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भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद: असहमति के बीच सहयोग की उम्मीद

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Written by
Rishabh Rai

नई दिल्ली/वॉशिंगटन – भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव ने एक नया मोड़ ले लिया है। अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाए जाने के फैसले से दोनों देशों के बीच पहले से ही जटिल आर्थिक संबंधों में और खिंचाव आ गया है। यह टैरिफ दुनिया में सबसे ऊंचा माना जा रहा है और आज से प्रभाव में आ गया है।

वाशिंगटन में एक इंटरव्यू के दौरान अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार असमानता बनी हुई है और अमेरिका को इससे घाटा हो रहा है। उन्होंने कहा, “भारत हमें सामान बेच रहा है, लेकिन हमारे उत्पादों पर वहां ऊंचे टैरिफ लगाए जाते हैं। ये संतुलन सही नहीं है।”

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हालांकि, बेसेंट ने उम्मीद जताई कि यह विवाद स्थायी नहीं होगा। उन्होंने कहा, “भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अमेरिका सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था। हमें भरोसा है कि हम साथ आ जाएंगे।” उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्हें भारतीय रुपए के डॉलर के मुकाबले ग्लोबल करंसी बनने की कोई चिंता नहीं है, क्योंकि वर्तमान में रुपया कमजोर स्थिति में है।

भारत का तीखा जवाब

भारत के विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने अमेरिका के इस कदम को “अनुचित और जानबूझकर किया गया निशाना” बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत को टारगेट किया है, जबकि अन्य देश भी रूस से तेल खरीद रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाए गए।

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के हालिया बयान ने भी काफी सुर्खियां बटोरीं, जिसमें उन्होंने अमेरिका से कहा, “अगर आपको हमारी रूस से तेल खरीद पर आपत्ति है, तो आप भारत से रिफाइंड तेल खरीदना बंद कर दीजिए।” इस बयान को भारत के अपने रणनीतिक हितों की स्पष्ट पैरवी के रूप में देखा जा रहा है।

तेल के मुद्दे पर असहमति

भारत, रूस से डिस्काउंट पर कच्चा तेल खरीद रहा है और उसे रिफाइन करके अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच रहा है। अमेरिका को लगता है कि यह भारत के लिए आर्थिक लाभ का जरिया बन गया है, जबकि अमेरिका रूस पर प्रतिबंधों के तहत दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

बेसेंट ने यह भी स्वीकार किया कि भारत और अमेरिका के रिश्ते जटिल हैं और सिर्फ रूसी तेल का मामला नहीं है। उनका कहना था कि, “हमें लगा था कि भारत शुरुआती समझौतों में शामिल हो सकता है। बातचीत में उन्होंने सहयोग किया भी, लेकिन तेल की खरीद ने मामला पेचीदा बना दिया।”

सकारात्मक संकेत: संवाद के दरवाज़े खुले

हालांकि दोनों पक्षों की ओर से तीखे बयान सामने आए हैं, लेकिन सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच बातचीत के रास्ते खुले हैं और इस टैरिफ विवाद को सुलझाने की कोशिशें जारी रहेंगी।

भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “यह एक अस्थायी दौर है। हमारे बीच लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी रही है और हम मिलकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय निर्यातकों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार उनके हितों की रक्षा करेगी।

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