
नई दिल्ली: लोकसभा में बुधवार को ‘नक्सल मुक्त भारत’ के मुद्दे पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार की तरफ से जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग पूरी व्यवस्था को नकार कर हथियार उठाते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी और उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।
शाह ने कहा कि वर्षों तक भोले-भाले आदिवासियों को अंधेरे में रखा गया और वामपंथी ताकतों ने अपनी विचारधारा फैलाने के लिए उन्हें बहकाया। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वतंत्रता के 75 साल में 60 साल कांग्रेस की सरकार रही, लेकिन आदिवासियों तक विकास के मूलभूत साधन जैसे घर, स्कूल, स्वास्थ्य और मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचे।
गृह मंत्री ने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नक्सलवाद लगभग पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उन्होंने बताया कि बस्तर के प्रत्येक गांव में स्कूल खोलने के लिए अभियान चलाया गया और राशन की दुकानों के लिए भी विशेष मुहिम शुरू की गई। प्रत्येक तहसील और पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही लोगों को आधार कार्ड और राशन कार्ड जारी किए गए, और उन्हें पांच किलोग्राम अनाज प्रतिमाह उपलब्ध कराया जा रहा है।
शाह ने कहा कि जो लोग नक्सलवाद की वकालत कर रहे थे, उनसे पूछना चाहता हूं कि यह विकास अब तक क्यों नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोग पीछे इसलिए रह गए, क्योंकि इस क्षेत्र पर ‘लाल आतंक’ का साया मंडरा रहा था। अब वह साया हट चुका है और बस्तर विकास के पथ पर अग्रसर है।
गृह मंत्री ने कहा कि 1970 से लेकर अब तक आदिवासियों को मूलभूत सुविधाओं से दूर रखने की ज़िम्मेदारी कांग्रेस सरकार पर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की सबसे बड़ी पंचायत, यानी आदिवासी क्षेत्र, इस पर गंभीरता से चिंतन करे। शाह ने यह भी उल्लेख किया कि नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी नहीं, बल्कि एक अलग विचारधारा थी, जिसे इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति चुनाव के संदर्भ में स्वीकार कर लिया।
उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कथन का हवाला देते हुए कहा कि माओवादी समस्या जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट की तुलना में भारत की आंतरिक सुरक्षा में सबसे बड़ी चुनौती है। गृह मंत्री ने 2014 के बाद के बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि धारा 370 और 35-ए हटाना, राम मंदिर का निर्माण, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और महिलाओं को विधायिका में 33% आरक्षण देना नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्षों में हुए प्रमुख सुधार हैं।
अमित शाह ने विपक्ष पर लोकतंत्र में विश्वास न होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग न्याय के नाम पर हथियार उठा रहे हैं और अपने ही लोगों के खिलाफ हिंसा कर रहे हैं। शाह ने इस संदर्भ में भगत सिंह, बिरसा मुंडा और तिलका मांझी जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का हवाला देते हुए कहा कि उनका संघर्ष अंग्रेजों के खिलाफ था, जबकि अब हथियार उठाने वाले अपने ही नागरिकों पर हमला कर रहे हैं।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि नक्सलवाद का आदर्श अब माओवादियों ने विदेश से अपनाया है और यह आदिवासी नेताओं या स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अब नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और बस्तर इसका उदाहरण है।







