
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को दिल्ली में आयोजित कांग्रेस के ‘रचनात्मक कांग्रेस प्रकोष्ठ’ के अधिवेशन में केंद्र सरकार और भाजपा-आरएसएस पर जमकर निशाना साधा। अधिवेशन के दूसरे दिन राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन, अभिव्यक्ति की आजादी और देश में मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद रहे और उन्होंने कार्यकर्ताओं से संवाद किया।
राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों ने वहां खुद को अभिव्यक्त किया। उन्होंने दावा किया कि अब सरकार को भी समझ आ गया है कि देश के लोग अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेंगे। राहुल ने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों ने अपनी आवाज उठाई और अपने मुद्दों को सामने रखा। उनके मुताबिक, यही लोकतंत्र की ताकत है कि लोग अपनी बात खुलकर रख सकें।
राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमित शाह को कभी ‘चाणक्य’ और कई अन्य नामों से संबोधित किया जाता था, लेकिन अब वे दिखाई नहीं दे रहे हैं। राहुल ने दावा किया कि वे करीब 20 दिनों तक संसद में नहीं आ पाए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बात समझ में आ गई है कि देश खुद को अभिव्यक्त करने से नहीं रोकेगा।
कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत में बहुत से लोग मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के सामने डरकर व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई के दौरान डरने की बात करे तो उसकी स्थिति को समझा जा सकता है, लेकिन आज जिन लोगों से मुकाबला है, उनके बारे में राहुल ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर भारत के दर्शन और इतिहास को सही तरीके से नहीं समझने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को चुप रहने के लिए कहा गया। राहुल ने एक दुखी मां का जिक्र करते हुए कहा कि उसे भी अपनी बात रखने से रोका गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस देश पर एक तरह की व्यवस्था थोपना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का काम लोगों को अपनी बात कहने और अपनी अभिव्यक्ति का अधिकार दिलाना है। राहुल गांधी के मुताबिक, देश के हर वर्ग को अपनी आवाज उठाने और अपने विचार रखने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था के खिलाफ खड़ा होना है, जिसमें लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश की जाए।
अधिवेशन में शिक्षा, सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय, बेरोजगारी और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं ने इन विषयों पर पार्टी की भूमिका और भविष्य की रणनीति को लेकर विचार-विमर्श किया। राहुल गांधी ने कहा कि देश की राजनीति में आम लोगों की भागीदारी और उनकी अभिव्यक्ति को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने का आह्वान किया।









