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अवध सूत्र पर बड़ी ख़बरे

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यूपी बोर्ड:सख्ती हुई तो उड़ गए बोर्ड के ‘प्रवासी परिंदे
अब यूपी में परीक्षा देने नहीं आते दूसरे राज्यों के छात्र
कुछ समय पहले तक देशभर से आते थे परीक्षार्थी
नकल से परीक्षा पास कराने का ठेका लेते थे माफिया
दस्तावेजों का सत्यापन बढ़ा तो कम हो गए फर्जी छात्र।
प्रयागराज। यूपी बोर्ड की परीक्षा में फर्जी छात्र-छात्राओं के शामिल होने पर सख्ती बढ़ी तो ‘प्रवासी परिंदों’ ने इधर आना बंद कर दिया। पांच-छह साल पहले तक नकल के सहारे पास होने की आस में हजारों किलोमीटर दूर से छात्र-छात्राएं यूपी बोर्ड से परीक्षा देने आते थे। वर्ष 2017 की हाईस्कूल की परीक्षा में ही उत्तर प्रदेश से बाहर के 1,19,123 प्राइवेट छात्र पंजीकृत थे। देश का शायद ही कोई प्रदेश बचा हो जहां के बच्चों ने यूपी बोर्ड से परीक्षा देने के लिए फॉर्म नहीं भरा था।इनमें से हजारों छात्र ऐसे थे जिन्होंने नौंवी के बाद यूपी बोर्ड से 10वीं का फॉर्म भर दिया, जबकि हजारों ऐसे परीक्षार्थी भी थे जो अपने बोर्ड से 10वीं की परीक्षा पास नहीं कर सके तो यूपी आ गए। चूंकि हाईस्कूल के प्रमाणपत्र पर लिखी जन्मतिथि ही मान्य होती है इसलिए 10वीं में सर्वाधिक बाहरी छात्र आते रहे हैं। लेकिन धीरे-धीरे बोर्ड ने अपनी छवि में सुधार किया है। 2023 की हाईस्कूल परीक्षा में तो बाहरी परीक्षार्थियों की संख्या घटकर 5135 रह गई है।
गोवा से असम तक के छात्र आते थे
पहले यूपी बोर्ड से हाईस्कूल का प्रमाणपत्र लेने के लिए देश के तकरीबन हर राज्य से छात्र आते थे। इन्हें नकल के सहारे पास करवाने के नाम पर नकल माफिया हर साल करोड़ों रुपये की कमाई करते थे। वर्ष 2017 में गोवा, असम, बिहार, मणिपुर, पंजाब, हरियाणा, उड़ीसा, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, केरल, महाराष्ट्र, जम्मू एवं कश्मीर, आन्ध्र प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली, मणिपुर, त्रिपुरा आदि राज्यों के बच्चों ने पंजीकरण कराया था।
 
 
 
हाईस्कूल में घटती गई बाहरी छात्रों की संख्या
वर्ष बाहरी बोर्ड के छात्र 10वीं में कुल पंजीकृत छात्र
● 2023 5,135 31,16,487
● 2022 38,775 27,81,654
● 2021 36,312 29,94,312
● 2020 52,571 30,24,514
गूगल मीट में डीजी ने दिए निर्देश
परीक्षा के संबंध में प्रमुख सचिव माध्यमिक व बेसिक शिक्षा दीपक कुमार एवं महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने शनिवार को गूगल मीट की। प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को यह स्पष्ट निर्देश दिए कि परीक्षा की समाप्ति तक लगातार निगरानी की जाए। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता क्षम्य नहीं होगी।
यूपी बोर्ड:504 टीमों ने 815 परीक्षा केंद्रों पर की छापेमारी
 
यूपी बोर्ड सचिव के निर्देश पर केंद्रों में प्रश्नपत्र की सुरक्षा को परखा
निगरानी की मॉनिटरिंग बोर्ड मुख्यालय के कंट्रोल रूम से होती रही
प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के मद्देनजर शुरू हुए विशेष अभियान के पहले दिन प्रदेश के 75 जिलों में गठित 504 टीमों ने 815 केंद्रों पर शुक्रवार देररात तक छापेमारी की। 20 फरवरी से शुरू हो रही महत्वपूर्ण विषयों की परीक्षा को देखते हुए सचिव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र लिखकर छापेमारी के निर्देश दिए थे। पिछले साल बलिया में इंटर अंग्रेजी का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद बोर्ड की शुचिता पर सवाल उठे थे। वैसी स्थिति इस साल पैदा न हो इसलिए अधिकारी दिन-रात एक किए हुए हैं। निगरानी व्यवस्था की मॉनीटरिंग यूपी बोर्ड के मुख्यालय में स्थापित कन्ट्रोल रूम से देररात तक की जाती रही। सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने साफ किया कि यह निगरानी परीक्षा की समाप्ति तक नियमित रूप से की जाएगी।
देर रात तक कंट्रोल रूम में डटे रहे सचिव
प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए छापेमारी अभियान की निगरानी यूपी बोर्ड के सचिव दिब्यकांत शुक्ल भी बोर्ड मुख्यालय में बने कंट्रोल रूम से कर रहे हैं। शुक्रवार आधी रात तक सचिव ने कंट्रोल रूम से जिलों में छापेमारी की रिपोर्ट ली।
कक्ष निरीक्षकों को नहीं भेजा तो काली सूची में आएंगे स्कूल
लखनऊ। यूपी बोर्ड परीक्षाओं में ड्यूटी से गायब कक्ष निरीक्षकों के मूल स्कूलों को डीआईओएस ने काली सूची में डालने की चेतावनी दी है। डीआईओएस ने शहर के पांच स्कूलों के खिलाफ शनिवार को नोटिस जारी की है। नोटिस में इन स्कूलों के प्रबंधकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इनके स्कूल के जिन शिक्षकों की ड्यूटी यूपी बोर्ड परीक्षाओं में लगाई गई है। इन्हें सोमवार की सुबह सात बजे तक आवंटित परीक्षा केंद्रों पर पहुंचना सुनिश्चित कराएं। इन शिक्षकों के उस रोज उपस्थित न होने पर डीआईओएस इन स्कूलों के खिलाफ मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद को पत्र लिखेंगे।केन्द्रों की लगातार निगरानी की जाए वहीं शनिवार को माध्यमिक व बेसिक शिक्षा के प्रमुख सचिव दीपक कुमार तथा स्कूल शिक्षा के महानिदेशक विजय किरण आनन्द द्वारा गूगल मीट के माध्यम से प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को स्पष्ट निर्देश दिए गये कि यूपी बोर्ड परीक्षा की समाप्ति तक परीक्षा केन्द्रों की लगातार निगरानी की जाए। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता क्षम्य नहीं होगी ।
डीआईओएस ने स्ट्रांग रूम की सुरक्षा परखी
लखनऊ। डीआईओएस ने शनिवार रात परीक्षा केंद्रों पर औचक छापेमारी कर सुरक्षा व्यवस्था परखी। परीक्षा केंद्रों पर बने स्ट्रांग रूम, सीसीटीवी के साथ केंद्र की निगरानी में लगे चौकीदार व पुलिस की पड़ताल की।डीआईओएस राकेश कुमार पांडेय ने पुलिस बल के साथ चिनहट के श्री अयोध्या सिंह मेमोरियल इंटर कॉलेज, आरबीएम इंटर कॉलेज लोनापुर, समेत करीब एक दर्जन परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया। रविवार को भी जांच अभियान चलेगा।
पांच स्कूलों को नोटिस
 
 
 
सुशीला पब्लिक इंटर कालेज, आदर्श पब्लिक स्कूल आशियाना, न्यू होरीजोन एकेडमी कृष्णा नगर, पीआर इंटर कॉलेज एलडीए कालोनी, एमजेएसएस पब्लिक इंटर कालेज ज्योतिनगर।
यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में ड्यूटी में लगे शिक्षकों को न भेजने वाले स्कूलों के खिलाफ चेतावनी का नोटिस जारी किया गया। प्रबंधकों द्वारा सोमवार की सुबह परीक्षा केंद्रों पर न भेजने पर मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
राकेश कुमार पांडेय, डीआईओएस।
विषम सेमेस्टर के परीक्षा केंद्र घोषित
 
 
 
 
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में बीबीए, बीसीए विषम सेमेस्टर 2022 की परीक्षाओं के लिए लखनऊ, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, सीतापुर में चार नोडल सेंटर और बीस परीक्षा केंद्र घोषित कर दिए हैं। परीक्षा नियंत्रक ने लखीमपुर खीरी में सुशील वर्मा मेमोरियल डिग्री कॉलेज को परीक्षा केंद्र और वाई डी पीजी कॉलेज को नोडल सेंटर बनाया है। वहीं लखनऊ में एलयू को नोडल सेंटर और एलयू न्यू कैंपस, गुरु नानक गर्ल्स, शेखर कॉलेज, केकेसी, इरम गर्ल्स, शिया पीजी, कालीचरण, बोरा इंस्टीट्यूट, डॉ. आरपी मेमोरियल, डीएसएन महिला, रामा डिग्री आदि को केंद्र बनाया है।
छात्रवृत्ति घोटाले में शामिल एजेंटों का गिरोह निशाने पर
लखनऊ। छात्रवृत्ति घोटाले में शामिल शैक्षिक संस्थानों के विरुद्ध मनी लांड्रिंग की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एजेंटों के गिरोह को अपने निशाने पर ले लिया है। इस गिरोह ने फिनो पेमेंट्स बैंक के प्लेटफॉर्म पर खाता खोलने की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया। इस तरह 75 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में बैंककर्मियों व उसके एजेंटों की बड़ी भूमिका सामने आ रही है।प्रदेश के छह जिलों में 22 स्थानों पर मारे गए ईडी के छापों में फिनो पेमेंट्स बैंक में एजेंटों के माध्यम से तीन हजार से ज्यादा फर्जी खाते खोले जाने की जानकारी सामने आई। साथ ही रवि प्रकाश गुप्ता, मोहम्मद, साहिल अजीज, अमित कुमार मौर्य, तनवीर अहमद और जितेंद्र सिंह की एजेंट के रूप में सक्रिय भूमिका का पता चला। अब ईडी की टीमें इन एजेंटों की तलाश में हैं। छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी संस्थानों ने फिनो पेमेंट्स बैंक के एजेंटों से अकाउंट किट सीधे अपने कब्जे में ले लिया, जबकि वह खाताधारकों को मिलना चाहिए था। इतना ही नहीं एजेंटों ने संस्थानों को इन बैंक खातों की चेकबुक भी उपलब्ध करा दी।
तदर्थ शिक्षकों को अगले महीने मिल सकती है बड़ी राहत, मानदेय प्रस्ताव पर निर्णय जल्द
लखनऊ।एडेड इंटर कालेजों के तदर्थ (एडहॉक) शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार जल्द ही तदर्थ शिक्षकों को मानदेय दिए जाने के प्रस्ताव पर मार्च में अन्तिम निर्णय कर सकती है। शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को वित्त से हरी झंडी मिलने के बाद इस दिशा में उम्मीद बढ़ी है। मंत्रिमण्डल की होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलेगी। पिछले वर्ष तदर्थ शिक्षकों को नियत मानदेय दिए जाने का एक प्रस्ताव शासन को भेजा गया था जिसे विभिन्न स्तरों से मंजूरी के बाद अब वित्त विभाग से भी कुछ शर्तों मसलन सामान्य शिक्षकों की भांति सुविधाएं नहीं दी जाएंगी और न ही ये नियमित शिक्षकों के समकक्ष माने जाएंगे, आदि के साथ मंजूरी दे दी गई है। अब शिक्षा विभाग इस प्रस्ताव को कैबिनेट भेजेगा। विदित हो कि एडेड इंटर कॉलेजों में टीजीटी और पीजीटी परीक्षा के जरिए माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड शिक्षकों की भर्ती करता है। कई बार भर्तियों में विलंब होने या किसी वजह से भर्तियों में देर होने की वजह से खाली पदों पर प्रबंधन अपने स्तर से भर्तियां कर लेता है। ऐसे तदर्थं शिक्षक समय-समय पर भर्ती होते रहे। सामान्य शिक्षक की तरह इनका वेतन भी मिलने लगता है बाद में इन भर्तियों पर विवाद होता है और कोर्ट में मामला पहुंच जाता है विवाद बढ़ने की दशा में सरकार ने रास्ता निकालते हुए ऐसे शिक्षकों को नियमित भी किया गया उनका तब से वेतन मिल रहा है।
वेतन को लेकर होता रहा है विवाद
नियमितीकरण की तारीख के बाद भी विद्यालय प्रबंधन शिक्षकों की भर्ती करते रहें हैं। ऐसे ही कई शिक्षक वेतन के लिए बाद में कोर्ट पहुंचते रहे हैं। इसमें हाईकोर्ट ने समय-समय पर अलग-अलग फैसले दिए। उसके बाद करीब 2 साल पहले मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा सुप्रीम कोर्ट ने तदर्थ आवाज को खत्म करने के आदेश दिए यही वजह है कि कई जिलों में डीआईओएस ने तथा शिक्षकों के वेतन रोक दिए। वेतन रोके जाने का मुद्दा पिछले दिनों विधान परिषद में भी उठा था और शिक्षक संघ ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन भी किया था।
लोक सेवा आयोग से हो नर्सिंग भर्ती,राजकीय नर्सेस संघ ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
 
 
 
लखनऊ। राजकीय मेडिकल कॉलेजों में नसों की भर्ती लोक सेवा आयोग के माध्यम से की जाएं। किसी भी दूसरी
संस्थाओं को नर्सिंग भर्ती परीक्षा की जिम्मेदारी नहीं सौंपी जानी चाहिए। यह मांग राजकीय नर्सेस संघ ने की है। इस संबंध में शनिवार को संघ ने मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव को मांग पत्र भेजा है।नर्सेस संघ के महामंत्री अशोक कुमार ने बताया कि पीजीआई को अयोध्या, बस्ती, बहराइच, फिरोजाबाद, शाहजहांपुर, एटा, हरदोई, गाजीपुर, देवरिया, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर, मिर्जापुर व जौनपुर मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती हे के लिए विज्ञप्ति जारी की गयी है। उन्होंने कहाकि प्रदेश में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा विभाग, केजीएमूय स्टाफ नर्सों की सीधी भर्ती उप्र लोक सेवा आयोग से करा रहा है। सरकार की मंशा के अनुरूप निष्पक्ष रूप जनहित में विगत वर्षों में भर्तीयां हुइ्र हैं। इसी प्रकार बाकी मेडिकल कॉलेजों में भी भर्ती प्रक्रिया अपनाई जाए। ताकि किसी प्रकार की अनियमितता एवं भ्रष्टाचार को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि हाल ही में लोहिया संस्थान की नर्सिंग भर्ती परीक्षा में ढेरों अनियमितता उजागर हुई हैं। इससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है। भर्ती प्रक्रिया में भी देरी हो रही है। इससे भी सरकार की किरकिरी हो रही है। लिहाजा लोक सेवा आयोग के हाथों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी कराई जाए।
नर्सिंग भर्ती परीक्षा में आठ और सेंटरों में मिली गड़बड़ी
लखनऊ:लोहिया की नर्सिंग भर्ती परीक्षा में भारी पैमाने में गड़बड़ी सामने आई है। अभी आठ सेंटरों की परीक्षा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। हाईपावर कमेटी की जांच रिपोर्ट में आठ और सेंटरों में गड़बड़ी की बात का जिक्र किया है। लिहाजा इन सेंटरों की परीक्षा भी रद्द हो सकती है। परीक्षा रद्द होने वाले सेंटरों की संख्या 15 पहुंच सकती है।नर्सिंग भर्ती परीक्षा नौ फरवरी को हुई थी। गुजरात की एडुटेस्ट एजेंसी को परीक्षा कराने की जिम्मेदारी मिली है। प्रदेश के 92 सेंटरों में 43 हजार अभ्यर्थियों को शामिल होना था। पहली पाली की परीक्षा में सात केंद्रों में बदइंतजामी उजागर हुई थी। केंद्रों पर तय से ज्यादा अभ्यर्थी पहुंच गए थे। कई सेंटरों पर बिजली गुल हो गई थी।बैकअप का इंतजाम नहीं था। माउस और कम्प्यूटर तक ने धोखा दे दिया था। इसके बाद भड़के अभ्यर्थियों ने कई केंद्रों पर पर्यवेक्षकों को बंधक बना लिया गया था। संस्थान प्रशासन ने तुरंत सात केंद्रों की परीक्षा रद्द कर दी थी।
पांच हजार छात्रों की परीक्षा दोबारा संभव
संस्थान प्रशासन ने हाईपावर जांच कमेटी गठित की थी। एक हफ्ते तक कमेटी ने विभिन्न बिन्दुओं पर जांच की। जांच में आठ और केंद्रों में गड़बड़ी उजागर हुई है। पर्यवेक्षक की रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और 50 से अधिक ईमेल पर मिली शिकायतों के आधार पर जांच की गई। संस्थान की निदेशक डॉ. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि इन आठ सेंटरों की परीक्षा भी रदद करने पर विचार किया जाएगा। सभी 15 सेंटरों में लगभग पांच हजार छात्रों के बैठने का इंतजाम था।
यूपी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की 2571 एई और आर्किटेक्चर भर्ती परीक्षा सफल में अभ्यर्थियों के लिए अहम नोटिस जारी
लखनऊ।उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) ने अवर अभियंता और उप वास्तुविद भर्ती परीक्षा 2026 की लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के लिए अहम नोटिस जारी किया है। यूपीएसएसएससी ने कहा है कि इस भर्ती की लिखित परीक्षा में स्कोर के आधार पर अर्हता/दस्तावेज सत्यापन के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए 2571 अभ्यर्थियों का परिणाम एवं कटऑफ अंक आयोग की ओर से 21 जनवरी 2023 को आयोग की वेबसाइट upsssc.gov.in पर प्रकाशित किया गया था।आयोग ने इस अभ्यर्थियों का दस्तावेज सत्यापन 23 फरवरी 2023 से करानेका फैसला किया है। ऐसे में यूपीएसएसएससी भर्ती परीक्षा 2016 में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों अर्हता/अभिलेख परीक्षण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी और एडमिट कार्ड आयोग की वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं।
दस्तावेज सत्यापन के लिए निर्धारित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, तृतीय तल, पिकप भवन, विभूतिखंड, लखनऊ स्थिति कार्यालय में उपस्थित होंगे।
ऐसे प्राप्त करें एडमिट कार्ड:
 
 
 
यूपीएसएसएससी की वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाएं।
होम पेज पर मौजूद सेक्शन Examination/Interview Segment पर जाकर Download Document Verification Letter पर क्लिक करें और जरूरी सूचनाएं दर्ज करें।
अब अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड करें।
अभ्यर्थियों को सहला है कि दस्तावेज सत्यापन के लिए कार्यायल में अपने सभी जरूरी दस्तावेजों के मूल प्रमाणपत्रों के साथ पहुंचें।
22 फरवरी तक भर सकेंगे परीक्षा फार्म
लखनऊ। उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड ने परीक्षा फार्म भरने की तिथि को 22 फरवरी तक बढ़ा दिया है। अभी तक 17 फरवरी तक परीक्षा फार्म भरने की अन्तिम तिथि थी। शनिवार को बोर्ड ने बैठक फार्म भरने की तारीख बढ़ाने का निर्णय लिया। 17 फरवरी तक प्रदेश भर से एक लाख 64 परीक्षा फार्म भरे गए थे।
फैसला:दस साल से अधिक सेवा दे चुके अतिथि शिक्षक प्रिंसिपल पद के योग्य
नई दिल्ली। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने अतिथि शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। कैट ने एक अहम फैसले में कहा है कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में दस वर्षों से अधिक सेवा दे चुके अतिथि शिक्षक प्राचार्य भर्ती में शामिल हो सकेंगे। कैट सदस्य आनंद माथुर और मनीष गर्ग की पीठ ने यह फैसला सुनाया।संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने जुलाई 2021 में दिल्ली सरकार के स्कूलों में प्राचार्य की भर्ती निकाली थी। इसमें हजारों शिक्षकों/अतिथि शिक्षकों ने आवेदन किया था।इनमें एक अतिथि अध्यापक वतन दीप भी शामिल थे। सितंबर 2022 में जारी परिणाम में वह सफल रहे। लेकिन, आयोग ने 29 नवंबर 2022 को यह कहते हुए उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी कि उनके पास पर्याप्त योग्यता नहीं है। इसके खिलाफ उन्होंने कैट में याचिका दायर की।इस पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता 10 वर्ष से अधिक समय से अनुबंध अथवा अतिथि शिक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं। इस कार्य अनुभव के आधार पर कैट ने साक्षात्कार में शामिल होने देने का अंतरिम आदेश दिया।
सरकार की दलील, विज्ञापन में स्पष्ट थी योग्यता
इस मामले में यूपीएससी और दिल्ली सरकार की ओर से कहा गया कि प्राचार्य की भर्ती के विज्ञापन में ही स्पष्ट कर दिया गया था कि इस पद के लिए निर्धारित अनुभव की गणना करते समय उम्मीदवार द्वारा अंशकालिक आधार पर प्राप्त किए गए अनुभव की अवधि, दैनिक वेतन, अतिथि शिक्षक के तौर पर प्राप्त अनुभव को नहीं माना जाएगा। बता दें कि सरकारी स्कूलों में प्राचार्य के खाली पदों को 50 फीसदी पदोन्नति के जरिए भरने का प्रावधान है, जबकि 50 फीसदी भर्ती यूपीएससी द्वारा सीधी भर्ती के जरिए की जाएंगी।
संस्कृत परीक्षा 23 फरवरी से होगी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की संस्कृत परीक्षायें 23 फरवरी से 20 मार्च के बीच होंगी। पूर्व मध्यमा से उत्तर मध्यमा स्तर की परीक्षाएं होंगी। परीक्षा केंद्र विद्यान्त हिंदू इंटर कॉलेज को बनाया गया है।
टीजीटी बायो के पद बढ़वाने को न्यायालय पहुंचे छात्र
 
 
 
 
प्रयागराज। सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) 2022 भर्ती में जीव विज्ञान विषय के पद कम होने से अभ्यर्थियों में नाराजगी है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने पिछले साल नौ जून 2022 को टीजीटी के 3539 और पीजीटी के 624 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे थे। टीजीटी में विज्ञान के 499 और जीव विज्ञान के सिर्फ 49 पद शामिल हैं। जीव विज्ञान विषय से तैयारी करने वाले बांकेलाल और दो अन्य छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका कर सामाजिक विज्ञान की तरह हाईस्कूल स्तर पर विज्ञान विषय की भर्ती की मांग की है। छात्रों का तर्क है कि सामाजिक विज्ञान में इतिहास, राजनीति विज्ञान, भूगोल और अर्थशास्त्रत्त् विषयों की परीक्षा होती है। उसी तरह से विज्ञान में फिजिक्स, केमेस्ट्री, जुलॉजी और बॉटनी से बीएससी वालों को मौका देते हुए टीजीटी विज्ञान की भर्ती की जाए।जीव विज्ञान संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष जितेन्द्र यादव का कहना है कि टीजीटी में विज्ञान और जीव विज्ञान के अलग-अलग पद होने के कारण जीव विज्ञान विषय में पद कम हो जाते हैं। पूर्व में यूपी बोर्ड की तरफ से शासन को अर्हता के संबंध में प्रस्ताव भेजा गया था जिस पर कोई निर्णय नहीं हो सका है। एक फरवरी को इस मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगते हुए 23 फरवरी को सुनवाई की तारीख तय की है। गौरतलब है कि चयन बोर्ड में सदस्य न होने के कारण अब तक इस भर्ती के लिए परीक्षा तिथि घोषित नहीं हो सकी है।
महिलाओं को पूछताछ के लिए थाने बुलाने वालों पर होगी कार्रवाई, बेवजह गिरफ्तारी की भी मनाही
लखनऊ। बेवजह गिरफ्तारी करने और महिलाओं, बुजुर्गों व नाबालिगों को थाने में बुलाकर पूछताछ की प्रवृत्ति को लेकर शासन ने सख्त रुख अपनाया है। डीजीपी डीएस चौहान ने मातहतों को निर्देश दिए हैं कि जब तक किसी मामले में पुख्ता साक्ष्य न हों, संदेह के आधार पर गिरफ्तारी न की जाए। डीजीपी ने इन निर्देशों का पालन नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सात साल से कम सजा वाले मामलों में होने वाली गिरफ्तारी, पूछताछ के नोटिस आदि को लेकर सभी राज्यों की पुलिस को निर्देश जारी करने और इसका अनिवार्य रूप से पालन कराने को कहा है। इसके मुताबिक महिलाओं, नाबालिगों, 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और मानसिक या शारीरिक रूप से निशक्त व्यक्ति को उसके निवास स्थान के अलावा कहीं और पूछताछ के लिए नहीं बुलाया जाएगा।जांच में यदि कोई संज्ञेय अपराध प्रकट नहीं होता है, तो ऐसे व्यक्ति से मजिस्ट्रेट के न्यायालय मंे हाजिर होने की अपेक्षा नहीं की जाएगी। यदि किसी व्यक्ति को धारा 41 के तहत नोटिस देकर बुलाया जाता है तो जांच अधिकारी के सामने पेश होने पर वह पावती के लिए अनुरोध कर सकता है। यदि उसे पुलिस थाने की जगह किसी अन्य स्थान पर बुलाया जाता है तो वहां एक स्वतंत्र साक्षी होना चाहिए। यदि किसी कारणवश वह नियत तिथि पर उपस्थित नहीं होता है तो उसे जांच अधिकारी अधिकतम चार दिन का अतिरिक्त समय दे सकता है।
परिजनों, महिला पुलिस की मौजूदगी जरूरी
महिलाओं से पूछताछ के लिए थाने पर नहीं बुलाया जाएगा। पूछताछ उसी जगह करनी होगी, जहां महिलाएं रहती हैं। इस दौरानपरिजनों और महिला पुलिस की उपस्थिति अनिवार्य होगी। वहीं बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों से उसके परिवार के सदस्यों, संरक्षकों अथवा किशोर कल्याण अधिकारियोंं की उपस्थिति में ही पूछताछ की जा सकेगी।
अब पीएचसी और उप स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं चलेगी डॉक्टरों की मनमानी, वीडियो कॉल से जांची जाएगी हाजिरी
लखनऊ। प्रदेश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) एवं उप स्वास्थ्य केंद्रों का नए सिरे से सत्यापन किया जा रहा है। इसका पूरा विवरण जिले से लेकर महानिदेशालय स्तर तक डिजिटल रहेगाा। महानिदेशालय से भी वीडियो कॉल करके हाजिरी जांची जाएगी। इसके जरिए सभी केंद्रों पर शत-प्रतिशत डॉक्टरों एवं कर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने की तैयारी है।प्रदेश में 3780 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 25,723 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। विभाग को अकसर शिकायत मिलती है कि इन केंद्रों पर डॉक्टर और स्टाफ गायब रहते हैं। ऐसे में विभाग ने हाजिरी जांचने की नई रणनीति अपनाई है। महानिदेशालय की ओर से निर्देश दिया गया है कि सभी पीएचसी और उपकेंद्रों का नए सिरे से डाटा तैयार किया जाए। अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर और कर्मचारियों के नाम, पदनाम, मोबाइल नंबर आदि को नए सिरे से अपडेट कर विभागीय पोर्टल पर रखा जाए। इसके जरिए महानिदेशालय से संबंधित केंद्रों पर डॉक्टर और कर्मचारी की हाजिरी जांची जाएगी। संबंधित डॉक्टर के मोबाइल नंबर पर वीडियो कॉल की जाएगी। यह देखा जाएगा कि वह अस्पताल में हैं या नहीं। एक डॉक्टर के जरिए अन्य कर्मचारियों की भी जांच की जाएगी।इसके अलावा संबंधित अस्पतालों के संसाधनों की रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। जहां संसाधन कम होंगे, वहां अगले बजट से इन्हें बढ़ाया जाएगा। इसमें मरीजों के उपयोग के उपकरणों के साथ ही अस्पताल आने वाले मरीजों के लिए बैठने, पानी पीने, गर्मी के मद्देनजर पंखे आदि का विवरण मांगा गया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों एवं अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि शत प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करें। जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हेराफेरी : शुआट्स में मानदेय-विशेष भत्ते के नाम पर हर साल करोड़ों का खेल, परत दर परत खुल रही पोल
प्रयागराज। करोड़ों के सरकारी अनुदान के दुरुपयोग के बाद अब शुआट्स में मानदेय व विशेष भत्ते के नाम पर खेल का मामला सामने आया है। आरोप है कि वीसी आरबी लाल समेत संस्था के कई ऐसे अफसर हैं जो गवर्नमेंट पे रोल के पदों पर नियुक्त हैं और नियम विरुद्ध तरीके से मानदेय व विशेष भत्ते के रूप में भुगतान ले रहे हैं। मामले की शिकायत शासन में पत्र भेजकर की गई है। साथ ही जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई है सूत्रों का कहना है कि शुआट्स में प्रतिमाह 35 लाख रुपए मानदेय के रूप में वितरित किए जा रहे हैं। इनमें से 30 लाख रुपए का भुगतान स्पेशल एलाउंस के मद में किया जा रहा है। शेष पांच लाख का भुगतान प्रॉक्टोरियल बोर्ड, हॉस्टल वार्डन आदि को दिए जा रहे हैं।इस हिसाब से देखा जाए तो सलाना लगभग 3.5 करोड़ रुपए मानदेय व विशेष भत्ते के नाम से बांटे जा रहे हैं। यह भुगतान सैम हिगिन्नबॉटम सोसायटी से लिया जाता है।जानकारों का कहना है कि सरकारी अनुदान के पद पर नियुक्त रहते हुए मानदेय का भुगतान लेना नियमविरुद्ध है। इसी तरह सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के सेक्शन 10 व 11 के मुताबिक, कोई भी सदस्य सोसाइटी से लाभ नहीं ले सकता है। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर मानदेय व विशेष भत्तों के नाम पर लाल बंधु व उनके करीबी सरकारी अनुदान वाले पदों पर रहते हुए भी करोड़ों रुपयों का भुगतान ले रहे हैं।
वीसी हर माह लेते हैं 9.94 लाख का विशेष भत्ता
सूत्रों के मुताबिक, शुआट्स वीसी आरबी लाल हर माह विशेष भत्ते के तौर पर 9.94 लाख रुपये का भुगतान विशेष भत्ते के मद में लेते हैं। जबकि वह खुद सरकारी अनुदान वाले पद पर पोस्ट हैं। इसी तरह उनका बेटा जोनाथन ए लाल 2.17 लाख रुपये का भुगतान लेता है। इसी तरह उनके दोनों भाइयों प्रो वीसी सुनील बी लाल व निदेशक प्रशासन विनोद बी लाल को विशेष भत्ते के रूप में 2.27 लाख रुपये दिए जाते हैं। इसी तरह वीसी की पत्नी सुधा लाल का भतीजा दीपक लाल जो डीन के पद पर तैनात है, 15 हजार रुपये बतौर मानदेय लेता है।
शिक्षकों को वेतन नहीं, पर सरकारी पदों पर नियुक्त लोगों को होता रहा मानदेय भुगतान
एक खास बात यह भी है कि पिछले दिनों शुआट्स में तैनात शिक्षकों को सात माह तक वेतन का भुगतान नहीं हुआ। लेकिन उसी दौरान सरकारी पदों पर आसीन शिक्षकों/ अधिकारियों को सरकारी वेतन के साथ-साथ मानदेय भुगतान जारी रहा।
जानकारों के मुताबि, शासन के नियमों के अनुसार, मानदेय वह राशि है जिसे विशिष्ट कार्य करने पर संबंधित को दिया जाता है। मानदेय का भुगतान वैतनिक कर्मचारियेां को नहीं किया जाता।एक्ट-35 के सेक्शन 19(2) के अनुसार सीनेट को यह शक्ति प्रदान की गई है कि वह चांसलर, वाइस चांसलर, ट्रेजरार, प्रो-वाइस चांसलर, डायरेक्टर, रजिस्ट्रार, फाइनेंस कंट्रोलर एवं अन्य उच्च अधिकारियों की नियुक्ति कर सके तथा वेतन/मानदेय तय कर सके। लेकिन खास बात यह है कि शुआट्स में जिन अधिकारियों की नियुक्ति, वेतन एवं मानदेय तय होना है, वही अधिकारी सीनेट के चेयरमैन, सदस्य सचिव व सदस्य भी हैं।यानी अधिकारियों ने स्वयं अपनी नियुक्ति, वेतन एवं मानदेय तय कर लिए हैं। इसी तरह विशेष भत्ते की एक्ट-35 मे कोई परिभाषा नहीं है। यह केवल कुलपति एवं सीनेट पर निर्भर करता है कि वह किसको और क्यों इसका भुगतान करना चाहते हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि एक्ट-35 मे यह स्पष्ट लिखा है कि कुलपति, रजिस्ट्रार, फाइनेंस कंट्रोलर, डायरेक्टर, ट्रेजरर इत्यादि पद पूर्णकालिक है। यानी इन पदों को धारण करने वाले अधिकारी अपने निर्धारित कार्य के अलावा अन्य किसी कार्य में सम्मिलित नहीं हो सकते हैं। ऐसे में विशेष भत्ते का भुगतान किस विशेष कार्य के लिए हो रहा है, इसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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