
कांग्रेस नेता राहुल गांधी सोमवार (23 मार्च) को गुजरात के वडोदरा शहर में पार्टी के ‘आदिवासी अधिकार संविधान सम्मेलन’ में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने संसद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन को लेकर तीखा निशाना साधा और मोदी सरकार पर देश के सामने मौजूदा आर्थिक स्थिति से निपटने के लिए स्पष्ट दिशा और रणनीति न होने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस समझौते में पहली बार भारत के कृषि क्षेत्र को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोला गया है, जो अब तक कभी नहीं हुआ। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत का कीमती डेटा अमेरिका को उपलब्ध कराया गया, जबकि अमेरिकी कंपनियों को टैक्स छूट दी जाती रही और आम नागरिक पर टैक्स का बोझ बढ़ता रहा। राहुल गांधी ने कहा, “हमने अमेरिका को बहुत कुछ दिया, लेकिन उनसे कुछ नहीं लिया।“
सम्मेलन में उन्होंने बीजेपी पर आदिवासियों को ‘वनवासी’ कहने का आरोप भी लगाया। राहुल गांधी के अनुसार, ‘आदिवासी’ का अर्थ है इस भूमि का पहला मालिक, लेकिन ‘वनवासी’ शब्द का प्रयोग कर आदिवासियों को सिर्फ जंगल का निवासी बनाना और उनके अधिकारों को कमजोर करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब जंगलों को काटा जाएगा, तो आदिवासियों के पास कोई अधिकार नहीं बचेगा और वे मजदूरी करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
राहुल गांधी ने आदिवासियों के लिए अलग बजट की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं आदिवासियों के लिए अलग बजट हो, उनके लिए हाई-क्वालिटी स्कूल और कॉलेज हों। जंगल में रहने वाले युवाओं को भी अंग्रेजी और आधुनिक शिक्षा की जरूरत है। हमारा सपना है कि कल की CEO की सूची में आदिवासी युवाओं के नाम हों।”
इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा थोपकर शैक्षणिक संस्थानों को कमजोर किया जा रहा है, जिससे पिछड़े और आदिवासी वर्ग अपने हक से वंचित रह जाए। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस नफरत के खिलाफ लड़ाई लड़ेगी और आदिवासियों को उनका हक, जल-जंगल-जमीन और विश्वस्तरीय शिक्षा सुनिश्चित करेगी।
अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि आदिवासियों का विकास और उनकी सुरक्षा ही असली राष्ट्रीय विकास है। उनका मानना है कि देश की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा अनिवार्य है।








