
ट्रस्ट और टेक्नोलॉजी से बदला उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
लखनऊ, 16 मार्च। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ट्रस्ट और टेक्नोलॉजी उत्तर प्रदेश के परिवर्तन के दो प्रमुख आधार बने हैं। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था तीन गुना बढ़ी है और बेहतर कानून व्यवस्था के कारण निवेश व विकास को नई गति मिली है।

सोमवार को नेशनल डिफेंस कॉलेज नई दिल्ली द्वारा आयोजित नेशनल सिक्योरिटी एंड स्ट्रेटजिक स्टडी कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे भारतीय सशस्त्र बलों, विभिन्न देशों की सेनाओं और भारत सरकार की सिविल सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से संवाद किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में सुरक्षा बड़ी चुनौती थी, लेकिन सरकार ने रूल ऑफ लॉ और सुशासन स्थापित कर अवैध वसूली और अराजकता पर प्रभावी नियंत्रण किया। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश निवेश का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण इकाई स्थापित की गई है, जबकि कानपुर और हरदोई में भी रक्षा उत्पादन से जुड़े निवेश आए हैं।
उन्होंने कहा कि जेवर में देश का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट निर्माणाधीन है और गंगा एक्सप्रेसवे लगभग पूर्ण होने की स्थिति में है। कानून व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए प्रदेश के हर मंडल में साइबर फोरेंसिक लैब, प्रत्येक जिले में फोरेंसिक मोबाइल वैन और 75 साइबर थाने स्थापित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में अब तक 62 लाख से अधिक गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि डीबीटी व्यवस्था के माध्यम से एक करोड़ से अधिक निराश्रित महिलाओं, वृद्धजनों और दिव्यांगजनों को प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये की पेंशन सीधे खातों में भेजी जा रही है।
संवाद के दौरान अधिकारियों ने नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रश्न किया, जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि टाइमलाइन, नियमित मॉनिटरिंग, फील्ड विजिट और जवाबदेही तय करने से ही योजनाओं के बेहतर परिणाम मिलते हैं।
उन्होंने अपनी जापान और सिंगापुर यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि जापान का सिविक सेंस, स्वच्छता और तकनीकी अनुशासन अनुकरणीय है। वहां के उद्योग जगत ने उत्तर प्रदेश में निवेश को लेकर गहरी रुचि दिखाई है।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के कमांडेंट मनीष कुमार गुप्ता कर रहे थे। इसमें भारतीय सशस्त्र बलों, विभिन्न देशों की सेनाओं तथा भारत सरकार की सिविल सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।








