
महिलाएं आज हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। नौकरी हो, कारोबार हो या कोई दूसरा पेशा, महिलाएं अपनी मेहनत और काबिलियत साबित कर रही हैं। लेकिन काम पर आने-जाने के मामले में अभी भी पुरुषों और महिलाओं के बीच बड़ा अंतर है। सरकार की एक नई रिपोर्ट में सामने आया है कि महिलाएं काम के लिए पुरुषों की तुलना में कम दूरी तय करती हैं और यात्रा पर खर्च भी कम करती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 15 साल और उससे ज्यादा उम्र की केवल 41.9 प्रतिशत कामकाजी महिलाएं ऐसी हैं, जो अपने काम की जगह तक पहुंचने के लिए एक किलोमीटर या उससे ज्यादा दूरी तय करती हैं। वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा 61.9 प्रतिशत है। यानी पुरुषों की तुलना में काफी कम महिलाएं काम के लिए लंबी दूरी तय करती हैं।
यह आंकड़े स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) के पहले नेशनल हाउसहोल्ड ट्रैवल सर्वे से सामने आए हैं। इस सर्वे में लोगों के आने-जाने के तरीके, दूरी और यात्रा पर होने वाले खर्च को लेकर जानकारी जुटाई गई है।
गांवों में महिलाओं और पुरुषों में ज्यादा अंतर
ग्रामीण इलाकों में महिलाओं और पुरुषों के बीच यह अंतर और ज्यादा देखने को मिलता है। गांवों में सिर्फ 37.7 प्रतिशत कामकाजी महिलाएं ही ऐसी हैं, जो काम के लिए कम से कम एक किलोमीटर की दूरी तय करती हैं। इसके मुकाबले पुरुषों का आंकड़ा 59.6 प्रतिशत है।
इसका एक कारण यह हो सकता है कि गांवों में महिलाओं को घर के आसपास ही काम मिल जाता है। खेती, पशुपालन, छोटे कारोबार और दूसरे स्थानीय कामों में महिलाएं अपने घर या गांव के पास रहकर काम कर लेती हैं। इसके अलावा घर और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण भी कई महिलाओं के लिए दूर जाकर नौकरी करना आसान नहीं होता।
सुरक्षा भी एक बड़ी वजह हो सकती है। कई जगहों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन की कमी है। ऐसे में महिलाएं घर से ज्यादा दूर जाकर काम करने के बजाय आसपास के रोजगार को प्राथमिकता देती हैं।
यात्रा खर्च में भी बड़ा अंतर
काम पर आने-जाने के खर्च में भी महिलाओं और पुरुषों के बीच काफी अंतर है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में एक कामकाजी महिला अपने कार्यस्थल तक आने-जाने के लिए हर महीने औसतन 307 रुपये खर्च करती है। वहीं पुरुषों का औसत यात्रा खर्च 607 रुपये है।
यानी ग्रामीण इलाकों में पुरुषों का यात्रा खर्च महिलाओं के मुकाबले लगभग दोगुना है। इसका सीधा संबंध इस बात से भी है कि पुरुष काम के लिए ज्यादा दूरी तय करते हैं।
शहरों में भी महिलाओं का यात्रा खर्च पुरुषों से कम है। शहरी इलाकों में कामकाजी महिलाओं का औसत मासिक यात्रा खर्च 884 रुपये है, जबकि पुरुषों का खर्च 1,076 रुपये है।
सफर के साधन भी अलग
महिलाएं और पुरुष काम पर जाने के लिए अलग-अलग साधनों का इस्तेमाल भी करते हैं। शहरों में करीब 21.7 प्रतिशत कामकाजी महिलाएं बस से यात्रा करती हैं। वहीं करीब 57 प्रतिशत पुरुष काम पर आने-जाने के लिए दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल करते हैं।
इससे पता चलता है कि महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर है। दूसरी तरफ, पुरुष निजी वाहनों का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। निजी वाहन से लंबी दूरी तय करने पर पेट्रोल और दूसरे खर्च बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि पुरुषों का यात्रा खर्च महिलाओं की तुलना में ज्यादा दिखाई देता है।
लड़कियों की स्कूल यात्रा पर भी कम खर्च
रिपोर्ट में बच्चों के स्कूल आने-जाने के खर्च की भी जानकारी दी गई है। आंकड़ों के मुताबिक, परिवार लड़कियों के स्कूल आने-जाने पर हर महीने औसतन 423 रुपये खर्च करते हैं। वहीं लड़कों के लिए यह खर्च 460 रुपये है।
लड़के और लड़कियों के बीच स्कूल यात्रा के खर्च में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। हालांकि, रोजगार के स्तर पर पहुंचने के बाद महिलाओं की यात्रा और काम से जुड़े अवसरों में अंतर साफ दिखाई देता है।
सुरक्षित परिवहन से बढ़ सकते हैं रोजगार के अवसर
विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं को रोजगार के ज्यादा अवसर देने के लिए सुरक्षित और सस्ता परिवहन उपलब्ध कराना जरूरी है। अगर महिलाओं के लिए घर से दूर जाकर काम करना आसान और सुरक्षित होगा, तो वे रोजगार के ज्यादा विकल्प चुन सकती हैं।
महिलाओं का कम सफर करना सिर्फ यात्रा का मामला नहीं है। इसका असर उनके रोजगार और आर्थिक स्वतंत्रता पर भी पड़ सकता है। अगर किसी महिला को घर के पास ही काम मिल रहा है तो वह दूर नौकरी के लिए नहीं जाएगी। लेकिन अगर सुरक्षित परिवहन उपलब्ध हो तो वह दूसरे इलाकों में भी नौकरी तलाश सकती है।
सरकार की इस रिपोर्ट से यह साफ होता है कि महिलाएं काम के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन काम तक पहुंचने के लिए उनकी यात्रा अभी भी पुरुषों से कम है। खासकर ग्रामीण इलाकों में यह अंतर काफी बड़ा है। महिलाओं के लिए बेहतर परिवहन, सुरक्षा और रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो इस अंतर को कम किया जा सकता है। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी और देश के विकास में भी उनका योगदान और मजबूत होगा।







