
भारत आजादी के 80वें साल में प्रवेश कर चुका है। 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ था, तब भारत के सामने एक नए राष्ट्र के निर्माण की बड़ी चुनौती थी। देश विभाजन के जख्म से गुजर रहा था। गरीबी और भुखमरी बड़ी समस्या थी। स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित थीं और संसाधनों की भी भारी कमी थी। उस समय भारत की आबादी आज के मुकाबले काफी कम थी, लेकिन अगले 80 वर्षों में देश की जनसंख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई।
आजादी के समय भारत की आबादी करीब 34 करोड़ मानी जाती है। इसके बाद 1951 में पहली जनगणना हुई। इसमें भारत की आबादी करीब 36.1 करोड़ दर्ज की गई। अगले कुछ दशकों में आबादी बढ़ने की रफ्तार काफी तेज रही।
1961 तक देश की आबादी करीब 44 करोड़ पहुंच गई। 1971 में यह आंकड़ा लगभग 54.8 करोड़ हो गया और 1981 में भारत की आबादी करीब 68.3 करोड़ दर्ज की गई। यानी 1951 से 1981 के बीच लगभग 30 वर्षों में देश की आबादी करीब दोगुनी हो गई।
इस तेज वृद्धि के पीछे कई वजहें थीं। आजादी के बाद देश में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ। टीकाकरण बढ़ा, संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण बेहतर हुआ और मृत्यु दर में कमी आई। लेकिन दूसरी तरफ जन्मदर लंबे समय तक काफी ज्यादा रही। नतीजा यह हुआ कि देश की आबादी तेजी से बढ़ती गई।
1961 से 1971 के बीच भारत की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर करीब 24.8 फीसदी रही। यह देश के इतिहास में सबसे अधिक वृद्धि दरों में से एक थी।
हालांकि 1981 के बाद तस्वीर बदलनी शुरू हुई। जन्मदर में धीरे-धीरे कमी आने लगी और जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार भी कम हुई। इसके बावजूद आबादी लगातार बढ़ती रही, क्योंकि देश की जनसंख्या का आधार पहले ही काफी बड़ा हो चुका था।
1991 में भारत की आबादी करीब 84.6 करोड़ थी। 2001 में यह 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर गई। यानी नई सदी की शुरुआत तक भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिनकी आबादी एक अरब से ज्यादा थी।
2011 की जनगणना में भारत की आबादी करीब 121 करोड़ दर्ज की गई। इसी जनगणना में दशकीय वृद्धि दर घटकर 17.7 फीसदी रह गई। इसके बाद अब तक देश में नई जनगणना के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए मौजूदा आबादी के आंकड़े अनुमान आधारित हैं।
2026 में भारत की आबादी करीब 147.66 करोड़ आंकी जाती है। यानी आजादी के समय की करीब 34 करोड़ आबादी की तुलना में देश की जनसंख्या चार गुने से भी ज्यादा हो चुकी है।
लेकिन भारत की कहानी सिर्फ बढ़ती आबादी तक सीमित नहीं है। इन 80 वर्षों में देश ने विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, अंतरिक्ष और अर्थव्यवस्था में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।
34 करोड़ से करीब 147.66 करोड़ तक का यह सफर बताता है कि आजादी के बाद भारत ने न सिर्फ अपनी आबादी बढ़ते देखी, बल्कि बदलते समय के साथ खुद को भी लगातार बदला और आगे बढ़ाया।







