
अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि अगर सुरक्षा एजेंसियों की सिफारिशों पर समय रहते अमल किया जाता तो इस घटना को रोका जा सकता था।
सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय पुलिस ने राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों को कई बार सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की सलाह दी थी। इसमें मंदिर परिसर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाने और कुछ बेहद संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस तैनाती बढ़ाने का सुझाव शामिल था।
बताया जा रहा है कि सुरक्षा एजेंसियों ने मंदिर परिसर के कुछ हिस्सों को संवेदनशील मानते हुए वहां विशेष निगरानी और सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत बताई थी। हालांकि, इन सुझावों पर अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं हो सकी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई और चोरी की घटना किस तरह अंजाम दी गई।
राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था देश की सबसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं में शामिल है। मंदिर परिसर में सीआरपीएफ, एसएसएफ, पीएसी, स्थानीय पुलिस और निजी सुरक्षाकर्मियों समेत बड़ी संख्या में जवान तैनात रहते हैं। इसके अलावा एटीएस की टीम भी सुरक्षा निगरानी में लगी रहती है।
इतनी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद अगर चोरी की घटना हुई है तो इसे सुरक्षा तंत्र की बड़ी चुनौती माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने पहले भी कुछ स्थानों को अधिक संवेदनशील बताया था, जहां अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा बलों की मौजूदगी जरूरी बताई गई थी।
फिलहाल जांच का फोकस इस बात पर है कि चोरी में कौन-कौन शामिल था, सुरक्षा व्यवस्था में कहां कमी रह गई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। मामले में सामने आ रहे खुलासों के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की संभावना भी बढ़ गई है।







