुनाव परिणामों के बीच कई जगह बड़ा अंतर दिखाई दिया।
हालांकि, इन दावों को राजनीतिक आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों को खारिज किया है तथा आयोग की ओर से कहा गया है कि चुनावी प्रक्रिया में लिए गए फैसले नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत किए जाते हैं। मौजूदा विवाद में आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
‘मताधिकार देश की नींव’
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में वोट के अधिकार को लोकतंत्र की बुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि देश का हर नागरिक अपने मताधिकार के जरिए सरकार चुनता है और यही प्रक्रिया संविधान को शक्ति देती है। उनके मुताबिक अगर किसी मतदाता का वोट प्रभावित होता है या मतदाता सूची से जुड़े सवालों का समाधान नहीं होता तो इसका असर केवल चुनाव पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी पड़ता है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि वोट को प्रभावित करना संविधान की मूल भावना पर हमला है। इससे पहले भी उन्होंने ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग और बीजेपी पर सवाल उठाए हैं।
मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया पर विवाद
राहुल गांधी का ताजा हमला ऐसे समय हुआ है जब चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है। इसी बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्तों की ओर से मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। रिपोर्ट में फॉर्म-6, नए मतदाताओं को जोड़ने, नाम हटाने और मतदाता डेटा से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इन दावों पर अलग रुख सामने आया है और कहा गया है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र और संविधान से जोड़ते हुए कहा कि चुनाव में मतदाता का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुचिता पर किसी भी तरह का सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।
बीजेपी पर भी साधा निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने बीजेपी पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सत्ता विरोधी लहर का असर बीजेपी पर दूसरे राजनीतिक दलों की तरह क्यों नहीं दिखाई देता। उन्होंने कहा कि वह इस सवाल का जवाब तलाश रहे थे और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े हालिया घटनाक्रमों ने उनके सामने कई नए सवाल खड़े किए हैं।
राहुल गांधी पहले भी चुनावों में कथित अनियमितताओं को लेकर कई आरोप लगा चुके हैं। अगस्त 2025 में उन्होंने महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत कई चुनावों में कथित ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाया था और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का दावा किया था। चुनाव आयोग ने इन आरोपों का विरोध किया था।
अब सवाल जवाब और जांच का
राहुल गांधी के ताजा बयान के बाद चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। विपक्ष जहां चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं चुनाव आयोग अपनी प्रक्रियाओं को नियमों के अनुरूप बताता रहा है। ऐसे में इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि मतदाता सूची, चुनाव प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं से जुड़े प्रत्येक दावे की जांच दस्तावेजी तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर हो।
लोकतंत्र में चुनाव सिर्फ सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मतदाता के भरोसे से जुड़ी व्यवस्था भी है। यही वजह है कि राहुल गांधी ने अपने संबोधन में मताधिकार को संविधान की शक्ति से जोड़ते हुए चुनाव आयोग की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए। अब राजनीतिक आरोपों के बीच जिन तथ्यों, आंकड़ों और प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनकी स्पष्टता ही इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी।






