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वैश्विक संकट के बीच बचत और आत्मनिर्भरता पर PM मोदी का जोर

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Written by
Rishabh Rai

PM मोदी ने रविवार को हैदराबाद में भाजपा की रैली को संबोधित करते हुए देशवासियों से पेट्रोल-डीजल, गैस, सोना और विदेशी खर्चों में कटौती करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों में चल रहे युद्ध और वैश्विक संकट के कारण ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिसका असर भारत पर भी पड़ रहा है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास तेल के बड़े भंडार नहीं हैं, इसलिए ऊर्जा बचत आज राष्ट्रीय जिम्मेदारी बन गई है। उन्होंने लोगों से वर्क फ्रॉम होम, मेट्रो यात्रा और कारपूलिंग जैसे उपाय अपनाने का आग्रह किया। उनका कहना था कि यदि जिन शहरों में मेट्रो सुविधा उपलब्ध है वहां लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें, तो इससे ईंधन की बचत होगी और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम पड़ेगा।

एक साल तक सोना न खरीदने की अपील
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले युद्धकाल में लोग देशहित में सोना दान करते थे, लेकिन आज जरूरत यह है कि लोग कम से कम एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचें। उन्होंने कहा कि सोने के आयात पर देश की बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। भारतीय घरों और मंदिरों में पहले से ही भारी मात्रा में सोना मौजूद है, इसलिए फिलहाल नई खरीद टालना देशहित में होगा।

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उद्योग संगठन ASSOCHAM की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों और मंदिरों में लगभग 50 हजार टन सोना रखा हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 10 ट्रिलियन डॉलर बताई गई है। यह दुनिया के कई बड़े केंद्रीय बैंकों के भंडार से भी अधिक माना जा रहा है।

खाद्य तेल और उर्वरकों पर भी चिंता
प्रधानमंत्री ने खाने के तेल की खपत कम करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि यदि हर परिवार थोड़ा कम तेल इस्तेमाल करे तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ लोगों की सेहत को भी फायदा होगा। इसके साथ ही उन्होंने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। सरकार का लक्ष्य रासायनिक खाद की खपत को आधा करना है। इस वर्ष भारत ने लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपए का उर्वरक आयात किया है, जो पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है।

विदेश यात्राएं टालने की सलाह
प्रधानमंत्री ने लोगों से फिलहाल अनावश्यक विदेश यात्राएं टालने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि महंगे ईंधन और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के कारण भारत पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में शादी, छुट्टियां या अन्य निजी कारणों से विदेश यात्रा कम करने से देश की विदेशी मुद्रा बच सकती है।

तेल आयात पर बढ़ता बोझ
भारत अपनी जरूरत का लगभग 70 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। बीते वित्त वर्ष में तेल आयात पर 11 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुआ। हाल के युद्ध और वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे आने वाले समय में यह खर्च और बढ़ सकता है।

तेलंगाना और कांग्रेस पर राजनीतिक टिप्पणी
हैदराबाद की रैली में प्रधानमंत्री ने रेवंत रेड्डी के बयान पर हल्के अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले दस वर्षों में गुजरात को जो सहयोग दिया, वैसा ही तेलंगाना को देने के लिए भी वह तैयार हैं, लेकिन ऐसा करते ही राज्य को वर्तमान में मिलने वाला लाभ आधा हो जाएगा। इसलिए बेहतर होगा कि राज्य केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करे। दरअसल, रेवंत रेड्डी ने अपने भाषण में कहा था कि जैसे मनमोहन सिंह के कार्यकाल में गुजरात मॉडल विकसित हुआ था, वैसे ही अब तेलंगाना ‘तेलंगाना मॉडल’ बनाना चाहता है और राज्य 2034 तक 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखता है।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी केवल वादे और गारंटी देती है, लेकिन उन्हें पूरा नहीं करती। उन्होंने कर्नाटक उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पिछले कुछ वर्षों में यही स्थिति देखने को मिली है। साथ ही उन्होंने के संबंधों पर भी टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि सत्ता समीकरण बदलते ही कांग्रेस ने अपने सहयोगियों का साथ छोड़ दिया।

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