
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन हाल ही में हुआ है। खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र मशहद में एक धार्मिक परिवार में हुआ था। उन्होंने कम उम्र से ही धर्म और राजनीति में गहरी रुचि दिखाई और शाह के शासन के खिलाफ मुखर रूप से आवाज उठाई।
1963 में शाह के खिलाफ अपने भाषणों के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया। उस समय खामेनेई धीरे-धीरे सरकार विरोधी आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन गए। उन्होंने खोमैनी के विश्वास और सहयोग को हासिल किया और शाह विरोधी क्रांति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति हुई और शाह की सरकार गिर गई। क्रांति के बाद खोमैनी देश लौटे और नई इस्लामी सरकार बनाई। खामेनेई को क्रांतिकारी परिषद में शामिल किया गया और बाद में उन्हें उप रक्षामंत्री का पद मिला। उनके राजनीतिक करियर में 1981 में भी कई हमले हुए। उसी साल तेहरान की एक मस्जिद में भाषण देते समय उनके ऊपर बम हमला हुआ। उसी साल राष्ट्रपति पर हुए एक और बम हमले में उनकी हत्या कर दी गई, जिसके बाद हुए चुनाव में खामेनेई भारी बहुमत से ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने।
1989 में खोमैनी के निधन के बाद उन्हें ईरान का सर्वोच्च नेता (‘रहबर’) बनाया गया। इसके लिए संविधान में संशोधन भी किया गया। इस पद पर खामेनेई का शासन ईरान की राजनीति और समाज पर गहरा प्रभाव डालता रहा। उनके समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते रहे, जबकि आलोचक उन पर कट्टर और सख्त शासन चलाने का आरोप लगाते रहे।
खामेनेई के शासनकाल में अमेरिका और इजराइल ने कई बार उनके खिलाफ गुप्त और खुले हमले करने की कोशिश की। हाल ही में अमेरिकी हमलों में उनके और उनके परिवार के करीबी सदस्यों-जिनमें उनकी बेटी, दामाद, पोती और बहु शामिल हैं- जिसको भी निशाना बनाया गया। यह घटनाक्रम ईरान-अमेरिका और ईरान-इजराइल संबंधों की जटिलता को दर्शाता है।
उनका राजनीतिक व्यक्तित्व और निर्णय हमेशा विवादों में रहे। ईरान में उनका शासन, सेना और धार्मिक संस्थाओं पर उनका प्रभाव, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उनकी सख्ती और अपने देश में कट्टर धर्मनिष्ठ नीतियों ने उन्हें एक विवादास्पद लेकिन शक्तिशाली नेता बना दिया।
उनकी तस्वीरें उनके राजनीतिक जीवन के विभिन्न दौर की याद दिलाती हैं-70 के दशक में क्रांति के दौरान आंदोलनकारी के रूप में, राष्ट्रपति के रूप में 1980 के दशक में, और हाल की तस्वीरों में एक सुप्रीम नेता के रूप में। उनकी मौत ने न केवल ईरान बल्कि पूरे मध्यपूर्व की राजनीति को हिला दिया है।
अयातुल्ला अली खामेनेई का जीवन संघर्ष, सत्ता, धार्मिक कट्टरता और वैश्विक राजनीति का मिश्रण रहा। उनकी कहानी ईरान की आधुनिक राजनीति और इस्लामी क्रांति की लंबी छाया को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।







