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तमिलनाडु से जान बचाकर लौटे मजदूरों का दर्द- किसी का बेटा मरा तो किसी का भाई

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तमिलनाडु से जान बचाकर लौटे मजदूरों का दर्द- किसी का बेटा मरा तो किसी का भाई-पति, सड़कों पर पिटाई-धमकी, अधिकारी भी बिहारियों को राज्य छोड़ने की हिदायत दे रहे, दहशत ऐसी कि परिजन खुलकर बोल भी नहीं पा रहे

 

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तमिलनाडु से बिहार लौटे मजदूरों की पिटाई की शिकायत आने के बाद बवाल मचा हुआ है. BJP ट्वीट करके विरोध जता रही है. बताया गया कि कम पैसों पर काम करने के कारण उन्हें वहां से भगाया जा रहा है. इसी बीच बिहार के सीएम नीतीश कुमार का ट्वीट आया कि उन्हें अखबारों से तमिलनाडु में बिहार के लोगों पर हमले की जानकारी मिली है. अधिकारियों को जांच करने के निर्देश दे दिए. आज लोगों की टीम जांच करने के लिए तमिलनाडु रवाना भी हो गई है.

ऐसे में मामले की सच्चाई जानने एक निजी न्यूज़ एजेंसी की टीम पटना से 170 किलोमीटर दूर जमुई के सिकंदरा ब्लॉक पहुंची. बिहार का यही वो जिला है, जहां सबसे ज्यादा लोग तमिलनाडु से भागकर आए हैं. दोपहर के 3 बज रहे थे. रिपोर्टर जमुई के सिकंदरा के वार्ड नंबर-12 स्थित कृष्ण रविदास के घर पहुंचे. इनके 18 वर्षीय बेटे मोनू की संदिग्ध हालत में 8 दिन पहले तमिलनाडु में मौत हो गई. वह किराए के कमरे में रहता था. उसी कमरे में उसका शव लटका मिला था. इनके भाइयों का आरोप है कि उसे मार कर टांग दिया गया.

घर के बाहर बैठी मां सोमा देवी बदहवास हैं. वे वहां पहुंचने वाले सभी लोगों से अपने बेटे को जिंदा करने की गुहार लगा रही है. उन्होंने कहा कि उनका जवान बेटा चला गया. एक बेटा सदमे में है और दूसरा बेटा वहां क्रिया-कर्म कर रहा है. किसको दोष दूं. कई बार सवाल किए, लेकिन इससे ज्यादा उन्होंने कुछ नहीं बताया. इसकी वजह यह सामने आई कि एक बेटा तमिलनाडु में ही है, ऐसे में उन्हें डर है कि बयान दिया तो उसके साथ भी कोई अनहोनी हो सकती है.

इसके बाद जब सिकंदरा से 12 किलोमीटर दूर धधौर गांव पहुंचे, यहां हमारी मुलाकात नीतीश पासवान और बिक्कू से हुई. वे भी सहमे हुए थे. एक दिन पहले ही वो भागकर यहां पहुंचे हैं. पिछले 8 सालों से तमिलनाडु के तिरुपुर में एक कपड़ा फैक्ट्री की गाड़ी चलाने वाले नीतीश कहते हैं, हमने अपनी आंखों से बिहारी भाइयों को सड़क पर पिटते देखा, लेकिन मदद तक नहीं कर पाए. मदद करता तो मैं भी मारा जाता. हिन्दी बोलता देख लोग पीटने लगते थे. वहां की महिलाएं भी हम लोगों को आकर धमका रही थीं.

20 साल के बिक्कू ने बताया कि वो 4 साल से तमिलनाडु में साड़ी की फैक्ट्री में काम कर रहा था. कुछ दिनों से वहां के लोग उसे आकर कह रहे थे आप लोग चले जाइए, तब हम लोगों को काम मिलेगा. आप लोग रहेंगे तो परेशानी होगी. हालांकि फैक्ट्री के मालिक हमें रोक रहे थे, लेकिन कोई सुरक्षा नहीं दे रहे थे. धधौर के बाद हम वहां से 15 किलोमीटर की यात्रा कर बसबुट्‌टी गांव पहुंचे. यहां के लगभग 50 युवक दो दिन पहले तमिलनाडु से लौटे हैं. यहां पर शंभू राम, पंकज, कार्तिक और अमित से मुलाकात हुई. उन्होंने बताया कि अगर वे नहीं आते तो उनकी जान भी जा सकती थी. स्थानीय लोग रोज आकर उन्हें तमिलनाडु छोड़कर जाने के लिए कह रहे थे. यहां तक कि प्रशासनिक अधिकारी भी उनके इलाके में आकर कहते थे कि स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है, वे लोग चले जाएं नहीं तो वे उनकी कोई मदद नहीं कर पाएंगे.

पंकज ने बताया कि सबसे ज्यादा हिंसा तिरुपुर इलाके में हो रही है. वहां के स्थानीय लोग कह रहे हैं कि हम लोगों के कारण उन्हें रोजगार नहीं मिल पा रहा है. बसबुट्‌टी गांव में मिली जीना देवी ने बताया कि उनका बेटा राजीव कुमार एक साल से तिरुपुर की कपड़ा फैक्ट्री में काम कर रहा है. वह वहां हो रहीं हिंसक घटनाओं से बहुत डरा हुआ है. एक सप्ताह से कमरे में कैद है. वहां से लौटना चाहता है, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पा रहा. महिला सरकार से बेटे की वापसी कराने की गुहार लगा रही है. हमने तमिलनाडु से लौटे लगभग 50 से ज्यादा लोगों से बात की. सभी ने विवाद का एकमात्र कारण रोजगार को बताया. दरअसल, बिहारी मजदूर 600-800 रुपए में 10-12 घंटे काम करते हैं जबकि स्थानीय मजदूर 1000-1200 रुपए में 6-8 घंटे ही काम करना चाहते हैं. तमिलनाडु के श्रमिक बिहारियों से भी ऐसा करने के लिए कहते हैं. बिहारी मजदूरों के विरोध में तमिलनाडु में महिला-पुरुष लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं. वे सरकार से रोजगार की मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि बिहारियों के कारण तमिल लोगों को नौकरी नहीं मिल रही है. महीनों से चल रहा इनका आंदोलन अब हिंसक हो गया है.

श्रमिकों ने बताया कि तमिलनाडु में बिहार के लोगों की खूब डिमांड हैं. यहां से लोगों को वहां ले जाने के लिए कंपनी संचालक दलालों का सहारा लेते हैं. कई लोक-लुभावन वादे करते हैं. जाने, ठहरने सब कुछ का प्रबंध किया जाता है. एक गांव से अगर कुछ लोग चले जाते हैं तो फिर धीरे-धीरे दूसरे लोग भी जाने लगते हैं. श्रमिकों ने बताया कि बिहार के मजदूर तमिलनाडु में मुख्य रूप से कपड़ा और धागा फैक्ट्री में अलग-अलग काम करते हैं. इसके अलावा मार्बल मिस्त्री का काम करते हैं. बिहार के हर जिले के लोग वहां जाते हैं. बिहार के एक लाख से ज्यादा लोगों के वहां होने का दावा किया जा रहा है.

बिहार के चीफ सेक्रेटरी आमिर सुबहानी से मामले को समझने की कोशिश की गई तो उन्होंने बताया कि उनकी बात तमिलनाडु के चीफ सेक्रेटरी से हुई है. मामले की डिटेल मांगी है. साथ ही बिहार के लोगों को सुरक्षा देने के लिए कहा है. सुबहानी ने बताया कि बिहार के डीजीपी ने तमिलनाडु के डीजीपी से बात कर पूरे मामले की जानकारी मांगी है. इधर, तमिलनाडु के डीजीपी ने पूरे मामले को भ्रामक, अफवाह और झूठा बताया है. उन्होंने तमिलनाडु पुलिस के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा कि वायरल वीडियो गलत है. तमिलनाडु में इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है. यहां बिहारी पूरी तरह सुरक्षित हैं।

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