
मुश्किल में ट्रंप कुर्सी जाने का भी खतरा ईरान से जंग जारी रहने पर एक्सपर्ट की वॉर्निंग
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार से शुरू हुई लंबी शांति वार्ता रविवार को किसी ठोस समझौते के बिना समाप्त हो गई। 21 घंटे से अधिक चली इस मैराथन बैठक में दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी, जिससे युद्ध फिर से शुरू होने की आशंकाएं बढ़ गई हैं। वार्ता की असफलता के बाद पूर्व राजनयिक महेश सचदेव ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान के साथ संघर्ष जारी रहा तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग का खतरा मंडरा सकता है। न्यूज एजेंसी एएनआई बात करते हुए सचदेव ने कहा कि ट्रंप की लोकप्रियता तेजी से घट रही है और उनकी अनुमोदन रेटिंग अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।
सचदेव ने बताया कि दो-तिहाई से अधिक अमेरिकी ईरान पर युद्ध जारी रखने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में ट्रंप को महाभियोग का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति को संवैधानिक बाधाओं का भी सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति को देश के बाहर युद्ध छेड़ने का अधिकार तो है, लेकिन संघर्ष शुरू होने के 60 दिनों के अंदर कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी। युद्ध पहले ही 40 दिनों से अधिक चल चुका है और अस्थायी विराम के पांच दिन बीत गए हैं, अब केवल करीब 15 दिन बचे हैं।
घट रही अमेरिकी विकास दर
पूर्व राजनयिक ने कहा कि पहली तिमाही की अमेरिकी विकास दर घटकर 0.5 प्रतिशत रह गई है, जो पहले 4.5 प्रतिशत थी। इसके अलावा, राष्ट्रपति की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है। हालांकि अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन बहुमत है, लेकिन कई रिपब्लिकन सांसद और अधिकांश डेमोक्रेट युद्ध के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि मध्यावधि चुनाव मात्र सात महीने दूर हैं। सचदेव ने आगे कहा कि यदि यह संघर्ष जारी रहा तो ट्रंप पर महाभियोग का वास्तविक खतरा पैदा हो सकता है, खासकर एपस्टीन फाइलों से जुड़े मुद्दों में जहां उनका और उनके सहयोगियों का नाम कई बार सामने आया है। उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार युद्ध से रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर नकारात्मक असर पड़ेगा और यदि कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत खो गया तो स्थिति और जटिल हो जाएगी।
ईरान को हथियार देने वाले देशों को चेतावनी
पूर्व राजनयिक के अनुसार, ये कारक अंत में तीन रूप ले सकते हैं; दीर्घकालिक थकाऊ युद्ध, कम तीव्रता वाले छिटपुट हमलों के साथ अघोषित युद्धविराम, या अचानक जीत की घोषणा के बाद वापसी। दूसरी ओर ईरान को हथियार आपूर्ति के मुद्दे पर ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने वाले देशों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। सचदेव ने कहा कि विश्वसनीय रिपोर्टों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से चीन की ईरानी पक्ष में महत्वपूर्ण संलिप्तता का संकेत मिलता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2231 के तहत ईरान पर हथियार आपूर्ति के प्रतिबंध पहले समाप्त हो चुके थे, लेकिन ‘स्नैपबैक’ प्रावधान के तहत ई3 देशों (ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी) के अनुरोध पर ये प्रतिबंध फिर से लागू हो गए हैं।






