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बंगाल चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज: ममता बनर्जी भबानीपुर से मैदान में, कांग्रेस ने केरल में जारी की पहली सूची

ममता बनर्जी
ममता बनर्जी
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Written by
Rishabh Rai

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने मंगलवार को बड़ा कदम उठाते हुए 294 में से 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। शेष तीन सीटें सहयोगी दल बीजीपीएम के लिए छोड़ी गई हैं। उम्मीदवारों की इस सूची के जरिए पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साफ संकेत दिया है कि वह इस बार चुनाव में नए चेहरे और संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं पर ज्यादा भरोसा जता रही हैं।

इस सूची की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ममता बनर्जी ने करीब एक तिहाई मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए हैं। कुल 74 विधायकों को इस बार मौका नहीं दिया गया, जबकि 15 विधायकों की सीटों में बदलाव किया गया है। यह कदम पार्टी के भीतर एंटी-इन्कंबेंसी को कम करने और नए उत्साह के साथ चुनाव मैदान में उतरने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। ममता बनर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी को जीत दिलाने के लिए ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी गई है, जिनका जनता से सीधा जुड़ाव है।

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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद भबानीपुर सीट से चुनाव लड़ेंगी। यहां उनका मुकाबला भाजपा के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी से होने की संभावना है। यह मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया था। ऐसे में इस बार का चुनाव दोनों नेताओं के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बनता नजर आ रहा है।

उम्मीदवारों की घोषणा के दौरान ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा को डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि उसे चुनाव मैदान में आकर निष्पक्ष मुकाबला करना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार पर गैस संकट जैसे मुद्दों के जरिए जनता को प्रभावित करने का आरोप भी लगाया। ममता का यह बयान चुनावी माहौल को और गरमाने वाला माना जा रहा है।

इस बार टीएमसी ने उम्मीदवार चयन में कई नए प्रयोग किए हैं। पार्टी ने सेलिब्रिटी चेहरों से दूरी बनाते हुए जमीनी नेताओं और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी है। जहां 2021 के चुनाव में 15 सेलिब्रिटी उम्मीदवारों को टिकट दिया गया था, वहीं इस बार केवल दो ही ऐसे चेहरे सूची में शामिल हैं। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि पार्टी अब ग्लैमर से ज्यादा संगठन की ताकत पर भरोसा कर रही है।

महिला सशक्तिकरण पर भी टीएमसी ने विशेष ध्यान दिया है। घोषित सूची में 52 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है, जो पार्टी की समावेशी सोच को दर्शाता है। इसके अलावा 47 उम्मीदवार अल्पसंख्यक समुदाय से हैं, जबकि 95 उम्मीदवार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं। युवाओं को भी मौका देते हुए 40 वर्ष से कम आयु के 42 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया है। यह संतुलन सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले 14 वर्षों से ममता बनर्जी का दबदबा कायम है। यदि टीएमसी इस बार भी जीत हासिल करती है, तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। ऐसा करने वाली वह देश की पहली महिला नेता होंगी। हालांकि, जे. जयललिता पांच बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं, लेकिन उनके कार्यकाल लगातार नहीं थे। ऐसे में ममता बनर्जी के सामने इतिहास रचने का अवसर है।

दूसरी ओर, केरल में भी चुनावी तैयारियां जोरों पर हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने वहां विधानसभा चुनाव के लिए 55 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची में प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ को पेरावूर सीट से, विपक्ष के नेता वीडी सतीसन को परावूर से और चांडी ओम्मन को पुथुपल्ली सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। केरल में 9 अप्रैल को मतदान होना है और 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल और केरल दोनों राज्यों में चुनावी मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। पश्चिम बंगाल में जहां ममता बनर्जी अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए रणनीतिक बदलावों के साथ मैदान में उतरी हैं, वहीं भाजपा उन्हें कड़ी चुनौती देने की तैयारी में है। दूसरी तरफ केरल में कांग्रेस अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए नए चेहरों और संतुलित उम्मीदवारों के साथ चुनावी जंग में उतर रही है।

आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार और भी तेज होगा, और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी बढ़ेगा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसके पक्ष में अपना फैसला सुनाती है।

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