
भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी की पत्नी हसीन जहां द्वारा 10 लाख रुपये मासिक भरण-पोषण की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कोर्ट ने कहा कि हर महीने 4 लाख रुपये भरण-पोषण पर्याप्त हैं और अतिरिक्त 10 लाख रुपये की मांग उचित नहीं मानी जा सकती। जानकारी के अनुसार, हसीन जहां ने शमी के खिलाफ अदालत में आवेदन किया था, जिसमें उन्होंने 10 लाख रुपये मासिक भरण-पोषण की मांग की थी। इस पर अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के दौरान कहा कि वर्तमान में शमी पहले ही हर महीने 4 लाख रुपये भरण-पोषण के रूप में प्रदान कर रहे हैं। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या मौजूदा राशि पर्याप्त नहीं है, जिससे मामला और बढ़ गया।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद हसीन जहां के वकील ने अदालत के समक्ष तर्क प्रस्तुत करने की कोशिश की, लेकिन न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि अतिरिक्त रकम की मांग “अत्यधिक और असंगत” है। कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण का उद्देश्य केवल जरूरतों को पूरा करना है, न कि अत्यधिक धन का लाभ उठाना। वकीलों और कानून विशेषज्ञों के अनुसार, अदालत का यह आदेश निजी विवाहिक मामलों में न्यायिक विवेक का उदाहरण है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भरण-पोषण की राशि व्यावहारिक और न्यायसंगत होनी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट निर्णय लेने से पहले दोनों पक्षों को अंतिम तर्क रखने का अवसर देगा। इस विवाद ने मीडिया और सोशल मीडिया पर भी ध्यान खींचा है, जहां लोग इस पर चर्चा कर रहे हैं कि भरण-पोषण की सही राशि कितनी होनी चाहिए।








