दुनिया का पहला ऐसा देश है, जहां पर मास्क लगाने की पाबंदी हटा दी गई
कोरोना संक्रमण के नए स्ट्रेन से बचने के लिए घर की खिड़कियां रखें खुली
क्या है एरोसोल इंफेक्शन
ऐयरोसोल इंफेक्शन यानी कि हवा में ऐसे कणों की मौजूदगी जो रोगाणुओं से भरा हो. जबकि ड्रॉपलेट इंफेक्शन में सांस की बूदों से होने वाला संक्रमण होता है जो पूरी तरह से इससे अलग है. बता दें कि ड्रॉपलेट्स 5 माइक्रॉन से बड़े कण होते हैं जो ज्यादा दूर तक ट्रैवल नहीं कर सकते. ये अधिक से अधिक 2 मीटर तक ट्रैवल कर पाते हैं और नीचे गिर जाते हैं. जबकि एरोसोल ट्रांसमिशन में दूषित कण 5 माइक्रॉन से छोटे होते हैं जो हवा के साथ लंबी दूरी तय कर सकते हैं. ऐसे में अगर कोई संक्रमित व्यक्ति रूम में खांसता या छींकता है तो उसके जाने के बावजूद कमरे में कई घंटों तक वायरस मौजूद रहता है. ऐसे में कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन होना बहुत ही जरूरी है।
घर की खिड़कियां गर्मी में भी रखें खुली
मेडिकल जर्नल लैंसेट में प्रकाशित इस नई रिसर्च में कहा गया है कि कोरोना का नया वायरस SARS-COV-2 दरअसल एयरबॉर्न है यानी कि ये हवा के जरिए फैलता है. ऐसे में देश में तेजी से फैल रहे इस संक्रमण के मद्देनजर डॉ गुलेरिया ने भी कहा है कि किसी बंद जगह के मुकाबले खुली जगह में वायरस के फैलने की आशंका कम होती है. इसलिए गर्मियों में घरों की खिड़कियों को खुली रखें।
घर पर अधिक लोग न हों एकत्रित
जहां तक हो सके एक कमरे में अधिक लोग एकत्रित होने से बचें. कोशिश करें कि आपका कमरा हवादार हो, क्रॉस वेंटिलेशन की व्यवस्था हो और किसी बंद कमरे में ज्यादा लोग इकट्ठा न हों तभी आप इस नए संक्रमण से बच सकते हैं. अगर लोग ऐसा नहीं करें तो हो सकता है कि किसी बंद कमरे में केवल व्यक्ति वहां मौजूद सभी लोगों को संक्रमित कर दे. दरअसल बंद कमरे के अंदर संक्रमित व्यक्ति अगर 10 मीटर दूर भी बैठा हो और खांसता या छींकता है तो वह वहां मौजूद सभी को संक्रमित कर सकता है।
सही तरीके से पहनें मास्क
डबल म्यूटेंट स्ट्रेन के आने पर कई लोग डबल मास्क पहनने की सलाह दे रहे हैं. डॉ गुलेरिया की मानें तो अगर आप N-95 मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको डबल मास्क पहनने की जरूरत नहीं. हालांकि मास्क को सही तरीके से पहनना बहुत जरूरी है. इस बात का ध्यान हमेशा रखें कि मास्क और स्किन के बीच कोई गैप ना हो और आपकी ठुड्डी भी अच्छी तरह से मास्क के अंदर हो।
देवास पुलिस कोरोना कर्फ्यू का उल्लंघन करने वालों को जरा नहीं बख्श रही. SP शिव दयाल सिंह खुद मोर्चे पर हैं और आने-जाने वालों के दस्तावेज चेक कर रहे हैं. इस दौरान बेवजह घूमने वालों को सख्त सजा दी जा रही है।
कोरोना कर्फ्यू पर नजर रखने के लिए पुलिस ने शहर में 3 चेकिंग पॉइंट बनाए हैं. एसपी सिंह खुद संयाजी गेट पर तैनात हुए और सख्ती से कर्फ्यू का पालन कराया. इस दौरान नियमों को तोड़ने वालों से उठक-बैठक कराई गई. गौरतलब है कि देवास में सुबह 7:00 बजे से 10:00 बजे तक जरूरी सामान लेने की छूट है।ये है एमपी की हालत
प्रदेश में लगतार दूसरे दिन 12,897 से ज्यादा कोरोना से संक्रमित मरीज मिले. सरकारी रिकॉर्ड कहता है कि एक दिन में 79 मौतें हुईं, जबकि श्मशान के आंकड़े बताते हैं कि इससे कहीं ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल में हुआ. पिछले 24 घंटे में 50,942 नमूनों की जांच की गई. वहीं संक्रमण दर 25.3% दर्ज की गई. पिछले 24 घंटों में 6836 लोग यानी 50% से ज्यादा लोग ठीक भी हुए हैं।
भोपाल में जल रहीं लाशें
भोपाल में एक ही दिन में 123 संदिग्ध कोरोना मरीजों की मौत हुई. इन शवों का कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया गया. सरकारी आंकड़ों में सिर्फ 5 लोगों की मौत बताई गई. शहर के मुख्य विश्राम घाट और कब्रिस्तान से मिले आंकड़ों के अनुसार 19 अप्रैल को 123 शवों के अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किए गए. सबसे ज्यादा अंतिम संस्कार भदभदा विश्राम घाट में 83, सुभाष विश्राम घाट में 32 के किए गए. झदा कब्रिस्तान में 8 शवों को दफनाया गया. हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार सिर्फ 5 लोगों की मौत कोरोना संक्रमण से हुई।
चार दिनों जले सैकड़ों शव
18 अप्रैल को 112 शवों का कोविड प्रोटोकॉल के अंतिम संस्कार साथ किया गया था. सबसे ज्यादा शवों के अंतिम संस्कार भदभदा विश्राम घाट पर किए गए. 17 अप्रैल के आंकड़ों के अनुसार शहर के मुख्य विश्राम घाट और कब्रिस्तान में कोरोना प्रोटोकॉल के तहत 92 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया था. सरकारी आंकड़ों में कोरोना से 3 मौत होना बताया गया था. 16 अप्रैल को 118, 15 अप्रैल को 112 शवों का कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार हुआ था।








