
वॉशिंगटन/नई दिल्ली।- अमेरिका और भारत के व्यापारिक रिश्तों में नई तनातनी के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका में रूस के खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े एक प्रस्तावित बिल को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मंजूरी मिलने के बाद भारत पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस बिल पर अगले सप्ताह अमेरिकी संसद में वोटिंग कराए जाने की तैयारी है।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विधेयक उन देशों पर भारी आर्थिक शुल्क लगाने का प्रावधान करता है, जो रूस से तेल, गैस या अन्य रणनीतिक संसाधनों का व्यापार जारी रखे हुए हैं। भारत का नाम भी ऐसे देशों की सूची में लिया जा रहा है, जिसने यूक्रेन युद्ध के बावजूद रूस के साथ ऊर्जा व्यापार जारी रखा है।
प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिका रूस से व्यापार करने वाले देशों पर दंडात्मक टैरिफ, वित्तीय प्रतिबंध और व्यापारिक सुविधाओं में कटौती जैसे कदम उठा सकता है। यदि यह बिल संसद में पारित हो जाता है, तो भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर भारी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 500% टैरिफ लागू होने की स्थिति में भारतीय स्टील, फार्मा, टेक्सटाइल और ऑटो पार्ट्स सेक्टर को बड़ा झटका लग सकता है।
हालांकि भारत सरकार की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक नई दिल्ली हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है। भारत पहले भी साफ कर चुका है कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र है और वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले करता है।









