
दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक बयान ने सियासी और नीतिगत हलकों में हलचल मचा दी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रमुख ने भारत को ‘सेकेंड टियर AI पावर’ करार देते हुए टिप्पणी की, जिस पर भारत सरकार ने तुरंत और सख्त प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंच से ही तथ्यों के साथ जवाब देकर इस बयान को खारिज कर दिया।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत को AI के मामले में कमतर आंकना न सिर्फ भ्रामक है, बल्कि जमीनी हकीकत से भी कोसों दूर है। उन्होंने बताया कि भारत आज दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां बड़े पैमाने पर AI टैलेंट, स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। मंत्री ने भारत स्टैक, डिजिटल भुगतान प्रणाली, आधार-आधारित नवाचार और सरकारी AI मिशनों का जिक्र करते हुए साफ कहा कि भारत केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि AI समाधान देने वाला देश है।
वैष्णव ने यह भी रेखांकित किया कि भारत में लाखों इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और रिसर्चर वैश्विक कंपनियों के लिए AI मॉडल विकसित कर रहे हैं। इसके साथ ही सरकार ने सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और स्वदेशी AI मॉडल पर भारी निवेश शुरू किया है। उन्होंने दो टूक कहा कि भारत को ‘सेकेंड टियर’ कहना एक पुरानी सोच को दर्शाता है।
मंत्री के सधे और तथ्यपरक जवाब के बाद IMF प्रमुख की ओर से कोई पलटवार नहीं आया। दावोस में मौजूद प्रतिनिधियों के बीच यह संदेश साफ गया कि भारत अब तकनीक के मामले में हाशिये पर नहीं, बल्कि वैश्विक एजेंडा तय करने की स्थिति में है।









