नई दिल्ली। यूक्रेन पर हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रूस की निंदा करते हुए अलग-अलग तीन प्रस्ताव आए। भारत ने तीनों में ग़ैर हाज़िर रहना ही वाजिब समझा। साथ ही हर बार अपने बयान में शब्दों के चयन पर ज़ोर देते हुए बातचीत से हल निकालने का रास्ता सुझाया।

रूस के राष्ट्रपति से पीएम मोदी ने दो बार बात की है तो दूसरी तरफ़ गुरुवार को क्वॉड की बैठक में हिस्सा भी लिया। प्रधान मंत्री मोदी ने ये बात फिर दोहराई कि सभी संबंधित पक्षों को बातचीत और कूटनीति का रास्ता अख़्तियार करना चाहिए।

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यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भारत के रुख़ को लेकर कई पूर्व कूटनीति के विश्लेषकों और राजनयिकों की राय बंटी हुई है।

भारत की ग़ैरहाजिरी को कुछ जानकर रूस की तरफ़ मूक समर्थन मान रहे हैं,  इसे भारत की विदेश नीति का हिस्सा बता रहे हैं। तो कुछ कह रहे हैं कि सही समय है जब भारत को किसी एक पक्ष को चुनने की ज़रूरत है।