
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर एक बार फिर भारत का सख्त और स्पष्ट रुख दुनिया के सामने रख दिया। पोलैंड के विदेश मंत्री के साथ आमने-सामने की बैठक के दौरान जयशंकर ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि भारत अपने पड़ोस में आतंकवाद को किसी भी रूप में बढ़ावा देने या उसे नजरअंदाज करने की नीति स्वीकार नहीं करेगा। उनके इस बयान को कूटनीतिक भाषा में दी गई सख्त चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
बैठक के दौरान जयशंकर ने साफ कहा कि आतंकवाद को “रणनीतिक हथियार” के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी वैश्विक शांति के लिए खतरा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कुछ देश खुले तौर पर आतंकियों को पनाह देते हैं, उन्हें प्रशिक्षण और वित्तीय मदद मुहैया कराते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मानवाधिकार और शांति की बातें करते हैं। भारत इस दोहरे मापदंड को लंबे समय से झेलता आ रहा है।
विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत किसी भी देश के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देता, लेकिन जब बात सीमा पार आतंकवाद और निर्दोष नागरिकों की जान की हो, तो चुप रहना विकल्प नहीं है। उन्होंने पोलैंड सहित यूरोपीय देशों से अपेक्षा जताई कि वे आतंकवाद के खिलाफ केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई करें।
जयशंकर ने कहा कि भारत लोकतंत्र, कानून के शासन और अंतरराष्ट्रीय नियमों में विश्वास करता है, लेकिन उसी दृढ़ता से अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करना भी जानता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आतंकवाद को अच्छे या बुरे की श्रेणी में बांटना खतरनाक है और अंततः इसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ता है।
इस मुलाकात के बाद यह संदेश साफ हो गया कि भारत अब आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी तरह की कूटनीतिक नरमी के मूड में नहीं है। जयशंकर की दो टूक बातों ने एक बार फिर यह जता दिया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति स्पष्ट, कठोर और समझौता-रहित









