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2022 चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश कैबिनेट विस्तार के जरिए बीजेपी कर रही है ब्राह्मण, ओबीसी, दलित, कुर्मी, निषाद और एससी वोट साधने का प्रयास

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2022 चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश कैबिनेट विस्तार के जरिए बीजेपी कर रही है ब्राह्मण, ओबीसी, दलित, कुर्मी, निषाद और एससी वोट साधने का प्रयास

लखनऊ, 2022 के चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपनी कैबिनेट का विस्तार करने जा रही है ।योगी सरकार की कैबिनेट विस्तार के जरिए बीजेपी ब्राह्मण, ओबीसी, दलित, कुर्मी, निषाद और एससी वोट को साधने की कोशिश कर रही है।

शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल गुजरात से लखनऊ राजभवन पहुंच गई हैं। दोपहर 2 बजे एक हाईलेवल मीटिंग हुई, इसके बाद कैबिनेट विस्तार की अधिकारिक घोषणा कर दी गई। वहीं, कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए जितिन प्रसाद को दिल्ली से लखनऊ बुलाया गया है। उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाने की चर्चा है। बाकी छह अन्य राज्यमंत्री बनेंगे।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब 6 महीने से भी कम समय बचा है, ऐसे में भाजपा क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधने के लिए यह प्रयोग कर रही है। दरअसल पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन के कारण जाट नाराज हैं। वहीं कुछ मंत्रियों को भाजपा दफ्तर बुलाया गया है। नॉन परफार्मेंस के आधार पर मंत्रियों का इस्तीफा भी लिया जा सकता है। चलिए अब आपको बताते हैं वो नाम जो मंत्री बन सकते हैं

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जितिन प्रसाद (ब्राह्मण)

संजय गौड़ (अनुसूचित जाति)

छत्रपाल गंगवार (कुर्मी)

धर्मवीर प्रजापति (ओबीसी)

पलटू राम (दलित)

दिनेश खटिक (एससी)

संगीता बिंद (निषाद)

इस मंत्रिमंडल विस्तार की खास बात ये है कि इसमें पिछड़े और दलित वर्ग पर ज्यादा जोर दिया गया है। सिर्फ जितिन प्रसाद को छोड़कर पार्टी ने पिछड़ा वर्ग पर बड़ा दांव चलने की रणनीति बनाई है।

पार्टी की पहली प्राथमिकता जातीय समीकरणों को साधने की है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 2017 में पार्टी की ऐतिहासिक जीत के पीछे UP का जातीय समीकरण था। पिछले विधानसभा चुनाव में BJP को UP में सभी जातियों का साथ मिला था, पार्टी ने सहयोगी दलों के साथ मिलकर 325 सीटें जीती थीं। कहा जाता है कि BJP की इस बड़ी जीत में गैर यादव OBC का बड़ा हाथ था। UP में OBC करीब 40% हैं और यह यूपी की सियासत में खासा महत्व रखते हैं।

दलित वर्ग कुल आबादी का करीब 21% है। इस लिहाज से ये भी सियासत में काफी मायने रखते हैं। इसके बाद नंबर आता है 20% अगड़ी जातियों का। इसमें सबसे ज्यादा 11% ब्राह्मण, 6% ठाकुर और 3% कायस्थ और वैश्य हैं। माना जाता है कि यादव को छोड़कर पिछड़ी जाति का बड़ा वोट BJP को मिला था। साथ ही जाटव को छोड़ बड़ी संख्या में दलितों ने भी BJP को वोट किया था, लेकिन जिन छोटे दलों को साथ लेकर BJP इन वोट बैंक को अपने पाले में लाई थी, वह अब पार्टी से या तो दूर हैं या फिर नाराज।

19 मार्च 2017 को सरकार गठन के बाद 22 अगस्त 2019 को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मंत्रिमंडल विस्तार किया था। उस दौरान मंत्रिमंडल में 56 सदस्य थे। कोरोना के चलते तीन मंत्रियों का निधन हो चुका है। हाल ही में राज्यमंत्री विजय कुमार कश्यप की मौत हुई थी, जबकि कोरोना की पहली लहर में मंत्री चेतन चौहान और मंत्री कमल रानी वरुण का निधन हो गया था। इसके बाद से ही प्रदेश मंत्रिमंडल में कई जगह खाली हैं।

UP में कैबिनेट मंत्रियों की अधिकतम संख्या 60 तक हो सकती है। पहले मंत्रिमंडल विस्तार में 6 स्वतंत्र प्रभार मंत्रियों को कैबिनेट की शपथ दिलाई गई थी। इसमें तीन नए चेहरे भी थे। मौजूदा मंत्रिमंडल में 23 कैबिनेट मंत्री, 9 स्वतंत्र प्रभार मंत्री और 22 राज्यमंत्री हैं, यानी कुल 54 मंत्री हैं। इस हिसाब से 6 मंत्री पद अभी खाली हैं। ऐसे में योगी सरकार अगर अपने कैबिनेट से किसी भी मंत्री को नहीं हटाती है तो भी 6 नए मंत्री बनाए जा सकते हैं।

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