
राजस्थान में एलपीजी और सीएनजी गैस की कमी को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में गैस संकट के हालात बन गए हैं और इससे आम जनता, उद्योग और छोटे व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं।
लंबी कतारों में आम जनता
डोटासरा ने कहा कि आम लोग एलपीजी सिलेंडर और कमर्शियल गैस के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं। उन्होंने इसे नोटबंदी और कोरोना काल की परिस्थितियों से तुलना की। डोटासरा ने कहा, “जैसे नोटबंदी के समय लोग बैंकों के बाहर कतार में लगते थे और कोरोना काल में श्मशानों के बाहर इंतजार करना पड़ता था, उसी तरह आज लोग गैस के लिए एजेंसियों के बाहर खड़े हैं।”
उनका कहना था कि देश में जारी खाड़ी देशों में युद्ध जैसे हालातों के बीच देश में गैस आपूर्ति पर असर पड़ा है। उद्योगों में उत्पादन लगभग 30 प्रतिशत तक घट गया है, जिससे व्यापार और रोजमर्रा के कामकाज में बाधा उत्पन्न हुई है।
गैस की कीमत और आपूर्ति पर सवाल
प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि पहले ही एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाए जा चुके हैं, और अब गैस की कमी से आम जनता और व्यापारियों को और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर ऑनलाइन बुकिंग बंद कर दी गई है और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
डोटासरा ने बताया कि सामान्य दिनों की तुलना में गैस बुकिंग में लगभग 40 प्रतिशत तक गिरावट आई है। इसके चलते छोटे होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायों का काम प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि शादी के सीजन में भी लोग अपने कार्यक्रमों में मेहमानों की संख्या घटाने को मजबूर हैं।
व्यापारियों को राहत देने की मांग
डोटासरा ने राज्य सरकार से अपील की कि गैस संकट के कारण जिन छोटे व्यापारियों और व्यवसायों का काम प्रभावित हुआ है, उनके बिजली बिल माफ किए जाएं। उनका कहना था कि इससे उन्हें थोड़ी राहत मिलेगी और कारोबार को पटरी पर लौटाने में मदद मिलेगी।
साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से सवाल उठाए और जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों को लेकर भी केंद्र सरकार की जवाबदेही पर चर्चा की। उनका दावा था कि देशवासियों को इस समय केवल आधिकारिक और पारदर्शी जानकारी चाहिए, ताकि अफवाहों और असमंजस से बचा जा सके।







