
भारत-रूस के बीच 2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
नई दिल्ली। एस. जयशंकर ने भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा है कि दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वह ‘भारत और रूस: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर’ सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे।
विदेश मंत्री ने बदलते वैश्विक परिदृश्य में रूस को भारत का विश्वसनीय साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध दशकों से वैश्विक शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यह लक्ष्य नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई शिखर वार्ता में तय किया गया था।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि व्यापार बढ़ाने के लिए गैर-टैरिफ बाधाओं और नियामक अड़चनों को दूर करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने रूस को भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक प्रमुख भागीदार बताते हुए कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की नई इकाइयों के निर्माण में सहयोग तेज करने की बात कही। भारत ने 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें रूस की अहम भूमिका मानी जा रही है।
रक्षा और ऊर्जा जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के अलावा कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, डिजिटल अर्थव्यवस्था और कौशल विकास जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने रूसी बाजार में भारतीय दवाओं, कृषि उत्पादों और डिजिटल तकनीक के निर्यात को बढ़ाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
सम्मेलन में चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारा और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को जल्द शुरू करने पर बल दिया गया, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत और समय में कमी आएगी। साथ ही, व्यापार को सुगम बनाने के लिए रुपये-रूबल में लेनदेन प्रणाली को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।









