
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति को खुली धमकी देते हुए कहा है कि अगर अमेरिका की शर्तें नहीं मानी गईं तो हालात “और बदतर” किए जाएंगे। ट्रम्प के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने हालात की गंभीरता को देखते हुए आज आपात बैठक बुलाने का फैसला किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प ने एक सार्वजनिक बयान में कहा कि वेनेजुएला नेतृत्व को अमेरिका की बात माननी होगी, अन्यथा राजनीतिक और आर्थिक दबाव के साथ-साथ और कड़े कदम उठाए जाएंगे। ट्रम्प के इस बयान को वेनेजुएला के आंतरिक मामलों में सीधी दखल के रूप में देखा जा रहा है। वेनेजुएला सरकार और वहां के समर्थक देशों ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।
वेनेजुएला पहले से ही गहरे आर्थिक संकट, तेल निर्यात पर प्रतिबंध और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। ऐसे में ट्रम्प की यह चेतावनी हालात को और भड़काने वाली मानी जा रही है। कराकस प्रशासन का कहना है कि अमेरिका लगातार दबाव की राजनीति कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, आज होने वाली UNSC की इमरजेंसी मीटिंग में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन समेत अन्य सदस्य देश मौजूदा हालात पर चर्चा करेंगे। रूस और चीन पहले ही वेनेजुएला के समर्थन में बयान दे चुके हैं और अमेरिकी धमकियों का विरोध कर रहे हैं। माना जा रहा है कि सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिका की भूमिका पर तीखी बहस हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रम्प का यह बयान केवल वेनेजुएला तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संदेश वैश्विक राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है। तेल संपन्न वेनेजुएला पर दबाव बढ़ाकर अमेरिका न केवल रणनीतिक बढ़त हासिल करना चाहता है, बल्कि चीन और रूस के प्रभाव को भी सीमित करने की कोशिश कर रहा है।
वहीं, लैटिन अमेरिकी देशों के कई संगठनों ने संयम बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि धमकी और दबाव की बजाय संवाद और कूटनीति के जरिए संकट का समाधान निकाला जाना चाहिए।
अब सबकी नजर UNSC की बैठक पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ट्रम्प की चेतावनी और वेनेजुएला संकट पर किस दिशा में आगे बढ़ता है। यह बैठक आने वाले दिनों में वेनेजुएला की राजनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन को नई दिशा दे सकती है।









