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लखनऊ: कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 के साथ समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिशा-निर्देश दिए

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लखनऊ: कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 के साथ समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिशा-निर्देश दिए।

कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने में आंशिक कोरोना कर्फ्यू प्रभावी हो रहा है। लोग स्वतः आवागमन कम कर रहे हैं। वर्तमान में 06 मई की प्रातः 07 बजे तक आंशिक कोरोना कर्फ्यू लागू है, इसे 10 मई (सोमवार) को प्रातः सात 7 तक विस्तार दिया जा रहा है। सभी जिलों में इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

आंशिक कोरोना कर्फ्यू की अवधि में स्वास्थ्य सम्बन्धी कार्यों के लिए पूरी छूट रहेगी। औद्योगिक गतिविधियां, ई-कॉमर्स से सम्बंधित कार्य यथावत चलते रहेंगे। राशन वितरण और टीकाकरण का कार्य सुचारू रूप से जारी रहेगा। ऐसे लोगों को कतई न रोका जाए। पुलिस इनकी यथावश्यक मदद करे। विशेष परिस्थितियों के लिए ई-पास की व्यवस्था लागू की गई है।

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आंशिक कोरोना रेहड़ी पटरी व्यवसायियों, ठेला लगाने वालों, दैनिक श्रमिकों आदि के भरण-पोषण हेतु ‘सामुदायिक भोजनालयों’ का संचालन प्रारम्भ कर दिया जाए। कंटेनमेंट ज़ोन में केवल डोर-स्टेप डिलीवरी व्यवस्था ही आपूर्ति होगी। प्रत्येक दशा में कंटेनमेंट ज़ोन को प्रभावी बनाएं। औद्योगिक इकाइयों में भोजन का आदि का आवश्यकतानुसार प्रबन्ध रहे। कोई भी व्यक्ति भोजन के अभाव में परेशान न हो, इसे सुनिश्चित किया जाए।

कोरोना से लड़ाई में टेस्ट, ट्रैक और ट्रीट के मंत्र का अनुपालन करते हुए उत्तर प्रदेश में एक ओर जहां नए केस कम आ रहे हैं, जबकि स्वस्थ होने वालों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है। कुछ कुछ दिनों से दैनिक नए केस की तुलना में डिस्चार्ज होने वालों की संख्या अधिक हो रही है। बीते 24 घंटों में 21,165 नए केस आए हैं, जबकि 40,852 लोग स्वस्थ हुए हैं। टेस्ट के महत्व के अनुरूप प्रदेश में एग्रेसिव टेस्टिंग नीति अपनाई गई है। बीते 24 घंटों में 2,32,038 टेस्ट हुए हैं, इसमें 1,13,000 टेस्ट केवल आरटीपीसीआर माध्यम से हुए हैं। प्रदेश में अब तक 4,20,32,500 टेस्ट किए जा चुके हैं। यह देश में किसी राज्य द्वारा किया गया सर्वाधिक कोविड टेस्ट है।

कोविड से बचाव के लिए टीकाकरण सुरक्षा का अहम माध्यम है। इस महत्व को समझते हुए प्रदेश में टीकाकरण अभियान को तेजी से संचालित किया जा रहा है। 18-44 आयु वर्ग के लोगों के निःशुल्क टीकाकरण की घोषणा करने और क्रियान्वित करने वाला प्रथम राज्य उत्तर प्रदेश है। अब तक 18-44 आयु वर्ग के 51,284 नागरिकों को टीकाकरण का पहला डोज लगाया जा चुका है। इसी प्रकार, 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के टीकाकरण की प्रक्रिया सुचारु रूप से चल रही है। अब तक वर्तमान में 1,30,90,985 डोज एडमिनिस्टर किए जा चुके हैं। वैक्सीन वेस्टेज को न्यूनतम करने के लिए विशेष प्रयास किये जायें। 18-44 आयु वर्ग के लोगों के वैक्सीनेशन के लिए ग्लोबल टेंडर भी जारी कर दिया गया है। इसका अनुश्रवण करते हुए यथाशीघ्र आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए।

कतिपय अस्पतालों में बेड/ऑक्सीजन आदि की उपलब्धता होने के बाद भी अनावश्यक अभाव दर्शा कर मरीजों और उनके परिजनों के इलाज में आनाकानी करने की शिकायतें मिली हैं। कुछ जगहों पर नियत शुल्क की दर से अधिक की वसूली की बात भी सामने आई है। ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई की गई है। ऐसी सभी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए। सेक्टर मैजिस्ट्रेट की तैनाती ऐसी व्यवस्थाओं को बेहतर करने के लिए ही की गई है। इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। सेक्टर मैजिस्ट्रेट अस्पतालों के बाहर भी भ्रमण करते रहें, किसी मरीज/परिजन को किसी भी प्रकार की जरूरत हो तो उसे मुहैया कराएं।

कोविड संक्रमण से गांवों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार आज से सभी 97000 राजस्व गांवों में वृहद टेस्टिंग अभियान शुरू कर रही है। निगरानी समितियों के माध्यम से घर-घर स्क्रीनिंग हो, तापमान और ऑक्सीजन लेवल चेक किया जाएगा और लक्षणयुक्त व्यक्ति का आरआरटी द्वारा एंटीजन टेस्ट किया जाएगा। होम आइसोलेशन वाले मरीजों को मेडिकल किट और सतर्कता बरतने के लिए जानकारी दी जाए।आवश्यकतानुसार उन्हें क्वारन्टीन अथवा हायर मेडिकल सेंटर में इलाज के लिए भर्ती कराया जाए। स्वास्थ्य विभाग आरआरटी टीम की संख्या बढ़ाए। यह अभियान कोविड संक्रमण की चेन को तोड़ने में बहुत सहायक सिद्ध होगा।

प्रदेश में रेमेडेसीवीर सहित जीवनरक्षक मानी जा रही सभी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है। भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिए रेमेडेसीवीर का दैनिक आवंटन भी बढ़ा दिया है। सरकारी कोविड अस्पतालों में यह इंजेक्शन पूर्णतः निःशुल्क है। निजी अस्पतालों को जरूरत के अनुसार डीएम/सीएमओ द्वारा इसकी उपलब्धता कराई जा रही है। सभी जिलाधिकारी और सीएमओ यह सुनिश्चित करें कि जब भी किसी मरीज को यह इंजेक्शन दिया जाए तो वहां नर्सिंग स्टाफ के साथ-साथ एक चिकित्सक भी उपस्थित हो। इस जीवनरक्षक दवा की मांग, आपूर्ति और खपत का पूरा विवरण रखा जाए।

कोविड के संबंध में मेडिकल गाइडेंस के लिए राज्य स्तर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक टीम गठित की गई है। यह टीम प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों/कोविड अस्पतालों के सतत संपर्क में रहेगी। राज्य स्तरीय टीम-09 को भी समय-समय पर परामर्श देगी। हमें कोविड प्रबंधन में तकनीकी और प्रबन्धन शिक्षण संस्थानों से भी समय-समय पर सहायता लेनी चाहिए।

कोविड मरीजों के संबंध में दैनिक रिपोर्ट एकीकृत पोर्टल पर हर दिन जरूर अपलोड की जाए। हर कोविड हॉस्पिटल प्रत्येक दिन में दो बार अपने यहां खाली बेड्स की संख्या के बारे में अस्पताल के बाहर सार्वजनिक रूप से जानकारी चस्पा करे। इसे आइसीसीसी के पोर्टल पर भी अपलोड कराया जाए। डिस्चार्ज पॉलिस को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

कोविड संक्रमण की स्थिति को देखते हुए प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है। मेडिकल एजुकेशन, स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ निजी अस्पतालों को भी कोविड मरीजों के उपचार के लिए क्रियाशील किया गया है। जरूरत बेड की संख्या बढ़ाने की है। हमें सभी जिलों में बेड्स की वर्तमान क्षमता को दोगुना करना होगा। चिकित्सा शिक्षा मंत्री स्तर से कार्यवाही सुनिश्चित कराई जाए।

मरीजों को ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सभी जिलों में 4,370 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए गए हैं। प्रत्येक सीएचसी में 20-20 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए जाएं।सीएसआर के माध्यम से भी कंसंट्रेटर प्राप्त हुए हैं। सभी क्रियाशील रहें। इसी प्रकार, सभी जिलों को वेंटिलेटर भी उपलब्ध कराए गए हैं। सभी जिलों में इन जीवनरक्षक उपकरणों का क्रियाशील होना सुनिश्चित कराएं। मुख्य सचिव स्तर से इसकी निगरानी की जाए। कतिपय जिलों में एनेस्थेटिक नहीं हैं वहां अगले 24 घंटे में एनेस्थेटिक और तकनीशियन उपलब्ध कराए जाएं।

ऑक्सीजन प्लांट के सम्बंध में भारत सरकार, राज्य सरकार अथवा निजी क्षेत्र द्वारा किए जा रहे सभी प्रयासों का प्रभावी अनुश्रवण सुनिश्चित कराया जाए। मुख्य सचिव इनकी दैनिक समीक्षा करें। यह कार्य यथाशीघ्र पूर्ण कराया जाए।

प्रदेश में मरीजों के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारु करने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं। हर दिन आपूर्ति में बढ़ोतरी हो रही है। कल 24 घंटे में साढ़े सात सौ मीट्रिक टन से अधिक का वितरण सरकारी व निजी अस्पतालों को उपलब्ध कराया गया। आज 800 मीट्रिक टन से अधिक ऑक्सीजन वितरण का प्रयास है। जिन जिलों से सूचना प्राप्त होती है, वहां तत्काल अतिरिक्त व्यवस्था कराई जाती है। बरेली और मुरादाबाद मंडल के लिए हर दिन ट्रेन भेजी जा रही है। आगरा के लिए वायु सेवा का सतत उपयोग हो रहा है।

ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ वितरण व्यवस्था को और बेहतर किये जाने की जरूरत है। हर जिले के सम्बंध में पृथक कार्ययोजना तैयार हो। होम आइसोलेशन में उपचाराधीन मरीजों को ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए हर जिले में एक रीफिलर को नामित करें। ऑक्सिजन ऑडिट की प्रारंभिक रिपोर्ट को दृष्टिगत रखते हुए ऑक्सीजन के वितरण व्यवस्था लागू करें। ऑक्सीजन वेस्टेज न हो, यह सुनिश्चित करें। भारत सरकार से 14 नए टैंकर मिले हैं। टैंकरों की संख्या और बढ़ाये जाने की दिशा में प्रयास किये जायें।

स्वच्छता, सैनिटाइजेशन तथा फाॅगिंग कार्य युद्ध स्तर पर किया जाए। इसके लिए फायर विभाग के वाहनों का भी उपयोग किया जाए। मास्क के अनिवार्य उपयोग के सम्बन्ध में प्रवर्तन की कार्यवाही प्रभावी ढंग से जारी रखी जाए। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी समिति पूरी सक्रियता से कार्य करें। औद्योगिक इकाइयों में कोविड प्रोटोकाॅल का पालन कराते हुए गतिविधियां संचालित की जाएं।

108 एम्बुलेंस सेवा की 75 फीसदी एम्बुलेंस कोविड डेडिकेटेड की जाए। शेष 25 फीसदी को नॉन कोविड मरीजों के उपयोगार्थ आरक्षित रखा जाए। मरीज अथवा परिजन को जरूरत पर तत्काल एम्बुलेंस/शव वाहन उपलब्ध कराया जाए।

आइसीसीसी, कोविड प्रबंधन की रीढ़ है। लखनऊ सहित सभी जिलों में आइसीसीसी के कार्मिक मरीजों/परिजनों को समुचित जानकारी दें। व्यवहार संवेदनशील रखें। डीएम व सीएमओ हर दिन यहां भ्रमण कर निरीक्षण जरूर करें। दैनिक बैठक यहीं होनी चाहिए। जिलों में कोविड व नॉन कोविड मरीजों के लिए टेलीकन्सल्टेशन सुविधा को और बेहतर किये जाने की जरूरत है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री इस व्यवस्था की दैनिक समीक्षा सुनिश्चित करें।

 

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