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विदेश मंत्रालय का ट्रेनिंग प्रोग्राम: विदेश में नौकरी पाने में हो रहा मददगार

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Bureau Report

विदेश मंत्रालय का ट्रेनिंग प्रोग्राम: विदेश में नौकरी पाने में हो रहा मददगार

नई दिल्ली । विदेश मंत्रालय का प्री-डिपार्चर ओरिएंटेशन ट्रेनिंग (पीडीओटी) कार्यक्रम विदेश में नौकरी पाने की चाहत रखने वाले भारतीयों के लिए काफी मददगार साबित हो रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय प्रवासी श्रमिकों के सॉफ्ट स्किल्स को बढ़ाना है, जिसमें गंतव्य देश की संस्कृति, भाषा, परंपरा और स्थानीय नियम और विनियम शामिल हैं। पीडीओटी के तहत अभी तक 2,30,342 ट्रेनी को मुफ्त ट्रेनिंग दी जा चुकी है, जिससे उन्हें विदेश में नौकरी प्राप्त करने में मदद मिल रही है।

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यह जानकारी विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए दी। दरअसल राज्यसभा सांसद डॉ. भीम सिंह ने विदेश मंत्रालय से विदेश में युवाओं के लिए रोजगार, कौशल-आधारित अवसरों और प्रशिक्षण कार्यक्रम से संबंधित प्रश्न किया था। राज्यमंत्री ने इसका जवाब देते हुए सदन को बताया कि एक दिन की पीडीओटी ट्रेनिंग प्रवासी मजदूरों को सुरक्षित एवं कानूनी माइग्रेशन के तरीकों और उनके वेलफेयर तथा सुरक्षा के लिए अलग-अलग सरकारी प्रोग्राम के बारे में जागरूक करती है।
विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार राज्य मंत्री सिंह ने बताया पीडीओटी करिकुलम का कंटेंट पूरे देश में स्टैंडर्डाइज्ड किया गया है। मास्टर ट्रेनर्स के लिए कॉम्प्रिहेंसिव पीडीओटी मैनुअल सात भाषाओं यानी हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला, मलयालम, पंजाबी, तमिल और तेलुगु में डेवलप किए गए हैं। मिनिस्ट्री ने अप्रैल 2021 में ऑनलाइन पीडीओटी लॉन्च किया, ताकि उन संभावित प्रवासियों तक पहुंचा जा सके, जो पीडीओटी सेंटर्स से बहुत दूर रहते हैं। अभी 47 पीडीओटी सेंटर एनएसडीसी (16) और राज्य सरकारों (31) के जरिए चलाए जा रहे हैं। शुरू से अब तक पीडीओटी के तहत 2,30,342 ट्रेनी को ट्रेनिंग दी गई है।
बता दें कि विदेश मंत्रालय ने रोजगार के लिए विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए पीडीओटी शुरू की थी, जिसका उद्देश्य प्रवासियों को गंतव्य देश की संस्कृति, नियमों, भाषा और अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। 2018 में शुरू हुआ यह 8 घंटे का निशुल्क कार्यक्रम ‘सुरक्षित, प्रशिक्षित और विश्वास के साथ जाए’ मंत्र पर आधारित है। यह ट्रेनिंग अब ऑनलाइन और ऑफलाइन (इन-पर्सन) दोनों तरीकों से उपलब्ध है। यह पहल विशेष रूप से खाड़ी देशों में जाने वाले श्रमिकों के लिए मददगार है।

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